ईरान-इजराइल युद्ध: ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराया, कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
Amresh Kushwaha | May 11, 2026, 07:44 IST
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ईरान-इजराइल युद्ध के 73वें दिन तनाव चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 104 डॉलर के पार पहुंच गई हैं। खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा गहराता जा रहा है।
Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल युद्ध के 73वें दिन तनाव फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकरा दिया है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। समुद्र में तेल फैलने से पर्यावरण को खतरा है। नेतन्याहू ने जंग जारी रखने की चेतावनी दी है। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की तगड़ी नाकेबंदी की है। फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत भी तैनात हैं। ईरान लेबनान में भी शांति की मांग कर रहा है। पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए एक लेटर भेजकर युद्ध खत्म करने और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की पेशकश की थी।
वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान 12 साल तक यूरेनियम बनाना बंद करे और अपना सारा स्टॉक उसे सौंप दे। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनातनी जारी है, लेकिन पिछले महीने से चल रहा युद्धविराम अभी टूटा नहीं है।
ट्रंप के कड़े रुख के बाद दुनिया भर के तेल बाजारों में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। निवेशकों को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, तो होर्मुज स्ट्रेट जैसा अहम समुद्री रास्ता बंद हो सकता है, जहाँ से दुनिया का सबसे ज्यादा तेल सप्लाई होता है। सप्लाई रुकने के डर से तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि ईरान के खार्ग आइलैंड के पास समुद्र में करीब 3000 बैरल तेल फैल गया है। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान अपना तेल बेच नहीं पा रहा है। स्टोरेज फुल होने की वजह से शायद वह एक्स्ट्रा तेल समुद्र में बहा रहा है। हालांकि, ईरान ने इन खबरों को गलत बताया है, लेकिन एक्सपर्ट्स को डर है कि यह तेल बहकर सऊदी अरब की तरफ जा रहा है, जिससे समुद्री जीवों को बड़ा खतरा है।
भले ही ऊपर से कड़वाहट दिख रही हो, लेकिन कतर और पाकिस्तान जैसे देश अभी भी अमेरिका और ईरान के बीच बीच-बचाव करने में जुटे हैं। अमेरिका के बड़े अधिकारी लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में हैं ताकि मौजूदा युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते में बदला जा सके। सबसे बड़ी अड़चन ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े नियम बने हुए हैं।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ जंग अभी खत्म नहीं हुई है। उनका कहना है कि जब तक ईरान के परमाणु ठिकानों और उसके सहयोगी संगठनों को पूरी तरह खत्म नहीं कर दिया जाता, तब तक वह चैन से नहीं बैठेंगे। जब उनसे परमाणु केंद्रों पर हमले की रणनीति पूछी गई, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब टाल दिया।
अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए समुद्र में तगड़ी नाकेबंदी कर रखी है। अब तक 61 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला जा चुका है। ईरान के बंदरगाहों की तरफ जाने वाले रास्तों पर अमेरिका ने अपने 20 से ज्यादा खतरनाक युद्धपोत तैनात कर रखे हैं ताकि ईरान का व्यापार पूरी तरह ठप हो जाए।
ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर फ्रांस और ब्रिटेन के युद्धपोत अमेरिका की मदद के लिए समुद्र में उतरे, तो वह इसका करारा जवाब देगा। दरअसल, फ्रांस ने अपना परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर 'चार्ल्स डी गॉल' इस इलाके में भेजने का फैसला किया है। फ्रांस और ब्रिटेन का कहना है कि वे सिर्फ समुद्री रास्तों की सुरक्षा कर रहे हैं, लेकिन ईरान इसे अपने खिलाफ घेराबंदी मान रहा है।
ईरान ने अपने प्रस्ताव में सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि लेबनान के लिए भी शांति मांगी है। ईरान चाहता है कि पूरे इलाके में एक साथ युद्ध खत्म हो। यह मांग इसलिए अहम है क्योंकि अप्रैल में युद्धविराम के बावजूद इजराइल लगातार लेबनान में बमबारी कर रहा है और ईरान चाहता है कि लेबनान में भी स्थायी शांति आए।
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ट्रंप ने ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराया
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कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग
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