AI डीपफेक पर भारत सरकार सख्त, अब 2 घंटे में हटेगा गंदा कंटेंट
पिछले कुछ सालों में AI डीपफेक के मामले तेजी से बढ़े हैं। फर्जी और अश्लील तस्वीरों का जाल अब बहुत खतरनाक हो गया है। ठग आपकी फोटो को मॉर्फ करके नकली वीडियो बना लेते हैं। खासकर महिलाओं को इन टूल्स से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
अपराधी अब ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन ट्रोलिंग का सहारा ले रहे हैं। कुछ ही मिनटों में आपकी फोटो से अश्लील कंटेंट बन सकता है। इसे देखते हुए सरकार ने 2026 में IT नियम सख्त किए हैं। कंपनियों को अब डीपफेक कंटेंट पर तुरंत एक्शन लेना ही होगा। अगर आपके साथ ऐसा कुछ हो, तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
सरकार ने क्यों सख्त किए आईटी नियम?
भारत सरकार इस खतरे को अच्छे से समझती है। इसीलिए 2026 में आईटी नियमों में बड़े बदलाव किए गए। सरकार चाहती है कि कंपनियां अपनी जिम्मेदारी समझें। अब केवल शिकायत करना काफी नहीं होगा। कंपनियों को तुरंत एक्शन लेना पड़ेगा।
पुराने नियमों में कंटेंट हटाने के लिए बहुत समय मिलता था। तब तक वह फोटो या वीडियो वायरल हो जाता था। नए नियमों के बाद अब खेल बदल गया है। अब समय की सीमा को बहुत कम कर दिया गया है।
2 घंटे के भीतर कंटेंट हटाना जरूरी
नए नियमों के अनुसार अब कंपनियों को बहुत तेज होना होगा। अगर कोई अश्लील डीपफेक की शिकायत करता है तो क्या होगा? कंपनी को 2 घंटे के अंदर उसे हटाना पड़ेगा। यह नियम गैर-सहमति वाले कंटेंट के लिए है।
अगर आदेश कोर्ट या सरकार से आता है तो क्या होगा? तब कंपनियों को केवल 3 घंटे का समय मिलेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक अब 75 प्रतिशत कंटेंट जल्दी हट रहा है। पहले इसी काम में कई दिन लग जाते थे।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ी जिम्मेदारी
अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे ऐप्स को टीम बढ़ानी होगी। उन्हें एआई डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल करना होगा। यह टूल्स नकली कंटेंट को खुद पहचान लेंगे। कंपनियों को इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी बनानी पड़ी है।
अगर कंपनी लापरवाही करती है तो सरकार चुप नहीं बैठेगी। उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का कहना है कि—पहले कंटेंट हटाओ, फिर जांच करो। क्योंकि वायरल होने के बाद नुकसान की भरपाई मुश्किल है।
एआई कंटेंट पर लेबल लगाना हुआ अनिवार्य
सरकार ने एक और बड़ा नियम बनाया है। अब एआई से बनी हर चीज पर लेबल लगेगा। इससे आम लोग धोखा नहीं खाएंगे। उन्हें पता चलेगा कि वीडियो असली है या नकली। इसे सिंथेटिक मीडिया मार्किंग भी कहा जाता है।
यह पारदर्शिता के लिए बहुत जरूरी कदम है। कई बार लोग नकली वीडियो को सच मान लेते हैं। लेबल लगने से लोग जागरूक रहेंगे। कंपनियों को अपने सिस्टम में इसे जोड़ना ही होगा।
क्या कहते हैं आईटी अधिकारी?
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुराने नियम अब काम के नहीं थे। तकनीक बदल रही है, तो नियम भी बदलने चाहिए। नए नियमों से अपराधियों में डर पैदा होगा।
हालांकि, अधिकारियों ने एक बात और मानी है। केवल मशीनों पर भरोसा करना जोखिम भरा है। कभी-कभी असली फोटो भी गलती से हट सकती है। इसलिए इंसान भी इन शिकायतों की समीक्षा करेंगे।
दुनिया भर में बढ़ रही है ऐसी सख्ती
भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो यह कर रहा है। ब्रिटेन में भी सरकार बहुत सख्त हो गई है। वहां टेक कंपनियों को भारी जुर्माना देना पड़ सकता है। नियम न मानने पर ऐप ब्लॉक भी हो सकते हैं।
रिसर्च बताती है कि इंटरनेट पर हजारों एआई मॉडल मौजूद हैं। कोई भी आम इंसान इन्हें इस्तेमाल कर सकता है। इसलिए सरकारें अब और भी ज्यादा चौकन्नी हो गई हैं। भविष्य में मॉनिटरिंग और ज्यादा बढ़ सकती है।
अभिव्यक्ति की आजादी या सुरक्षा
कुछ लोग इन सख्त नियमों का विरोध भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे फ्री स्पीच पर असर पड़ेगा। गलत तरीके से कंटेंट हटाना भी एक समस्या बन सकती है। लेकिन सुरक्षा सर्वोपरि है।
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह नियम जरूरी हैं। डीपफेक किसी की जिंदगी बर्बाद कर सकता है। मानसिक स्थिति पर इसका गहरा असर पड़ता है। इसलिए सख्त कदम उठाना समय की मांग है।
ऐसे करें शिकायत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें (सबसे तेज तरीका)
नए आईटी नियमों के अनुसार, कंपनियों को अश्लील कंटेंट की शिकायत पर 2 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होती है।
- प्रोसेस: जिस फोटो या वीडियो से समस्या है, उसके पास बने 'तीन डॉट्स' या 'मदद' (Help) विकल्प पर जाएं।
- कैटेगरी चुनें: रिपोर्ट करते समय 'गैर-सहमति वाली इंटीमेट इमेज' (Non-consensual intimate image) या 'अश्लीलता' (Nudity) विकल्प चुनें।
- फायदा: फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (X) जैसी कंपनियों के पास अब इसके लिए विशेष 'इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' है।
2. सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत (Cyber Crime Portal)
अगर आप कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी चाहते हैं, तो केंद्र सरकार के पोर्टल का उपयोग करें:
- www.cybercrime.gov.in पर जाएं।
- 'Report Crime Women/Child' सेक्शन में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करें।
- शिकायत के साथ उस यूआरएल (URL) और स्क्रीनशॉट को जरूर अपलोड करें जहां वह कंटेंट मौजूद है।
3. व्हाट्सएप पर शिकायत
अगर डीपफेक कंटेंट व्हाट्सएप पर फैलाया जा रहा है:
- उस नंबर या ग्रुप को 'Report' करें।
- आप Grievance Officer को ईमेल भी कर सकते हैं (इसका विवरण व्हाट्सएप की आधिकारिक वेबसाइट पर 'Contact Us' में मिल जाएगा)।
4. स्थानीय साइबर सेल (Cyber Cell)
आप अपने शहर के नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर लिखित शिकायत दे सकते हैं। पुलिस आईटी एक्ट की धारा 66E (निजता का उल्लंघन) और धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन) के तहत मामला दर्ज करती है।
ये जरूर करें
- सबूत न मिटाएं: शिकायत दर्ज करने से पहले उस प्रोफाइल या पोस्ट का स्क्रीनशॉट और लिंक जरूर संभाल कर रखें।
- लेबल चेक करें: अगर वीडियो एआई (AI) से बना है, तो देखें कि उस पर 'एआई जनरेटेड' का लेबल है या नहीं। बिना लेबल वाला एआई कंटेंट नियमों का बड़ा उल्लंघन है।
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