एमपी में दुकानों से बिक रहा सर्टिफाइड के नाम पर अमानक बीज, कृषि विभाग बेखबर

Sanjay Sharma | Jun 11, 2026, 08:00 IST
Share
mp-seed-price-farmers-helpless-no-regulation
Photograph: (the sootr)

MP में बीज के दाम तय करने की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। इसका फायदा उठाकर बिचौलिए और दुकानदार सर्टिफाइड बीज के नाम पर किसानों को लूट रहे हैं। मध्य प्रदेश में बीजों का सालाना कारोबार 5 हजार करोड़ से भी ज्यादा का है।

पांच पाइंट में समझें मामला

  • MP में बीज के दाम तय करने की कोई व्यवस्था नहीं।
  • सर्टिफाइड बीज के नाम पर दोगुनी कीमत वसूली जा रही।
  • 5 हजार करोड़ के बीज कारोबार पर नियंत्रण नहीं।
  • कृषि विभाग बंद कमरों से सिर्फ निगरानी कर रहा।
  • किसान संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में किसानों को बीज खरीदने में बड़ी लूट का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश में बीज के दाम तय करने की कोई व्यवस्था ही नहीं है। विक्रेता सर्टिफाइड बीज की आड़ में मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। 5 हजार करोड़ के इस कारोबार पर कृषि विभाग का अंकुश नहीं है। किसान बेबस हैं और संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। कृषि विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बंद कमरों से निगरानी की जा रही है। जबकि जमीनी स्तर पर अमल नजर ही नहीं आ रहा।

दाम तय करने का सिस्टम नहीं

मध्यप्रदेश में बीज की कीमतें तय करने की व्यवस्था नहीं है। हर साल कृषि विभाग औपचारिक रूप से सोयाबीन, उड़द, मूंग, चना, गेहूं जैसी फसलों के बीज की औपचारिक घोषणा करता है। सरकार की ये घोषणा हर बार की तरह इस बार भी फाइलों तक ही सिमटी हुई है।

बाजार पर विभाग के इन औपचारिक दामों का कोई नियंत्रण नहीं है। इसी वजह से बीज कंपनियां और विक्रेता अपनी मर्जी से दाम तय कर रहे हैं। सोयाबीन, गेहूं, चना के बीजों पर खुली लूट चल रही है। किसान मजबूरी में महंगा बीज खरीद रहे हैं।

सर्टिफाइड बीज की आड़ में लूट

किसानों के सामने खरीफ सीजन की बोवनी है। ऐसे में उनके सामने बीजों को लेकर दोहरी समस्या खड़ी हो गई है। इनदिनों बाजार में सोयाबीन, उड़द जैसी जिंसों के बीजों के दाम खासे उछल गए हैं। किसानों द्वारा 4500 से 5500 क्विंटल में बेंचे गए सोयाबीन का बीज अब 10 से 12 हजार रुपए प्रति क्विटंल या उससे भी मंहगा है। दूसरी समस्या बीज की प्रमाणिकता की है। मंहगा खरीदने के बाद भी यह तय नहीं है कि उन्हें जो बीज मिला है वह सर्टिफाइड या फाउंडेशन ही है। बीते सालों में मंहगा बीज खरीदकर बोवनी करने के बाद भी खेतों में अंकुरण न होने की समस्या सामने आ चुकी है।

विभाग और बाजार के दामों में भारी अंतर

मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन की प्रमुख फसल सोयाबीन है। कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक इस सीजन में साढ़े 3 लाख हैक्टेयर से ज्यादा रकबे में सोयाबीन की बोवनी हो सकती है। वहीं सोयाबीन की सामान्य वैराइटी के बीज 6000 से 8000 रुपए प्रति क्विटंल हैं।

जबकि सर्टिफाइड और उन्नत किस्म जेएस 2172, जेएस 9305, एम- 85 और अन्य का बीज 10 हजार रुपए प्रति क्विंटल से भी ज्यादा कीमत पर मिल रहा है। बीज के अत्यधिक दामों के कारण छोटे किसानों के सामने सबसे ज्यादा मुश्किल खड़ी हो गई है। वहीं बड़े रकबेदार किसान भी बीज की कीमतों को देखते हुए बोवनी का रकबा कम करने का विचार करने मजबूर नजर आ रहे हैं।

बंद कमरों से ही हो रही निगरानी

कृषि विभाग पुराने ढर्रे से बाहर नहीं निकल पा रहा है। पिछले सालों की तरह इस बार भी बीज की मनमानी कीमतों पर नियंत्रण और निगरानी सिर्फ कागजों तक की सिमटी हुई है। विभाग के पास सर्टिफाइट बीजों का परीक्षण करने के लिए पर्याप्त बीज निरीक्षक ही नहीं है।

वहीं विभाग द्वारा जिला और प्रदेश स्तर पर गठित उड़नदस्ते भी सिर्फ रस्मअदायगी तक सीमित हैं। बीज भंडारों पर बीज की वैराइटी और दामों को भी डिसप्ले नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति का फायदा उठाकर दुकानों पर किसानों के चेहरे देखते कीमतें वसूल की जा रही हैं। वहीं अमानक बीजों को भी ऊंचे दामों पर बेंचा जा रहा है।

किसान संगठनों में नाराजगी

अमानक बीज की बिक्री और सर्टिफाइड के नाम पर बीज की अनियंत्रित कीमत से किसानों में नाराजगी है। प्रदेश के धार, मंदसौर, सीहोर, सागर, जबलपुर में किसान संगठन विरोध भी दर्ज करा चुके हैं। भारतीय किसान संघ का कहना है कि बीज अधिनियम 1966 का पालन नहीं हो रहा है। हरदा में किसानों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है जबकि मंदसौर में चक्काजाम कर चुके हैं। किसान फसलों के एमएसपी रेट की तरह बीजों की कीमत निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं।

अफसरों की मिलीभगत का आरोप

किसानों का आरोप है कि बीज के नाम पर वसूली का खेल कृषि विभाग के अधिकारियों की शह पर चल रहा है। बीज निरीक्षण विक्रेता फर्मों पर सैंपल लेने ही नहीं पहुंच रहे। वहीं जिन बीज निर्माता सोसाइटियों द्वारा बाजार में उपलब्धता कराई जा रही है उनकी भी सीजन से पहले जांच नहीं कराई जाती। 2025 में विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, खरगोन सहित कई जिलों में किसानों को अमानक बीजों का अंकुरण न होने पर दोबारा बोवनी करनी पड़ी थी।

यह खबरें भी पढ़ें...

मोहन कैबिनेट बैठक में किसानों के लिए बड़ा फैसला, कपास पर मंडी शुल्क आधा

गेहूं खरीदी के जख्म भरे नहीं, अब खाद की महंगाई ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

सरिस्का के साये में जमीन का शिकार, अफसरों की मिलीभगत से किसानों के बिक रहे पुश्तैनी खेत

कांग्रेसी बोले गद्दार चले गए, खरा सोना बचा, क्रॉस वोटिंग के लिए करोड़ों का ऑफर

Tags:
  • कृषि विभाग
  • भारतीय किसान संघ
  • सोयाबीन
  • अमानक बीज
  • खरीफ सीजन
  • सर्टिफाइड बीज
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा