पुरुषों से ज्यादा जीने के बाद भी सेहत में पिछड़ रहीं महिलाएं, रिपोर्ट में खुलासा
Manya Jain | Jul 17, 2026, 18:15 IST
indian women life expectancy health span
भारतीय महिलाएं पुरुषों से साढ़े तीन साल ज्यादा जीती हैं, लेकिन उनका लंबा समय बीमारी में कटता है। इसकी सबसे बड़ी वजह एनीमिया है। सेहत सुधारने के लिए बेहतर पोषण और नियमित जांच बेहद जरूरी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- भारतीय महिलाएं पुरुषों के मुकाबले औसतन साढ़े तीन साल ज्यादा जीती हैं।
- लेकिन स्वस्थ जीवनकाल में यह फासला घटकर सिर्फ तीन महीने रह जाता है।
- महिलाएं औसतन 10.7 साल बीमारी में बिताती हैं, जबकि पुरुष 7.8 साल।
- इसकी सबसे बड़ी वजह एनीमिया है, जो 15-49 साल की 57% महिलाओं को है।
- विशेषज्ञ पोषण और नियमित जांच को इसका समाधान बता रहे हैं।
उम्र लंबी, पर सेहत कमजोर
लेकिन स्वस्थ जीवनकाल की बात करें तो यह फासला लगभग खत्म हो जाता है। महिलाओं का औसत स्वस्थ जीवनकाल 58.3 वर्ष है। पुरुषों का स्वस्थ जीवनकाल 58 वर्ष है। यानी महिलाएं स्वस्थ जीवन में पुरुषों से सिर्फ तीन महीने ही आगे हैं।
इसका सीधा मतलब है कि महिलाएं अपनी लंबी उम्र का बड़ा हिस्सा बीमारी और कमजोरी में गुजार देती हैं। आंकड़ों के अनुसार भारतीय महिलाएं करीब 10.7 साल खराब स्वास्थ्य में बिताती हैं। पुरुषों के लिए यह अवधि 7.8 साल है। यानी महिलाओं को पुरुषों से करीब तीन साल ज्यादा बीमारी झेलनी पड़ती है।
एनीमिया बनी बड़ी चुनौती
यानी हर दूसरी युवा और मध्यम उम्र की महिला किसी न किसी स्तर के खून की कमी से जूझ रही है। यह पुरुषों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
थकान से लेकर जच्चा-बच्चा तक असर
यह समस्या अक्सर बचपन से शुरू होकर पूरी जिंदगी साथ चलती है। गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। इससे मां और होने वाले बच्चे, दोनों की सेहत प्रभावित होती है।
पोषण की कमी से बढ़ी समस्या
इसका असर सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं रहता। कमजोर स्वास्थ्य महिलाओं की कामकाज करने की क्षमता को घटाता है। इसका असर मातृ स्वास्थ्य और बच्चों के विकास पर भी पड़ता है। बढ़ती उम्र में हड्डियों की मजबूती पर भी इसका सीधा प्रभाव देखा जाता है।
समाधान क्या है
नियमित स्वास्थ्य जांच कराना भी बेहद जरूरी है। इससे एनीमिया और पोषण की कमी जैसी समस्याओं का समय रहते पता चल जाता है। समय पर इलाज शुरू होने से आगे चलकर बड़ी बीमारियों से बचा जा सकता है।
परिवारों की भूमिका भी इसमें बेहद अहम है। घरों में बेटियों को बचपन से ही अच्छा और पौष्टिक खान-पान देना चाहिए। जब पोषण की नींव बचपन में ही मजबूत होगी, तभी आगे चलकर महिलाओं का स्वस्थ जीवनकाल भी बढ़ सकेगा।
क्यों जरूरी है यह चर्चा
परिवार और समाज दोनों को इस मुद्दे पर साथ आना होगा। सिर्फ महिला की जिम्मेदारी मानकर इसे नहीं छोड़ा जा सकता। घर के खान-पान और स्वास्थ्य जांच से जुड़े फैसलों में महिलाओं को भी बराबर की प्राथमिकता मिलनी चाहिए। तभी लंबी उम्र सच में स्वस्थ और खुशहाल जिंदगी में बदल पाएगी।
FAQ
- भारतीय महिलाओं का स्वस्थ जीवनकाल कितना है?
WHO के मुताबिक भारतीय महिलाओं का औसत स्वस्थ जीवनकाल 58.3 वर्ष है। पुरुषों का स्वस्थ जीवनकाल 58 वर्ष है। यानी दोनों में फासला सिर्फ तीन महीने का है। - महिलाओं में एनीमिया कितना आम है?
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार 15 से 49 साल की 57% भारतीय महिलाएं एनीमिक हैं। इसी उम्र वर्ग के पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 25% है। यह महिलाओं में बीमारी की सबसे बड़ी वजह है। - महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए क्या करें?
हरी सब्जियां, दालें, फल और गुड़ जैसी पौष्टिक चीजें खान-पान में शामिल करें। नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें। बेटियों को बचपन से ही अच्छा पोषण देना भी जरूरी है।
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