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News in Short
- यह मामला इंदौर में एआई डीपफेक ठगी का है।
- ठगों ने बेटे पर हमले का फर्जी वीडियो बनाया।
- माता-पिता को किडनैपिंग का डर दिखाया गया।
- डर के कारण 1 लाख रुपए ट्रांसफर कराए गए।
- बाद में पता चला कि बच्चा सुरक्षित था।
News in Detail
इंदौर में साइबर ठगी का पहली बार एआई डीपफेक वाला नया तरीका सामने आया है। अब ठग एआई डीपफेक वीडियो से लोगों को फंसा रहे हैं। इस बार निशाना 10वीं के स्कूली छात्र का परिवार बना।
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इंदौर AI डीपफेक ठगी केस क्या है और कैसे हुआ
यह मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है। परिवार का बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ता है। वह शाम को कोचिंग के लिए निकला था। रात तक घर नहीं लौटा तो परिवार चिंतित हुआ। परिवार ने सोशल मीडिया पर जानकारी शेयर की और साथ ही पुलिस को सूचित किया। इसी दौरान परिवार को वीडियो कॉल आया। इसमें कॉल करने वालों ने अपना चेहरा छिपाया था। वीडियो में उनका बेटा और बदमाश उसे चाकू मारते दिख रहे थे। धमकी दी गई कि बच्चे को हमने अपहरण किया है और यदि रुपए नहीं दोगे तो जान से मार देंगे।
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QR कोड से 1 लाख रुपए वसूले गए
डरे हुए माता-पिता ने ठगों की बात मान ली। इसके बाद ठगों ने एक क्यूआर कोड भेजा। अलग-अलग ट्रांजेक्शन में कुल 1 लाख 2 हजार भेजे गए। अगले दिन सच्चाई सामने आई। बेटे ने अपने दोस्त को फोन कर बताया कि वह दोस्तों के साथ सांवरिया सेठ दर्शन के लिए आया है। फिर माता-पिता को पता चला और बच्चे से बात हुई तो उसने बताया कि उसने किसी ने अगवा नहीं किया।
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परिवार को ठगी का एहसास हुआ
इसके बाद परिवार को पता चला कि ठगी हो गई है। ठगों ने वीडियो कॉल यूके नंबर से किया था। वहीं पैसे लेने के लिए, क्यूआर भारत का था। फिर परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यह आशंका है कि बच्चे के गायब होने पर परिजन ने सोशल मीडिया पर उसके गायब होने की सूचना, फोटो, और संपर्क नंबर डाले थे। बदमाशों ने यहीं से उसकी फोटो ली होगी। इसी से डीपफेक से वीडियो बनाया। एडिशनल डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
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जरूरी जानकारी कैसे बचें डीपफेक से
सोशल मीडिया पर निजी फोटो और नंबर सीमित रखें। किसी भी धमकी भरे वीडियो पर तुरंत भरोसा न करें। पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करें। पैसे भेजने से पहले पुलिस को सूचना दें। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है।
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