एमपी में बाल विवाह पर नहीं लग रही लगाम! पांच साल में 47% बढ़े मामले, देवउठनी ग्यारस पर अलर्ट मोड में रहेगा प्रशासन

Aman Vaishnav | Nov 05, 2026, 10:47 IST
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मध्य प्रदेश में 5 साल में 47% बढ़े बाल विवाह के मामले, देवउठनी ग्यारस की सामूहिक शादियों में कड़े पहरे की तैयारी।
मध्य प्रदेश में 5 साल में 47% बढ़े बाल विवाह के मामले, देवउठनी ग्यारस की सामूहिक शादियों में कड़े पहरे की तैयारी।

मध्य प्रदेश में कम उम्र में बच्चों की शादी कराने का चलन थमने के बजाय और तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में प्रदेश के अंदर बाल विवाह के दर्ज मामलों में लगभग 47 प्रतिशत का उछाल आया है। यह आंकड़ा बताता है कि कानून होने के बावजूद कई जगहों पर नाबालिग बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल दर साल का हिसाब देखें तो साल 2020 में पूरे प्रदेश में बाल विवाह के 366 मामले (एमपी में में बाल विवाह के मामले) सामने आए थे। इसके बाद हर साल यह संख्या लगातार बढ़ती ही चली गई। स्थिति यह है कि सिर्फ साल 2025 के 11 महीनों में ही 538 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसका मतलब यह हुआ कि 2020 से लेकर 2025 के बीच प्रदेश भर में कुल 2 हजार 916 बाल विवाह के मामले दर्ज हुए हैं।

20 नवंबर देवउठनी ग्यारस पर कड़ा पहरा

बाल विवाह के इन डराने वाले आंकड़ों को देखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग (Women and Child Development Department) पूरी तरह सतर्क हो गया है। आने वाली 20 नवंबर को देवउठनी ग्यारस है। इस दिन प्रदेशभर में बड़े पैमाने पर सामूहिक विवाह के कार्यक्रम होते हैं। ऐसे आयोजनों में कई बार छुप-छुपाकर नाबालिगों की शादी करा दी जाती है।

इसी खतरे को रोकने के लिए विभाग की सचिव जीवी रश्मि ने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि हमारा लक्ष्य बाल विवाह की घटनाओं को पूरी तरह से शून्य करना है। इसके लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की देखरेख में उड़न दस्ते तैयार किए गए हैं। ये टीमें शादी वाले मैदानों और पंडालों में जाकर उम्र के कागजात और दूल्हा-दुल्हन की जांच करेंगी।

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12 Oct 2026 ,
By Amresh Kushwaha
मध्यप्रदेश के पांच जिलों में बच्चों की सगाई की पुरानी परंपरा आज भी चल रही है। कई जगह बच्चों के जन्म से पहले ही उनके रिश्ते तय कर दिए जाते हैं। नीमच, मंदसौर, राजगढ़, गुना और आगर-मालवा के 666 गांवों में करीब 38 हजार 844 बच्चे इस परंपरा से जुड़े हैं।
मध्यप्रदेश के पांच जिलों में बच्चों की सगाई की पुरानी परंपरा आज भी चल रही है। कई जगह बच्चों के जन्म से पहले ही उनके रिश्ते तय कर दिए जाते हैं। नीमच, मंदसौर, राजगढ़, गुना और आगर-मालवा के 666 गांवों में करीब 38 हजार 844 बच्चे इस परंपरा से जुड़े हैं।

कानून में क्या है उम्र का नियम?

हमारे देश के कानून के मुताबिक...

  • लड़की की उम्र शादी के वक्त 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
  • लड़के की उम्र शादी के समय 21 साल से कम नहीं होनी चाहिए।
इससे कम उम्र में शादी की जाती है तो उसे सीधे तौर पर बाल विवाह माना जाता है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (Prohibition of Child Marriage Act) के तहत ऐसा करने वाले माता-पिता, रिश्तेदार और शादी कराने वाले पंडित या मौलवी के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई होती है।

गांव-गांव में बने सूचना दल

प्रशासन ने इस बार पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है ताकि शादी के मंडप तक बात पहुंचे ही नहीं। इसके लिए मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है।

  • 18 साल से कम उम्र की बेटियों की बनेगी सूची: आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव मिलकर अपने-अपने इलाके की उन किशोरियों की सूची तैयार कर रहे हैं जिनकी उम्र 18 साल से कम है।
  • अफसरों को भेजी जाएगी जानकारी: यह पूरी रिपोर्ट सीधे जिला पुलिस अधीक्षक और जिला पंचायत के सीईओ को सौंपी जाएगी। इससे संदिग्ध परिवारों पर नजर रखी जा सकेगी।
  • गांव और वार्ड में निगरानी दल: हर गांव और वार्ड में एक निगरानी दल बनाया गया है। इसमें स्कूल के शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वसहायता समूह की महिलाएं, शौर्य दल के सदस्य, पंचायत प्रतिनिधि और जागरूक ग्रामीण शामिल हैं। जैसे ही इन्हें किसी बाल विवाह की भनक लगेगी, उड़न दस्ता तुरंत मौके पर पहुंच जाएगा।

24 घंटे खुले रहेंगे कंट्रोल रूम

देवउठनी ग्यारस से एक हफ्ते पहले से ही स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए रैलियां निकालकर लोगों को समझाया जाएगा। वहीं 20 नवंबर के दिन सभी ग्राम पंचायतों और नगर निगम-पालिकाओं में जनप्रतिनिधि बाल विवाह न होने देने की कसम खाएंगे।

कहीं भी किसी बच्चे की शादी की जानकारी मिलती है, तो आप तुरंत इन नंबरों पर फोन कर सकते हैं...

  • महिला हेल्पलाइन: 181
  • चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
  • आपातकालीन पुलिस सेवा: 112
  • स्थानीय कंट्रोल रूम: जिला और ब्लॉक स्तर पर बने 24 घंटे वाले केंद्र
  • ऑनलाइन पोर्टल: बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर भी सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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  • एमपी में में बाल विवाह के मामले
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
  • Women and Child Development Department
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  • बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम
  • Prohibition of Child Marriage Act
  • बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल
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