Iran Israel War Update: अमेरिका की सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट, ईरान ने इजराइल पर दागी मिसाइलें
Sourabh Bhatnagar | Mar 13, 2026, 08:55 IST
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ईरान-इजरायल युद्ध 13 मार्च 2026 में अपने 14वें दिन में पहुंच चुका है। इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से लगातार हमले हो रहे हैं। आइए नजर डालते हैं जरूरी अपडेट्स पर.... ये भी जानते हैं कि 12 और 13 मार्च को इस युद्ध में क्या- क्या हुआ...
Iran Israel War: अमेरिका ने दुनिया के देशों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दे दी है। यह कदम ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई पर हो रहे असर को देखते हुए उठाया गया है।
इस छूट के तहत, देश अब कुछ मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे, ताकि तेल की सप्लाई बढ़े और कीमतें काबू में रह सकें। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
इसके अलावा, इजराइल की सेना ने ईरान से आई मिसाइलों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। वहीं, ईरान के नए लीडर मुजतबा खामेनेई की हालत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कहा जा रहा है कि वह गंभीर रूप से घायल हैं।
इन सबके बीच, लेबनान में अब तक 687 लोग मारे जा चुके हैं और यूएनएचआरसी के मुताबिक, 32 लाख लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं।
अमेरिका ने दुनिया के देशों को 30 दिन के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से दुनिया में तेल की सप्लाई पर असर पड़ रहा है।
इस छूट के तहत, देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें कंट्रोल में रखने में मदद मिलेगी।
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युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। इसके चलते ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता और बढ़ गई है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट केवल उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका उद्देश्य बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाना है।
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इजराइल की सेना ने कहा है कि ईरान की तरफ से कुछ मिसाइलें दागी गई हैं। सेना के मुताबिक, इन मिसाइलों को रोकने के लिए उनका डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है।
इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा है। लोगों से कहा गया है कि वे सुरक्षा से जुड़े सभी निर्देशों का पालन करें।
सेना ने लोगों से यह भी सलाह दी है कि वे सुरक्षित जगहों या शेल्टर में रहें और जब तक आधिकारिक तौर पर खतरे की स्थिति खत्म होने का ऐलान न हो, तब तक बाहर न निकलें।
मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को लेकर बड़ा दावा किया जा रहा है कि वह कोमा में हैं। उन्हें 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका की एयर स्ट्राइक में गंभीर चोटें आई थीं।
ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में मुजतबा को इतनी गंभीर चोटें आईं कि उनका एक पैर काटना पड़ा और उनका पेट और लिवर भी काफी प्रभावित हुआ। इसके कारण वह कोमा में हैं।
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मुजतबा ने अपने पिता अली खामेनेई, जो कि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर थे, की मौत के बाद 9 मार्च को सुप्रीम लीडर का पद संभाला था। हालांकि, उनकी हालत पर अभी तक ईरान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पजशकियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने मिडल-ईस्ट के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि वह क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता महसूस कर रहे हैं।
इजराइली सेना ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को लेकर सवाल उठाया है। IDF ने X पर एक पोस्ट में पूछा, "मुजतबा कहां हैं? वह लोगों से बात कर रहे हैं, लेकिन उनका चेहरा क्यों नहीं दिख रहा? वह क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं?"
