किताबों की उम्र में शादी का बंधन! बालिका दिवस पर सामने आई भारत की चिंताजनक तस्वीर

Anshika Singh Chauhan | Oct 11, 2026, 16:50 IST
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस 2026: बाल विवाह रोकने और बेटियों की शिक्षा का संदेश
International Girl Child Day 2026: भारत में आज भी बाल विवाह एक बड़ी समस्या है। यूनिसेफ (UNICEF) के मुताबिक, हर साल करीब 1.2 करोड़ लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है। 11 अक्टूबर को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जानिए भारत में बेटियों की क्या स्थिति है।
On International Girl Child Day, raising awareness against child marriage and promoting every girl's right to education, freedom, and a brighter future.

11 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है बालिका दिवस?

हर साल 11 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने साल 2012 में की थी। इस दिन का मकसद लड़कियों को उनके अधिकारों के बारे में बताना है। साथ ही लोगों को समझाना है कि बेटियों की पढ़ाई, सेहत और सुरक्षा कितनी जरूरी है।



आज देश में लड़कियां पढ़ाई से लेकर खेल और नौकरी तक हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। इसके बावजूद कई बेटियों को बचपन में ही शादी जैसी जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।



बालिका दिवस पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानून होने के बाद भी देश में बाल विवाह पूरी तरह बंद क्यों नहीं हो पा रहे हैं?



हर 3 सेकंड में एक लड़की की शादी का दावा

आज दुनिया बहुत आगे बढ़ चुकी है। लड़कियां पढ़ाई कर रही हैं और बड़े-बड़े पदों पर पहुंच रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर लड़कियों की शादी बचपन में ही कर दी जाती है।



यूनिसेफ (UNICEF) की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में हर साल करीब 1 करोड़ 20 लाख लड़कियों की शादी 18 साल की उम्र से पहले हो जाती है। इस आंकड़े के हिसाब से औसतन हर 3 सेकंड में एक लड़की का बाल विवाह होता है।



यह कोई छोटी समस्या नहीं है। बाल विवाह के कारण लाखों लड़कियां अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं। कई लड़कियों को छोटी उम्र में ही घर और परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।



दुनिया में 64 करोड़ महिलाओं की बचपन में हुई शादी

यूनिसेफ के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 64 करोड़ महिलाएं और लड़कियां ऐसी हैं, जिनकी शादी 18 साल की उम्र से पहले हुई थी। इस संख्या में वे महिलाएं भी शामिल हैं, जो अब बड़ी हो चुकी हैं, मगर उनकी शादी बचपन में हुई थी।



बाल विवाह की समस्या दुनिया के कई देशों में है। खासकर उन इलाकों में ज्यादा परेशानी है, जहां गरीबी है और लड़कियों को पढ़ने के मौके कम मिलते हैं।



आखिर बेटियों की जल्दी शादी क्यों कर देते हैं परिवार?

भारत में बाल विवाह की सबसे बड़ी वजहों में गरीबी और पुरानी सोच शामिल हैं। कई परिवारों की आर्थिक हालत कमजोर होती है। ऐसे में माता-पिता सोचते हैं कि बेटी की जल्दी शादी कर देने से घर की जिम्मेदारी कम हो जाएगी।



कुछ जगहों पर आज भी यह माना जाता है कि बेटियों को ज्यादा पढ़ाने की जरूरत नहीं है। इसलिए उनकी पढ़ाई छुड़ाकर शादी कर दी जाती है। कई गांवों में स्कूल दूर होने या आने-जाने की सुविधा नहीं मिलने से भी लड़कियों की पढ़ाई छूट जाती है। इसके अलावा परिवार और समाज के दबाव में भी बेटियों की कम उम्र में शादी कर दी जाती है।



कम उम्र में शादी से क्या परेशानी होती है?

