भारतीय हॉकी टीम के भगवा जर्सी पर उठा विवाद, विपक्ष ने सरकार को घेरा
समझें क्या है पूरा मामला
- भारतीय हॉकी टीमें विश्व कप में केसरिया जर्सी पहनेंगी।
- टूर्नामेंट नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित होगा।
- हॉकी इंडिया ने तकनीकी कारणों से बदलाव बताया।
- फैसला खिलाड़ियों और कोचों के सुझाव पर लिया गया।
- जर्सी बदलाव पर राजनीतिक विवाद भी शुरू हुआ।
क्यों बदला गया जर्सी का रंग
नई जर्सी लॉन्च होने के बादहॉकी इंडिया ने अपने बयान में कहा कि नीली जर्सी नीले रंग की एस्ट्रो टर्फ में घुल-मिल जाती थी। अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैदानों के लिए नीला रंग ही अब मानक सतह रंग बन चुका है। इस वजह से खिलाड़ियों को मैदान पर एक-दूसरे को साफ पहचानने में दिक्कत होती थी।
संस्था के अनुसार कोचों और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे विकल्प सुझाए थे। काफी विचार-विमर्श के बाद केसरिया रंग को चुना गया। हॉकी इंडिया ने कहा कि यह रंग राष्ट्रीय ध्वज का हिस्सा है और साहस, त्याग और गौरव का प्रतीक माना जाता है।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस फैसले के बाद विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में सरकार की आलोचना की। उन्होंने आशंका जताई कि आगे सेना की वर्दी का रंग भी बदला जा सकता है। नेताओं ने भाजपा और आरएसएस पर हर जगह केसरिया रंग को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति के जरिए वर्दी और इतिहास में भी बदलाव किए जा सकते हैं। उनके अनुसार इन मुद्दों पर युवाओं की राय समझना जरूरी है।
अध्यक्ष दिलीप टिर्की का स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा, "जर्सी का रंग बदलने के लिए किसी का दबाव नहीं था। यह सिर्फ खिलाड़ियों और कोचों के अनुरोध पर किया गया।"
टिर्की ने आगे कहा कि इसका कारण पूरी तरह तकनीकी है। उन्होंने अनुरोध किया कि टूर्नामेंट से पहले कोई अनावश्यक विवाद न हो, जिससे टीम पर असर पड़े।
नई जर्सी के डिजाइन में क्या खास है
हॉकी इंडिया ने सोशल मीडिया पर नई जर्सी का अनावरण करते हुए इसे भारत के गौरव से जोड़ा। जर्सी पर मंडाला कला से प्रेरित पैटर्न बनाए गए हैं जो सांस्कृतिक विरासत दिखाते हैं। इसमें गहरा नेवी ब्लू रंग भी है जिसे अशोक चक्र से प्रेरित बताया गया है।
छाती पर बना सुदर्शन चक्र का ग्राफिक ताकत और एकता का प्रतीक है। कंधों और बाजुओं पर तिरंगे की पाइपिंग दी गई है। जर्सी के आगे देवनागरी लिपि में 'इंडिया' लिखा गया है। टीम के पास केसरिया के साथ एक सफेद जर्सी भी होगी।
पूर्व कप्तान ने जताई नाराजगी
पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने इस फैसले पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारतीय टीम की पहचान वर्षों से नीला रंग रही है। उनके अनुसार प्रशंसक टीम को उसी रंग में देखना पसंद करते हैं।
विश्व कप कब से होगा शुरू
एफआईएच हॉकी विश्वकप 2026 आगामी 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जाएगा। भारतीय टीमें इसी टूर्नामेंट में नई केसरिया जर्सी में उतरेंगी। हॉकी इंडिया का कहना है कि नई जर्सी 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को दर्शाती है।
FAQ
- विश्व कप कब और कहां खेला जाएगा?
एफआईएच हॉकी विश्व कप 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जाएगा। यह टूर्नामेंट नीदरलैंड और बेल्जियम में आयोजित होगा। भारतीय टीमें इसमें नई जर्सी में उतरेंगी। - जर्सी का रंग क्यों बदला गया?
हॉकी इंडिया के अनुसार नीली जर्सी नीले एस्ट्रो टर्फ में घुल-मिल जाती थी। इससे खिलाड़ियों को मैदान पर पहचानने में दिक्कत होती थी। इसी तकनीकी वजह से रंग बदला गया।
ये भी पढ़ें...
रिटायरमेंट से एक दिन पहले AE रिश्वत लेते गिरफ्तार, ग्वालियर लोकायुक्त की कार्रवाई
अलवर से निकलकर देश-दुनिया में पहुंची सांझी आर्ट, कलाकर राम सोनी को पीएम मोदी ने भी सराहा
90 हजार अतिथि शिक्षकों को राहत, अब एक साल में मिलेंगी 10 सीएल
नौकरी से निकाले जाने के बाद संविदा कर्मचारी की मौत, 16 साल से दे रहे थे सेवा