भारत की मेजबानी में होगी ब्रिक्स देशों की बड़ी बैठक, ईरान के विदेश मंत्री भी होंगे शामिल
Iran Israel War Update: ईरान और इजराइल के बीच युद्ध अब 75वें दिन में पहुंच गया है। तनाव के बीच भारत कल से ब्रिक्स देशों की बड़ी बैठक करेगा। इसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची खुद दिल्ली आ रहे हैं। इधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करे या फिर तबाही झेले।
अमेरिका इस जंग में अब तक अरबों डॉलर खर्च कर चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने फिर मिसाइल साइट्स एक्टिव कर दी हैं। इससे दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई पर खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 107 डॉलर के पार हैं। पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप का एकमात्र लक्ष्य ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना है। भारत में हो रही यह बैठक शांति के लिए बेहद अहम है।
ईरानी विदेश मंत्री भी आ रहे हैं
भारत की मेजबानी में 14 और 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बड़ी बैठक होने जा रही है। इसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल होंगे। वे यहां भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस बैठक को सितंबर में होने वाले मुख्य ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. ईरान या तो समझौता करे या तबाह होने को तैयार रहे- ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कह दिया है कि ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका ही जीतेगा। चीन जाने से पहले उन्होंने कहा कि उनके पास ईरान से निपटने के लिए सारे रास्ते खुले हैं। ट्रंप जल्द ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी इस मुद्दे पर बात करेंगे। इसी बीच खबर आई है कि अमेरिका इस जंग में अब तक 29 अरब डॉलर (करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये) फूंक चुका है, और वहां के रक्षा मंत्री ने सेना को और ताकतवर बनाने के लिए भारी-भरकम बजट की मांग की है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर बढ़ी हलचल
एक तरफ बातचीत की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के पास अपनी 30 मिसाइल साइट्स को फिर से एक्टिव कर दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, ईरान यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकता है। बता दें कि दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से होकर जाता है। ईरान के पास ऐसी मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर हैं जिन्हें वह कहीं से भी दाग सकता है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है।
3. पाकिस्तान की मैत्री पर बवाल
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। ट्रंप ने तो पाकिस्तान के काम की तारीफ की है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के ही कुछ लोग पाकिस्तान पर शक कर रहे हैं। चर्चा यहाँ तक है कि पाकिस्तान ने ईरान के लड़ाकू विमानों को अपने यहाँ पनाह दी थी। हालांकि, पाकिस्तान लगातार चीन और अमेरिका के संपर्क में है ताकि मामला सुलझ सके।
4. महंगाई की चिंता नहीं, बस ईरान को परमाणु बम से रोकना है
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका में बढ़ रही महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों से उन्हें फर्क पड़ता है, तो उन्होंने दो टूक कहा— "बिल्कुल नहीं।" ट्रंप का कहना है कि उनके लिए अमेरिकी जनता की आर्थिक स्थिति से ज्यादा जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) न बना पाए। उनका मानना है कि हर अमेरिकी इस बात की गंभीरता को समझता है।
5. युद्ध के तनाव से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में आई रुकावट का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 3% से ज्यादा बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड अब 107 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। अगर तनाव ऐसे ही जारी रहा, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और ट्रांसपोर्टेशन और महंगा हो सकता है।
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