5 से 10 हजार तक बढ़ गए मोबाइल फोन के दाम, Samsung से लेकर Xiaomi तक सब महंगे

Anjali Dwivedi | Apr 17, 2026, 13:09 IST
Smartphone Price Hike
भारत में स्मार्टफोन की कीमतें 15% तक बढ़ गई हैं। पार्ट्स की बढ़ती लागत और चिप की कमी से सैमसंग, शाओमी (Xiaomi) और ओप्पो जैसे ब्रांड्स महंगे हो गए हैं। अब ग्राहक नए के बजाय पुराने फोन की ओर रुख कर रहे हैं।

News In Short

  • मार्च 2026 तक 80 से ज्यादा स्मार्टफोन मॉडल्स महंगे हो गए।
  • सैमसंग, ओप्पो और Xiaomi ने 15% से 22% तक दाम बढ़ाए।
  • बिना दाम बढ़ाए कैशबैक और बैंक डिस्काउंट में भारी कटौती की।
  • 15 हजार से कम वाले फोंस का मार्केट शेयर 41% से गिरकर 33% हुआ।
  • चिप की कमी, कमजोर रुपया और मेमोरी पार्ट्स की बढ़ती लागत।
  • मार्च के महीने में मोबाइल की मांग में 30% की कमी आई।

News In Detail

अगर आप इस महीने नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। आपकी जेब पर अब पहले से कहीं ज्यादा बोझ पड़ने वाला है। अप्रैल 2026 में लगभग सभी बड़े मोबाइल ब्रांड्स ने कीमतें बढ़ा दी हैं। ग्लोबल सप्लाई में कमी और बढ़ती लागत ने कंपनियों को मजबूर कर दिया है। अब लोग नए फोन के बजाय पुराने फोन की तरफ रुख कर रहे हैं।



फोन की कीमतों में भारी उछाल

मार्च 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल आया है। भारत में मौजूद लगभग 200 स्मार्टफोन मॉडल्स में से 80 से ज्यादा महंगे हुए हैं। औसतन इन फोन के दाम में 15% तक की वृद्धि देखी गई है। यह तो बस एक शुरुआत है क्योंकि अगली तिमाही में 15% और इजाफा होगा। नए लॉन्च होने वाले फोन तो 30 से 40% तक महंगे हो सकते हैं।



Smartphone Price Hike


सैमसंग और ओप्पो समेत कई ब्रांड्स हुए महंगे

रिटेल एसोसिएशन (AIMRA) के मुताबिक, दिग्गज कंपनियों ने अपने डिस्काउंट काफी कम कर दिए हैं। सैमसंग (samsung mobile) ने अपनी कीमतों में 3% से 22% तक की बड़ी बढ़ोत्तरी की है। ओप्पो और पोको के फोन भी 6% से 18% तक महंगे हो गए हैं। शाओमी (xiaomi phones) ने अपने दाम 3% से 15% तक बढ़ा दिए हैं। रियलमी के फोन भी अब 3% से 12% तक महंगे बिक रहे हैं।



नथिंग फोन के दाम में भी 13 से 14% की बढ़ोत्तरी हुई है। मोटोरोला ने अपने फोन की कीमतें 4% से 9% तक बढ़ा दी हैं। वीवो भी से अपने दाम बढ़ाने की पूरी तैयारी में है। हालांकि, वनप्लस के ग्राहकों के लिए अभी राहत की खबर बनी हुई है। वनप्लस ने फिलहाल अपनी कीमतों में कोई भी बदलाव नहीं किया है।



एप्पल में भी डिस्काउंट में कटौती

Apple ने सीधे तौर पर अपने फोन के दाम नहीं बढ़ाए हैं। लेकिन कंपनी ने मिलने वाले ऑफर्स और कैशबैक में भारी कटौती की है। आईफोन 15 और 16 सीरीज पर मिलने वाला पांच हजार का डिस्काउंट हटा लिया गया। आईफोन 17 पर मिलने वाला कैशबैक छह हजार से घटकर एक हजार रह गया है। इससे बिना कीमत बढ़ाए भी आईफोन खरीदना अब बहुत महंगा हो गया है।



काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 15 हजार रुपए से कम वाले फोन पर बुरा असर पड़ा है। सितंबर 2025 में इस सेगमेंट की हिस्सेदारी 41% थी, जो अब 33% रह गई है। बजट फोन बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा बहुत ही कम होता है। ये कंपनियां पुर्जों की बढ़ी हुई लागत का बोझ नहीं उठा पा रही हैं। इस कारण उन्होंने अपने एंट्री-लेवल फोंस के दाम बढ़ा दिए हैं।



मिड-रेंज फोन सेगमेंट में विस्तार

हैरानी की बात है कि 15 हजार से 30 हजार रुपए वाले सेगमेंट का शेयर बढ़ा है। अब इस सेगमेंट की बाजार में हिस्सेदारी 35% से बढ़कर 45% हो गई है। इसका कारण यह है कि पुराने बजट फोन अब महंगे होकर मिड-रेंज में आ गए हैं। ग्राहक अब मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर मिड-रेंज फोन खरीद रहे हैं। मोबाइल बाजार का यह नया ट्रेंड काफी चिंताजनक नजर आ रहा है।



क्यों महंगे हो रहे हैं मोबाइल फोन?

मोबाइल फोन महंगे होने के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण चिप की मांग में भारी तेजी आई है। चिप की कमी की वजह से मोबाइल के पार्ट्स बहुत महंगे हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात की लागत भी बढ़ गई है। प्लास्टिक और मेमोरी जैसे कच्चे माल के दाम भी आसमान छू रहे हैं।



लॉजिस्टिक और ग्लोबल टेंशन का असर

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण शिपमेंट का खर्च बढ़ गया है। इंश्योरेंस की लागत बढ़ने से भी मोबाइल की कीमतों पर असर पड़ा है। स्मार्टफोन में लगने वाली रैम और स्टोरेज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। कंपनियां अब इन बढ़ी हुई कीमतों को खुद झेलने की स्थिति में नहीं हैं। अंत में इन सब का सीधा बोझ आम ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।



बढ़ती कीमतों का सीधा असर अब मोबाइल फोन की मांग पर दिख रहा है। डीलर्स का कहना है कि मार्च में मोबाइल बिक्री 30% तक गिर गई है। लोग अब नया फोन खरीदने का अपना प्लान आगे टाल रहे हैं। कई ग्राहक अब सेकंड हैंड या रिफर्बिश स्मार्टफोन की तलाश कर रहे हैं। बजट बचाने के लिए पुराने फोन को ठीक कराकर चलाना मजबूरी बन गई है।



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