एमपी में फिर बढ़े बाल विवाह के मामले, NFHS-6 रिपोर्ट ने किया खुलासा
Aman Vaishnav | Sept 13, 2026, 11:00 IST
एमपी में बाल विवाह के मामले
NFHS-6 की नई रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी भोपाल में बाल-विवाह 1% बढ़ गए हैं। भोपाल में कम उम्र में शादी का आंकड़ा 11.3% से बढ़कर अब 12.3% पर पहुंच गया है। जबकि इंदौर में इस मामले में भारी गिरावट आई है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS-6 की ताजा रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इस रिपोर्ट ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और पड़ोसी शहर इंदौर को लेकर एक हैरान करने वाली तस्वीर पेश की है।
भोपाल जैसे बड़े शहर में बाल विवाहपर रोक लगने के बजाय मामले बढ़ते दिखे हैं। पहले NFHS-5 में भोपाल के अंदर बाल-विवाह की दर 11.3% दर्ज की गई थी।
वहीं अब NFHS-6 में यह 1% बढ़कर 12.3% हो गई है। सर्वे टीम जब जमीन पर जानकारी जुटा रही थी, तब उन्हें 20 से 24 वर्ष उम्र वर्ग की ऐसी कई महिलाएं मिलीं जिनका विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले ही कर दिया गया था।
राजधानी भोपाल के ठीक उलट इंदौर शहर से एक राहत भरी खबर मिली है। इंदौर बाल विवाह पर लगाम लगाने में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है।
इंदौर में बाल-विवाह की दर में 11.1% की भारी गिरावट आई है। पिछले सर्वे यानी NFHS-5 में इंदौर का यह आंकड़ा 21.7% था। अब यह घटकर सीधा 10.6% पर आ गया है। इसका मतलब साफ है कि इंदौर में कम उम्र में बेटियों की शादी के चलन में बड़ी कमी आई है।
वहीं अगर ग्वालियर शहर की बात करें तो यहां एक पूरी पीढ़ी का बचपन अंधेरे में धकेल दिया गया। जिस उम्र में लड़कियों को स्कूल जाना था, वहां वे गोद में बच्चे लिए बैठी हैं। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे होता रहा और किसी ने सुध नहीं ली।
दिखावे के आंकड़ों के पीछे मासूमों की चीखें दबकर रह गईं। जहां एक तरफ विभाग अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है। वहीं दूसरी और ये आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2025 तक जिले के 300 गांवों में 354 ऐसी लड़कियां मिलीं, जो नाबालिग होते हुए मां बन चुकी हैं।
जिस उम्र में इन लड़कियों को अपने सपने पूरे करने थे, वहां उनके कानों में बच्चों के रोने की आवाजें गूंज रही हैं। हाथ में किताबों का बस्ता होना था लेकिन उनकी हथेलियों में कच्ची उम्र की जिम्मेदारियां हैं।
जिले के 10 गांवों की जांच में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की मिलीभगत को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
चौंकाने वाली बात ये है कि ये नाबालिग लड़कियां प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंची। उनका नाम टीकाकरण रजिस्टर में भी दर्ज हुआ। फिर भी न तो आंगनबाड़ी वालों की नींद टूटी, न ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने इन्हें रोका। 354 नाबालिग माताओं का यह आंकड़ा ग्वालियर के सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
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भोपाल जैसे बड़े शहर में बाल विवाहपर रोक लगने के बजाय मामले बढ़ते दिखे हैं। पहले NFHS-5 में भोपाल के अंदर बाल-विवाह की दर 11.3% दर्ज की गई थी।
वहीं अब NFHS-6 में यह 1% बढ़कर 12.3% हो गई है। सर्वे टीम जब जमीन पर जानकारी जुटा रही थी, तब उन्हें 20 से 24 वर्ष उम्र वर्ग की ऐसी कई महिलाएं मिलीं जिनका विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले ही कर दिया गया था।
इंदौर ने दिखाई नई राह
इंदौर में बाल-विवाह की दर में 11.1% की भारी गिरावट आई है। पिछले सर्वे यानी NFHS-5 में इंदौर का यह आंकड़ा 21.7% था। अब यह घटकर सीधा 10.6% पर आ गया है। इसका मतलब साफ है कि इंदौर में कम उम्र में बेटियों की शादी के चलन में बड़ी कमी आई है।
ग्वालियर शहर के क्या हाल?
दिखावे के आंकड़ों के पीछे मासूमों की चीखें दबकर रह गईं। जहां एक तरफ विभाग अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है। वहीं दूसरी और ये आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
300 से ज्यादा नाबालिग बनी मां
जिस उम्र में इन लड़कियों को अपने सपने पूरे करने थे, वहां उनके कानों में बच्चों के रोने की आवाजें गूंज रही हैं। हाथ में किताबों का बस्ता होना था लेकिन उनकी हथेलियों में कच्ची उम्र की जिम्मेदारियां हैं।
सिस्टम की गंभीर लापरवाही
चौंकाने वाली बात ये है कि ये नाबालिग लड़कियां प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंची। उनका नाम टीकाकरण रजिस्टर में भी दर्ज हुआ। फिर भी न तो आंगनबाड़ी वालों की नींद टूटी, न ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने इन्हें रोका। 354 नाबालिग माताओं का यह आंकड़ा ग्वालियर के सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
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