बाल विवाह का सबसे ज्यादा असर लड़कियों की पढ़ाई पर पड़ता है। शादी के बाद कई लड़कियों को स्कूल छोड़ना पड़ता है। पढ़ाई अधूरी रहने से उनके लिए आगे नौकरी करना और अपने पैरों पर खड़े होना मुश्किल हो जाता है।



कम उम्र में शादी होने से लड़कियों की सेहत पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा छोटी उम्र में घर परिवार की जिम्मेदारी संभालना भी उनके लिए मुश्किल हो सकता है।इस तरह बाल विवाह बेटियों के बचपन के साथ उनके भविष्य को भी प्रभावित करता है।



भारत में बाल विवाह को लेकर क्या है कानून?

भारत में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) लागू है। इस कानून के अनुसार, लड़की की शादी के लिए कम से कम 18 साल और लड़के के लिए 21 साल की उम्र तय की गई है। इससे कम उम्र में शादी होने पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।



बाल विवाह कराने या इसमें मदद करने वालों के खिलाफ भी सजा का प्रावधान है। अगर किसी लड़की की जबरन या कम उम्र में शादी कराई जा रही तो इसकी शिकायत पुलिस या स्थानीय प्रशासन से की जा सकती है। बच्चों की मदद के लिए 1098 हेल्पलाइन नंबर भी है।



बाल विवाह रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?

भारत में बाल विवाह रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें कई स्तरों पर काम कर रही हैं। केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। इसका मकसद लोगों को जागरूक करना और कम उम्र में होने वाली शादियों को रोकना है।



इसके साथ ही लड़कियों की पढ़ाई को बढ़ावा देने और स्कूल छोड़ने की समस्या कम करने पर भी जोर दिया जाता है। कई राज्यों में बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी भी काम करते हैं। हालांकि, इस समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए परिवारों और समाज की सोच बदलना भी जरूरी है।



बाल विवाह 2030 तक खत्म करने का लक्ष्य

संयुक्त राष्ट्र ने साल 2030 तक बाल विवाह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। भारत भी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए काम कर रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान शुरू किया था। इसका मकसद लड़कियों की कम उम्र में शादी रोकना और लोगों को जागरूक करना है।



हालांकि, NFHS-5 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 20 से 24 साल की हर 100 महिलाओं में करीब 23 की शादी 18 साल से पहले हुई थी। ऐसे में 2030 तक बाल विवाह खत्म करना बड़ी चुनौती है।



NFHS-5 (The fifth National Family Health Survey) रिपोर्ट का मुख्य काम भारत में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, पोषण, और जनसांख्यिकी (Demographics) से जुड़े आंकड़े जुटाना और उनका विश्लेषण करना है।



बालिका दिवस पर बेटियों को क्या चाहिए?

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस सिर्फ कार्यक्रम मनाने का दिन नहीं है। यह बेटियों की परेशानियों को समझने का भी मौका है। आज जरूरत इस बात की है कि हर लड़की को पढ़ने का मौका मिले। कोई भी बेटी गरीबी या परिवार के दबाव में अपनी पढ़ाई न छोड़े।



माता-पिता को भी समझना होगा कि बेटी की जल्दी शादी करना किसी समस्या का हल नहीं है। बेटियों को अच्छी शिक्षा, सुरक्षित माहौल और अपने भविष्य के फैसले लेने का मौका मिलना चाहिए।



बालिका दिवस का संदेश है कि बेटियां शादी नहीं, पढ़ाई और सपने पूरे करने की उम्र में हैं।



FAQ:

  1. बालिका दिवस कब मनाया जाता है और इसका उद्देश्य क्या है?
    बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना और उनकी पढ़ाई, सेहत और सुरक्षा को महत्व देना है।
  2. भारत में बाल विवाह को रोकने के लिए क्या कानून हैं?
    भारत में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है, जिसके तहत लड़की की शादी के लिए कम से कम 18 साल और लड़के के लिए 21 साल की उम्र निर्धारित की गई है।
  3. बाल विवाह के कारण क्या हैं और यह लड़कियों पर किस प्रकार का प्रभाव डालता है?
    बाल विवाह के मुख्य कारणों में गरीबी और पुरानी सोच शामिल हैं। इसका प्रभाव लड़कियों की पढ़ाई और सेहत पर पड़ता है, जिससे वे अपने भविष्य के लिए स्वतंत्रता और अवसर खो देती हैं।
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