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इजराइली सेना ने आगे कहा कि ईरान के लोग अपने नेता से यह जवाब क्यों नहीं मांगते कि देश को इस हालत में क्यों पहुंचाया गया। यह बयान उस वक्त आया जब मुजतबा खामेनेई का पहला संदेश ईरानी सरकारी मीडिया पर न्यूज एंकर ने पढ़कर सुनाया था और वह खुद कैमरे पर दिखाई नहीं दिए।
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का जंग के बीच पहला बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि खाड़ी देशों पर हमले नहीं रुकेंगे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद ही रखा जाएगा। इस बयान के बाद से तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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ईरान ने अमेरिका और इजरायल को एक बड़ी धमकी दी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल और गैस संयंत्रों को युद्ध में निशाना बनाया गया, तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व की ऊर्जा संरचनाओं को तबाह कर देगा।
ईरान के सरकारी मीडिया ने सैन्य सेंट्रल ऑपरेशन कमांड के प्रवक्ता खतम अल-अनबिया का बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि अगर उनके ऊर्जा संयंत्रों और बंदरगाहों पर कोई भी सीमित हमला हुआ, तो ईरान इसका जवाब बेहद जोरदार तरीके से देगा।
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लेबनान में इजरायल के हमलों के बीच मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। 2 मार्च से शुरू हुए हमलों में अब तक कम से कम 687 लोगों की जान जा चुकी है। सैन्य कार्रवाई लगातार जारी रहने की वजह से हालात बहुत गंभीर हो गए हैं।
लेबनान के सूचना मंत्री Paul Morcos ने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोग आम नागरिक हैं। मृतकों में 98 बच्चे और 52 महिलाएं भी शामिल हैं, जो हमलों की भयावहता को और साफ दिखाते हैं।
लगातार हो रही बमबारी और सैन्य कार्रवाई की वजह से कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। अस्पतालों पर भी भारी दबाव है और राहत सेवाओं को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हमले इसी तरह जारी रहे, तो लेबनान में मानवीय संकट और भी बढ़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो रहे हैं और जरूरी सुविधाओं की कमी बढ़ती जा रही है।
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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है। यूएनएचआरसी (UNHCR) के मुताबिक, युद्ध के चलते अब तक करीब 3.2 मिलियन (32 लाख) लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा लोग तेहरान और दूसरे बड़े शहरों से पलायन कर रहे हैं। भारी हमलों और सुरक्षा के खतरे के कारण लोग देश के उत्तरी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं, जहां उन्हें थोड़ा सुरक्षित महसूस हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी का कहना है कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई के चलते शहरों में रहना बहुत मुश्किल हो गया है। हजारों परिवार अपने घर छोड़कर अस्थायी शरण स्थलों, गांवों या रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहे हैं।
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इस छूट के तहत, देश अब कुछ मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे, ताकि तेल की सप्लाई बढ़े और कीमतें काबू में रह सकें। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।
इसके अलावा, इजराइल की सेना ने ईरान से आई मिसाइलों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। वहीं, ईरान के नए लीडर मुजतबा खामेनेई की हालत को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कहा जा रहा है कि वह गंभीर रूप से घायल हैं।
इन सबके बीच, लेबनान में अब तक 687 लोग मारे जा चुके हैं और यूएनएचआरसी के मुताबिक, 32 लाख लोग अपना घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं।
इजराइल ईरान युद्ध: 12 और 13 मार्च 2026 के बड़े अपडेट्स
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी
इस छूट के तहत, देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे तेल की सप्लाई बढ़ेगी और कीमतें कंट्रोल में रखने में मदद मिलेगी।
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युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। इसके चलते ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता और बढ़ गई है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट केवल उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका उद्देश्य बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाना है।
इजराइल का अलर्ट: ईरान ने दागी मिसाइलें, लोग रहें सावधान
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इजराइल की सेना ने कहा है कि ईरान की तरफ से कुछ मिसाइलें दागी गई हैं। सेना के मुताबिक, इन मिसाइलों को रोकने के लिए उनका डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है।
इजराइल की होम फ्रंट कमांड ने खतरे वाले इलाकों में रहने वाले लोगों के मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा है। लोगों से कहा गया है कि वे सुरक्षा से जुड़े सभी निर्देशों का पालन करें।
सेना ने लोगों से यह भी सलाह दी है कि वे सुरक्षित जगहों या शेल्टर में रहें और जब तक आधिकारिक तौर पर खतरे की स्थिति खत्म होने का ऐलान न हो, तब तक बाहर न निकलें।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई कोमा में: दावा
ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में मुजतबा को इतनी गंभीर चोटें आईं कि उनका एक पैर काटना पड़ा और उनका पेट और लिवर भी काफी प्रभावित हुआ। इसके कारण वह कोमा में हैं।
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मुजतबा ने अपने पिता अली खामेनेई, जो कि ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर थे, की मौत के बाद 9 मार्च को सुप्रीम लीडर का पद संभाला था। हालांकि, उनकी हालत पर अभी तक ईरान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पजशकियान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने मिडल-ईस्ट के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि वह क्षेत्र में बढ़ते तनाव, नागरिकों की मौत और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता महसूस कर रहे हैं।
इजराइली सेना ने पूछा: कहां हैं मुजतबा खामेनेई?
