IRIS Dena विवाद पर विराम, ईरान ने कहा- भारत ने निभाई दोस्ती
नई दिल्ली। हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena के डूबने की घटना ने कुछ दिनों तक भारत की भूमिका को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे। लेकिन अब इन सवालों पर लगभग विराम लगता दिख रहा है। भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने साफ कहा है कि इस पूरे संकट के दौरान भारत ने ईरान की हर संभव मदद की। उनका यह बयान India Today Conclave 2026 में आया, जिसके बाद इस मामले को लेकर चल रही बहस काफी हद तक शांत हो गई।
5 मार्च को ईरान का युद्धपोत IRIS Dena एक नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद भारत से वापस लौट रहा था। बताया गया कि वापसी के दौरान उस पर टॉरपीडो से हमला किया गया, जिससे जहाज डूब गया। इस हमले में जहाज पर सवार 100 से ज्यादा नाविकों की मौत हो गई। यह घटना श्रीलंका के पास हिंद महासागर में हुई, जिसके बाद भारत में यह सवाल उठने लगे कि क्या भारत की कोई जिम्मेदारी बनती है, क्योंकि यह जहाज भारत से ही अभ्यास करके लौट रहा था।
ईरान के राजदूत ने क्या कहा
ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने कहा कि भारत सरकार ने इस मुश्किल समय में ईरान की काफी मदद की। उनके अनुसार भारत ने ईरान के अनुरोधों को स्वीकार किया। कई तरह की मानवीय सहायता दी। कुछ देशों ने सहयोग नहीं किया, लेकिन भारत ने पूरा साथ दिया उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इस हमले का जवाब जरूर देगा।
दूसरा ईरानी जहाज भारत में शरण लिए रहा
जब यह हमला हुआ, उसी समय ईरान का एक और युद्धपोत IRIS Lavan भारत में मौजूद था। भारत ने इस जहाज को Cochin Port में शरण दी। जहाज के 183 सदस्यों में से 50 से ज्यादा सदस्य अभी भी जहाज पर मौजूद हैं। बाकी को भारत से वापस भेज दिया गया है
अमेरिका-इज़रायल हमलों के बाद बढ़ा तनाव
28 फरवरी को United States और Israel ने Iran पर कई हवाई हमले किए थे। इसके बाद से क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए। हालांकि ईरानी जहाज इन हमलों से कई हफ्ते पहले ही अपने मिशन पर निकल चुके थे। इसी बीच, श्रीलंका के सांसद Namal Rajapaksa ने कहा कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री नियमों पर सवाल उठाती है। उनके मुताबिक हिंद महासागर में बड़ी शक्तियों का व्यवहार चिंता का विषय है। समुद्री कानूनों और नैतिक नियमों का पालन होना चाहिए। इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है
भारत में बहस क्यों शुरू हुई
घटना के बाद भारत में रक्षा विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों के बीच चर्चा शुरू हो गई थी।
कुछ लोगों का कहना था कि जहाज भारत के निमंत्रण पर अभ्यास में आया था, इसलिए भारत की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। लेकिन कई विशेषज्ञों ने कहा कि यह हमला भारत के समुद्री क्षेत्र के बाहर हुआ, इसलिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। पूर्व विदेश सचिव Kanwal Sibal ने कहा कि भारत की जिम्मेदारी केवल नैतिक और मानवीय स्तर की है। वहीं रक्षा विश्लेषक Sandeep Unnithan का कहना है कि इस घटना में भारत की कोई गलती नहीं है, क्योंकि ईरानी जहाज ने भारत से सुरक्षा या एस्कॉर्ट नहीं मांगा था।
IRIS Dena और भारत-ईरान नौसैनिक संबंध
1. IRIS Dena क्या है
IRIS Dena ईरान की नौसेना का एक आधुनिक युद्धपोत है। इसे 2021 में ईरानी नौसेना में शामिल किया गया था।
यह जहाज लंबी दूरी की समुद्री यात्राएं और सुरक्षा मिशन करने में सक्षम माना जाता है।
2. भारत-ईरान नौसैनिक सहयोग
भारत और ईरान के बीच लंबे समय से समुद्री सहयोग रहा है।
मुख्य कारण:
- हिंद महासागर में व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा
- ऊर्जा सप्लाई की स्थिरता
- समुद्री डकैती रोकना
ईरानी जहाज समय-समय पर भारत के बंदरगाहों पर आते रहे हैं।
3. हिंद महासागर की रणनीतिक अहमियत
हिंद महासागर (Indian Ocean) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।
- दुनिया के लगभग 80% तेल व्यापार का रास्ता यहीं से गुजरता है
- एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ता है
इसलिए यहां होने वाली किसी भी सैन्य घटना का वैश्विक असर पड़ सकता है।
संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभा रहा भारत
IRIS Dena के डूबने की घटना ने हिंद महासागर में बढ़ते तनाव को उजागर किया। हालांकि इस घटना के बाद भारत में कई सवाल उठे, लेकिन ईरान के राजदूत के बयान से यह साफ हो गया है कि भारत ने अपनी तरफ से पूरी मदद की (India Iran relations)। भारत ने मानवीय आधार पर सहायता दी और दूसरे ईरानी जहाज को भी शरण दी। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत क्षेत्र में संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
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