खराब सड़कों के कारण हर दिन 80 मौतें, सड़क हादसों पर सरकार की चौंकाने वाली रिपोर्ट
Sanjay Dhiman | Jul 31, 2026, 19:14 IST
india-bad-road-deaths-report-2026
सरकार की रिपोर्ट में खुलासा, हर दिन 80 लोगों की मौत सिर्फ खराब सड़क और इंजीनियरिंग खामियों से हो रही है। मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के आंकड़े चिंताजनक।
घर से निकलते समय हर कोई यही सोचता है कि सुरक्षित घर लौटेगा। लेकिन भारत में हर दिन सैकड़ों परिवार सड़क हादसों में अपनों को खो रहे हैं। ज्यादातर लोग मानते हैं कि तेज रफ्तार या लापरवाही ही हादसों की वजह होती है। लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH – Ministry of Road Transport and Highways) की नई रिपोर्ट कुछ और ही कहानी बताती है।
रिपोर्ट के मुताबिक खराब सड़कें, अधूरा निर्माण, गड्ढे और गलत डिजाइन भी उतनी ही जानलेवा साबित हो रहे हैं। देश में हर दिन औसतन 80 लोगों की जान सिर्फ सड़क की खराब हालत और इंजीनियरिंग खामियों की वजह से जा रही है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि सड़क सुरक्षा केवल ट्रैफिक नियम मानने से नहीं जुड़ी।
सुधार से रुक सकते हैं
'रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2024' रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। साल 2024 में खराब सड़क, अधूरे निर्माण और इंजीनियरिंग खामियों से जुड़े मामलों में हजारों दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए और अपनी जान भी गंवाई।
रिपोर्ट कहती है कि अगर निर्माण मानकों का सख्ती से पालन हो और समय पर मरम्मत हो, तो बड़ी संख्या में हादसे टाले जा सकते हैं। खतरनाक स्थानों की पहचान करना भी उतना ही जरूरी है।
![61f0c11b-377]()
मंत्रालय के अनुसार 2024 में खराब सड़क, अधूरे निर्माण और डिजाइन से जुड़े कारणों से 10 हजार से ज्यादा हादसे दर्ज हुए। इनमें बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और कई लोगों की जान गई। औसतन हर दिन करीब 80 लोगों की मौत सिर्फ सड़क की खामियों से हो रही है। रिपोर्ट साफ कहती है कि सुरक्षित निर्माण और नियमित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है जितना ट्रैफिक नियम मानना।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार साल दर साल हादसे और मौतें दोनों बढ़ी हैं।
वहीं 2026 में 27 जुलाई तक 2.96 लाख हादसे, 1.01 लाख मौतें और 3.38 लाख लोग घायल दर्ज हो चुके हैं।
राज्यों की बात करें तो तमिलनाडु सबसे आगे रहा, जहां 39,666 हादसे दर्ज हुए। इसके बाद मध्य प्रदेश में 34,947, उत्तर प्रदेश में 26,718, कर्नाटक में 24,929, महाराष्ट्र में 19,229 और राजस्थान में 14,522 हादसे दर्ज हुए। मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां 14,794 लोगों की जान गई। इसके बाद तमिलनाडु, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का नंबर आता है।
2026 में सबसे ज्यादा 46,075 हादसे ओवरस्पीडिंग से हुए। गलत दिशा में गाड़ी चलाने से 2,397, नशे में ड्राइविंग से 1,443, रेड लाइट जंप करने से 193 और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से 84 हादसे दर्ज हुए। तेज रफ्तार आज भी सबसे बड़ी वजह बनी हुई है।
आंकड़ों के मुताबिक 2026 में खराब सड़क हालत से 29,628 हादसे हुए। गड्ढों की वजह से 100 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं। हालांकि सबसे बड़ी वजह ड्राइवर का ध्यान भटकना रहा, जिससे 1.51 लाख से ज्यादा हादसे हुए। साफ है कि खराब सड़कें और लापरवाही दोनों मिलकर खतरा बढ़ा रही हैं।
पैदल चलने वालों की मौत भी लगातार बढ़ रही है। 2021 में 29,124 पैदल यात्रियों की मौत हुई थी। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 48,039 तक पहुंच गया। 2026 में 27 जुलाई तक 24,446 पैदल यात्री जान गंवा चुके हैं। सबसे ज्यादा मामले तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और पश्चिम बंगाल में सामने आए हैं।
सरकार ने 2023 से 2025 के e-DAR (Electronic Detailed Accident Report) डेटा के आधार पर देशभर में 6,358 ब्लैक कॉरिडोर की पहचान की है। इनकी पहचान IIT (Indian Institute of Technology) कानपुर के AI (Artificial Intelligence) आधारित सिस्टम से हुई है। इन जगहों पर रोड मार्किंग, साइन बोर्ड, क्रैश बैरियर, हाईवे लाइटिंग और सड़क चौड़ीकरण जैसे सुधार किए जा रहे हैं।
सरकार सड़क सुरक्षा के लिए चार बिंदुओं पर काम कर रही है।
यह खबरें भी पढ़ें...
