शेयर बाजार में भूचाल, 5 लाख करोड़ रुपए डूबे, सेंसेक्स 750 अंक गिरा
समझें क्या है पूरा मामला
- बुधवार को शेयर बाजार खुलते ही गिरावट शुरू हुई।
- सेंसेक्स करीब 750 अंक टूटकर 76135 पर पहुंचा।
- निफ्टी ने 23786 का निचला स्तर छुआ।
- निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ रुपए घटे।
- ईरान-अमेरिका तनाव से बाजार पर दबाव बढ़ा।
बुधवार को शेयर बाजार खुलते ही तेजी से गिर गया। सेंसेक्स करीब 750 अंक टूटकर 76 हजार 135 पर पहुंच गया। निफ्टी ने 23 हजार 786 का दिन का निचला स्तर छुआ। निवेशकों के करीब 5 लाख करोड़ रुपए मिनटों में साफ हो गए। इस गिरावट के पीछे ईरान-अमेरिका तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें बड़ी वजह मानी जा रही हैं।
पिछले कई दिनों से घरेलू शेयर बाजार की चाल कमजोर बनी हुई थी। बुधवार को यह गिरावट और तेज हो गई। बाजार खुलते ही बिकवाली शुरू हो गई। दोपहर तक भी हालात में बहुत सुधार नहीं दिखा।
कहां-कहां हुई गिरावट
इंडिया विक्स तीन प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 11.86 पर पहुंच गया। यह बाजार में उतार-चढ़ाव नापने वाला इंडिकेटर है। निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा टूटने वाला सेक्टर रहा। इसमें दो प्रतिशत से अधिक गिरावट आई।
निफ्टी ऑटो और रियल्टी करीब दो प्रतिशत गिरे। निफ्टी एफएमसीजी (FMCG – Fast Moving Consumer Goods) और फाइनेंशियल सर्विसेज सहित कई और सेक्टर भी एक प्रतिशत टूटे।
किन शेयरों को नुकसान हुआ
इंफोसिस के शेयर करीब तीन प्रतिशत टूटे। यह सेंसेक्स का टॉप लूजर रहा। टीसीएस, एचसीएल टेक, इंडिगो और एमएंडएम करीब दो प्रतिशत गिरे।
एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी (NTPC – National Thermal Power Corporation), टेक महिंद्रा, एशियन पेंट्स, बजाज फाइनेंस, बीईएल (BEL – Bharat Electronics Limited), आईटीसी और अल्ट्राटेक एक प्रतिशत से ज्यादा गिरे। दोपहर के कारोबार में पावर ग्रिड, अडानी पोर्ट्स और सनफार्मा जैसे कुछ शेयरों में हल्की बढ़त भी देखी गई।
गिरावट के 5 बड़े कारण
पहला कारण: ईरान-अमेरिका तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच रातों-रात नए हमले हुए। इससे मिडिल ईस्ट संकट खत्म होने की उम्मीदों को झटका लगा। अमेरिका ने ईरान में एयरस्ट्राइक की, जिसका ईरान ने जवाब दिया। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि इससे होर्मुज का रास्ता और बंद हो सकता है। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमले का भी दावा किया।
दूसरा कारण: तेल 96 डॉलर पार
मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। WTI क्रूड करीब 91 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
तीसरा कारण: बॉन्ड यील्ड में उछाल
तेल महंगा होने से महंगाई और सरकारी कर्ज की चिंता बढ़ गई। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 4.81% के करीब पहुंच गई। यह तीन साल का उच्चतम स्तर है। जापान की यील्ड 3% के साथ 30 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची। ऑस्ट्रेलिया की यील्ड 5.198% के साथ 15 साल के रिकॉर्ड पर पहुंच गई।
चौथा कारण: दुनिया भर के बाजार गिरे
वैश्विक बाजारों में नकारात्मक माहौल का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा। अमेरिका में एसएंडपी 500 0.7% गिरा। नैस्डैक कंपोजिट एक प्रतिशत टूटा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब चार प्रतिशत और जापान का निक्केई तीन प्रतिशत गिरा। ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और चीन के बाजार भी करीब एक प्रतिशत टूटे।
पांचवां कारण: कमजोर हुआ रुपया
तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के असर से रुपया दो पैसे कमजोर होकर 94.97 प्रति डॉलर पर खुला। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे रुपए की चाल क्रूड, डॉलर और एफआईआई (FII – Foreign Institutional Investors) के निवेश पर निर्भर करेगी।
आगे क्या रहेगा असर
बाजार में यह उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। इसकी वजह वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में फैसले लेने से बचें।
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