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इजराइली सेना ने आगे कहा कि ईरान के लोग अपने नेता से यह जवाब क्यों नहीं मांगते कि देश को इस हालत में क्यों पहुंचाया गया। यह बयान उस वक्त आया जब मुजतबा खामेनेई का पहला संदेश ईरानी सरकारी मीडिया पर न्यूज एंकर ने पढ़कर सुनाया था और वह खुद कैमरे पर दिखाई नहीं दिए।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा का पहला बयान
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ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई का जंग के बीच पहला बयान सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि खाड़ी देशों पर हमले नहीं रुकेंगे और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद ही रखा जाएगा। इस बयान के बाद से तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान की अमेरिका और इजरायल को धमकी
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ईरान ने अमेरिका और इजरायल को एक बड़ी धमकी दी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अगर उसके तेल और गैस संयंत्रों को युद्ध में निशाना बनाया गया, तो ईरान पूरे मध्य-पूर्व की ऊर्जा संरचनाओं को तबाह कर देगा।
ईरान के सरकारी मीडिया ने सैन्य सेंट्रल ऑपरेशन कमांड के प्रवक्ता खतम अल-अनबिया का बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि अगर उनके ऊर्जा संयंत्रों और बंदरगाहों पर कोई भी सीमित हमला हुआ, तो ईरान इसका जवाब बेहद जोरदार तरीके से देगा।
लेबनान में अब तक 687 लोगों की मौत
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लेबनान में इजरायल के हमलों के बीच मौतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। 2 मार्च से शुरू हुए हमलों में अब तक कम से कम 687 लोगों की जान जा चुकी है। सैन्य कार्रवाई लगातार जारी रहने की वजह से हालात बहुत गंभीर हो गए हैं।
लेबनान के सूचना मंत्री Paul Morcos ने बताया कि इनमें से ज्यादातर लोग आम नागरिक हैं। मृतकों में 98 बच्चे और 52 महिलाएं भी शामिल हैं, जो हमलों की भयावहता को और साफ दिखाते हैं।
लगातार हो रही बमबारी और सैन्य कार्रवाई की वजह से कई इलाकों में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। अस्पतालों पर भी भारी दबाव है और राहत सेवाओं को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हमले इसी तरह जारी रहे, तो लेबनान में मानवीय संकट और भी बढ़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हो रहे हैं और जरूरी सुविधाओं की कमी बढ़ती जा रही है।
लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर: यूएनएचआरसी
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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच ईरान में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है। यूएनएचआरसी (UNHCR) के मुताबिक, युद्ध के चलते अब तक करीब 3.2 मिलियन (32 लाख) लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा लोग तेहरान और दूसरे बड़े शहरों से पलायन कर रहे हैं। भारी हमलों और सुरक्षा के खतरे के कारण लोग देश के उत्तरी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं, जहां उन्हें थोड़ा सुरक्षित महसूस हो रहा है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसी का कहना है कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाई के चलते शहरों में रहना बहुत मुश्किल हो गया है। हजारों परिवार अपने घर छोड़कर अस्थायी शरण स्थलों, गांवों या रिश्तेदारों के घरों में शरण ले रहे हैं।
ये खबरें भी पढ़ें... ईरान-इजरायल संघर्ष | इजराइल ने दी लेबनान को चेतावनी
ईरान-इजराइल जंग का 13वां दिन: दोनों पक्षों के बीच हमले जारी, भारतीय शेयर बाजार में आई भारी गिरावट
ईरान-इजराइल जंग का 12वां दिन: टेक कंपनियां, तेल सप्लाई और पानी पर खतरा, भारत क्यों चिंतित?
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