FMCG Market Update: महंगी चाय से दूरी, क्यों कॉफी के दीवाने हो रहे लोग
समझें क्या है पूरा मामला
- भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है।
- चाय की जगह कॉफी और चॉकलेट ने लेनी शुरू कर दी है।
- उत्तर भारत में चॉकलेट की बिक्री इस साल 35 से 40 फीसदी बढ़ी है।
- ग्रामीण इलाकों में 10 रुपए वाले छोटे पैक जोरदार बिक रहे हैं।
चाय से कॉफी की तरफ बढ़ रहे कदम
भारत में चाय पीने वालों की तादाद घट रही है। उत्तरी और पश्चिमी भारत में कॉफी की बिक्री सालाना 15 से 20 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। पूर्वी भारत में भी यह दर 15 से 20 फीसदी के करीब है।
चाय महंगी हो गई है और लोग इसकी जगह कॉफी अपना रहे हैं। यह बदलाव शहरों तक सीमित नहीं है- छोटे कस्बों में भी यही रुझान दिख रहा है।
चॉकलेट ने चाय को पीछे छोड़ा
उत्तर भारत में चॉकलेट की बिक्री पश्चिम और पूर्वी राज्यों के मुकाबले चार गुना तेजी से बढ़ रही है। उत्तर भारत में यह बढ़त 35 से 40 फीसदी है। दक्षिण में 10 से 15 फीसदी और पश्चिम में 15 से 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार कई बाजारों में अब चाय से ज्यादा चॉकलेट बिक रही है। यह भारतीय उपभोक्ता की बदलती आदतों का सबसे बड़ा संकेत है।
गांव-कस्बों में 10 रुपए वाले कैम्प का राज
ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में 10 रुपए वाले कोल्ड ड्रिंक सेगमेंट पर कैम्प (Camp) का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ब्रांड की बिक्री सालाना 40 से 50 फीसदी बढ़ रही है। बाजार में इसकी हिस्सेदारी 6 से 7 फीसदी तक पहुंच चुकी है।
छोटे पैक और कम कीमत ने इसे गांव का पसंदीदा ब्रांड बना दिया है। जहां जेब हल्की है, वहां छोटा पैक ही सही विकल्प बनता है।
प्रीमियम बाजार में कोक-पेप्सी मजबूत
शहरी और प्रीमियम बाजार में कोका-कोला (Coca Cola) और पेप्सी (Pepsi) की पकड़ अभी भी मजबूत है। इनकी कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की मांग सालाना 10 से 20 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस बाजार में कैम्प का कोई खास असर अभी महसूस नहीं हो रहा।
यानी बाजार दो हिस्सों में बंट गया है। गांव में सस्ता, शहर में प्रीमियम।
मैगी की वापसी, बिक्री 20 फीसदी बढ़ी
इंस्टेंट नूडल ब्रांड मैगी (Maggi) की मांग पूरे देश में बढ़ी है। उत्तर भारत में इसकी बिक्री 15 से 20 फीसदी तक बढ़ रही है। पारंपरिक मसाला फ्लेवर के साथ नए वैरिएंट भी बिक्री बढ़ाने में काम आ रहे हैं।
सप्लाई चेन भी हुई चुस्त
बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों ने सप्लाई चेन (Supply Chain) दुरुस्त कर ली है। पहले रिटेलर और स्टॉकिस्ट के पास हफ्ते में एक बार माल आता था। अब यह डिलीवरी हफ्ते में तीन बार हो रही है।
सिगरेट महंगी हुई तो खपत घटी
फरवरी-मार्च में सिगरेट की कीमतें 25 से 30 फीसदी बढ़ने के बाद मांग 5 से 6 फीसदी घट गई है। लोग पैसे बचाने के लिए कम सिगरेट पी रहे हैं। इस पर कंपनियों ने कम लंबाई वाली सिगरेट बाजार में उतारी हैं।
इसके साथ ही देश में नकली और अवैध सिगरेट का कारोबार 20 से 25 फीसदी तक पहुंच चुका है। कीमतों में बढ़ोतरी ने इस अवैध कारोबार को और हवा दी है।
वैल्यू फॉर मनी बना नया मंत्र
इस पूरी तस्वीर में एक बात साफ है- भारतीय उपभोक्ता अब हर खरीदारी में पैसे का सही इस्तेमाल चाहता है। महंगे उत्पाद भी तब बिक रहे हैं जब उनके छोटे पैक उपलब्ध हों। कीमत, सुविधा और मूल्य - यही तीन चीजें आज बाजार की दिशा तय कर रही हैं।
FAQ
- भारत में चाय की जगह कॉफी क्यों लोकप्रिय हो रही है?
चाय की कीमतें बढ़ने से लोग सस्ते और सुविधाजनक विकल्प की तलाश में हैं। कॉफी के छोटे और इंस्टेंट पैक आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। उत्तर और पश्चिम भारत में कॉफी की बिक्री सालाना 15 से 20 फीसदी बढ़ रही है। - ग्रामीण बाजार में कौन सा ब्रांड सबसे तेजी से बढ़ रहा है?
10 रुपए वाले कोल्ड ड्रिंक सेगमेंट में कैम्प का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। इसकी बिक्री सालाना 40 से 50 फीसदी की दर से बढ़ रही है। बाजार हिस्सेदारी 6 से 7 फीसदी तक पहुंच चुकी है। - भारत में अवैध सिगरेट का कारोबार कितना बड़ा हो गया है?
सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार देश में नकली और अवैध सिगरेट का कारोबार 20 से 25 फीसदी तक पहुंच चुका है। सिगरेट की कीमतों में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी ने इस अवैध बाजार को बढ़ावा दिया है।
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