केंद्र की स्कीम में पिछड़ा एमपी, न सड़कें बनीं, न छात्रावास,गैस कनेक्शन में अव्वल
सड़क खराब मिली तो इंजीनियर होंगे जिम्मेदार, PWD मंत्री राकेश सिंह ने दी चेतावनी
सड़क पर बिना कपड़े क्यों घूम रहा था UPSC एस्पिरेंट? HC ने पुलिस से मांगा जवाब
भोपाल किसान आंदोलन से थमा शहर: सड़कें जाम, सरकार पर बढ़ा दबाव, मंत्रालय में बातचीत शुरू
रिपोर्ट के मुताबिक खराब सड़कें, अधूरा निर्माण, गड्ढे और गलत डिजाइन भी उतनी ही जानलेवा साबित हो रहे हैं। देश में हर दिन औसतन 80 लोगों की जान सिर्फ सड़क की खराब हालत और इंजीनियरिंग खामियों की वजह से जा रही है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि सड़क सुरक्षा केवल ट्रैफिक नियम मानने से नहीं जुड़ी।
सुधार से रुक सकते हैं सड़क हादसे
रिपोर्ट कहती है कि अगर निर्माण मानकों का सख्ती से पालन हो और समय पर मरम्मत हो, तो बड़ी संख्या में हादसे टाले जा सकते हैं। खतरनाक स्थानों की पहचान करना भी उतना ही जरूरी है।
61f0c11b-377
क्या कहती है रिपोर्ट?
लगातार बढ़ते हादसे
| साल | मौतें |
|---|---|
| 2021 | 1.53 लाख |
| 2022 | 1.68 लाख |
| 2023 | 1.72 लाख |
| 2024 | 1.77 लाख |
| 2025 | 1.83 लाख |
किन राज्यों में सबसे ज्यादा हादसे?
हादसों की सबसे बड़ी वजहें
खराब सड़कें भी जानलेवा
पैदल यात्रियों पर खतरा
सरकार का सुधार अभियान
4E रणनीति पर जोर
- शिक्षा: लोगों में जागरूकता बढ़ाना
- इंजीनियरिंग: सड़क और वाहन सुरक्षित बनाना
- प्रवर्तन: नियमों का सख्ती से पालन कराना
- आपातकालीन चिकित्सा: हादसे के बाद तुरंत इलाज देना
यह खबरें भी पढ़ें...
केंद्र की स्कीम में पिछड़ा एमपी, न सड़कें बनीं, न छात्रावास,गैस कनेक्शन में अव्वल
सड़क खराब मिली तो इंजीनियर होंगे जिम्मेदार, PWD मंत्री राकेश सिंह ने दी चेतावनी
सड़क पर बिना कपड़े क्यों घूम रहा था UPSC एस्पिरेंट? HC ने पुलिस से मांगा जवाब
भोपाल किसान आंदोलन से थमा शहर: सड़कें जाम, सरकार पर बढ़ा दबाव, मंत्रालय में बातचीत शुरू
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava