साइबर ठगी के लिए कंबोडिया भेजने वाले गिरोह का खुलासा, एक दलाल पकड़ा

राजस्थान में नौकरी का झांसा देकर युवाओं को कंबोडिया भेजने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। ये युवा कंबोडिया में एक चाइनीज कंपनी के लिए साइबर ठगी का काम करते थे। बानसूर से इस गिरोह से जुड़े एक दलाल को पकड़ा गया है।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  • राजस्थान पुलिस ने कोटपूतली-बहरोड़ में अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का खुलासा किया, जो कंबोडिया भेजकर युवाओं से ठगी कर रहा था।

  • गिरफ्तार आरोपी सुरेश सेन ने 50 से अधिक युवाओं को कंबोडिया भेजा, जिनसे साइबर ठगी कराई जाती थी।

  • पुलिस ने 41 लोगों को डिटेन किया और गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई।

  • गिरोह ने फर्जी पासपोर्ट और वीजा का इस्तेमाल कर युवाओं को विदेश भेजने का झांसा दिया।

  • पुलिस ने एडवाइजरी जारी करते हुए विदेश में नौकरी दिलाने वाले एजेंट्स से सतर्क रहने की सलाह दी।

News In Detail

सुनील जैन @अलवर 

राजस्थान पुलिस ने कोटपूतली बहरोड जिले में कंबोडिया से चल रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने सुरेश सेन नाम के एक ऐसे दलाल को पकड़ा है, जो नौकरी का झांसा देकर बानसूर इलाके से ही 50 से अधिक युवाओं को कंबोडिया भेज चुका है। इसके लिए वह फर्जी पासपोर्ट और वीजा का सहारा लेता था। उसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संबंधों की भी जांच की जा रही है। साथ ही बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है। 

सुरेश सेन भेजता था युवाओं को विदेश

ऑपरेशन साइबर मुक्ति के तहत चलाए गए अभियान के दौरान साइबर सेल और अन्य जांच एजेंसियों से सूचना मिली कि  कोटपूतली-बहरोड जिले में बड़ी संख्या में युवाओं को कंबोडिया सहित अन्य देशों में संचालित चाइनीज साइबर कंपनी में भेजा जा रहा है। पुलिस ने इस टास्क पर काम किया और एक विशेष अभियान चला कर अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया। इसमें बानसूर के रामनगर निवासी दलाल सुरेश सेन को गिरफ्तार किया गया। 

41 लोगों को किया डिटेन

पुलिस टीम ने अभियान के दौरान बानसूर, रामनगर, गुता, बूचियावास, मोठुका, फतेहपुर, संथालपुर, लेकड़ी, आलमपुर, बाबरिया सहित कई क्षेत्रों में दबिश देकर 41 लोगों को डिटेन किया। पूछताछ में सामने आया कि बानसूर, कोटकासिम और मुंडावर से बड़ी संख्या में लोग कंबोडिया जाकर फ्रॉड कर रहे है।
पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई का कहना है कि ऐसा मामला मेरे कई परिचितों के साथ भी घटित हो चुका। उनके पास  वीडियो कॉल आई। जब उनकी आईपी एड्रेस देखा तो उसमें कंबोडिया का नाम आया। फिर इस पर काम किया गया तो जितने भी संदिग्ध लोग मिले, उनकी डिटेल खंगाली गई। अधिकतर में आईपी एड्रेस कंबोडिया का ही आया।

50 से अधिक युवाओं को कंबोडिया भेजा

एसपी देवेंद्र बिश्नोई के मुताबिक, जांच में सामने आया कि रामनगर का सुरेश सेन विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं को विदेश भेज रहा है। यह साइबर ठगी के लिए वियतनाम, थाईलैंड, म्यांमार और अन्य देशों के रास्ते से कंबोडिया भेजा जा रहा है। सुरेश सेन अब तक अपने बानसूर थाना क्षेत्र से 50 से अधिक युवाओं को कंबोडिया भेज चुका है। यही उनके  पासपोर्ट वगैरह बनवाता था। लोगों से एक मुश्त राशि ली जाती थी। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि उन युवाओं को यह पता नहीं होता कि उनसे साइबर ठगी कराई जाएगी। 

कॉल सेंटर पर भारतीयों का डाटा

यहां के युवाओं को कंबोडिया में चीनी कंपनी की ओर से संचालित जिन कॉल सेंटर में तैनात किया जाता है, उनके पास भारतीय नागरिकों का डाटा होने की बात सामने भी आई है। इसी के आधार पर कंपनी विदेश के अलग-अलग स्थान पर रह रहे भारतीयों को टारगेट करती है। कॉल सेंटर से फोन करने वाले खुद को सीबीआई, पुलिस अधिकारी, ईडी, कस्टम डिपार्टमेंट का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट ,फ्रॉड लिंक ओटीपी फ्रॉड जैसे गंभीर साइबर अपराधों को अंजाम देते हैं। 

कंबोडिया में नेटवर्क को मिल रहा संरक्षण

इस पूरे नेटवर्क को कंबोडिया में स्थानीय स्तर पर संरक्षण में सहयोग मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने जिस आरोपी को गिरफ्तार किया है, वह पहले भी साइबर मामले में लखनऊ ईस्ट साइबर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोपी के अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

एक्शन टीम में साइबर सेल के संदीप कुमार यादव को विशेष योगदान रहा। इस कार्रवाई को लेकर कोटपूतली जिले के अलावा खैरथल तिजारा जिला के पीपली ,मुंडावर, कोटकासिम क्षेत्र में भी दबिश दी गई।

फेक ऐप बनाकर करते थे ठगी

पुलिस अधीक्षक देवेंद्र बिश्नोई ने बताया कि नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजने वाले युवाओं को वहां चाइनीज साइबर कंपनी में 15 दिन तक साइबर ठगी की ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके बाद उन्हें एक हजार अमेरिकी डॉलर प्रति माह और बड़ी ठगी की वारदात पर अतिरिक्त बोनस का लालच दिया जाता था।  
 

पुलिस पूछताछ में यह बात भी सामने आई की गिरोह सदस्यों ने खुलासा किया है कि नेपाल भारत-पाकिस्तान हुए बांग्लादेश के करीब 1000 से 1500 लोग साइबर ठगी के कार्य में लिप्त हैं। आरोपी टेलीग्राम, वाट्सअप, फेसबुक, इंस्टाग्राम ऐड के माध्यम से शेयर मार्किट के नाम पर असली ऐप से मिलते—जुलते फेक ट्रेडिंग ऐप और वेबसाइट बनाकर साइबर फ्रॉड करते थे।

ठगी के लिए अपनाते थे तीन तरीके 

बताया जाता है कि यह तीन तरीके से ठगी करते थे डिजिटल अरेस्ट के दौरान खुद को सीबीआई , ई डी,कस्टम या पुलिस अधिकारी बता कर लोगों से ठगी करते थे। इन्वेस्टमेंट फ्रॉड में सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिखाकर फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश का लालच देकर ठगी करते थे। इसके अलावा फेक वेबसाइट में असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइटों के माध्यम से भारतीय नागरिकों से हजारों करोड़ों रुपए की ठगी करते थे । उन्होंने बताया कि वह जिस राज्य में ठगी की वारदात कराना चाहते थे इस इलाके के लोकल भाषाई युवा से फोन कराते।

पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

इस मामले में पुलिस ने एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें कहा है कि विदेश में नौकरी दिलाने वाले किसी भी एजेंट पर बिना सत्यापन भरोसा ना करें। वे पासपोर्ट वीसा कंपनी, ऑफर लेटर और वर्क परमिट जरूर जांच करें। किसी भी संदेह होने की सूचना होने पर पुलिस को तुरंत सूचना दें। साइबर हेल्पलाइन का सहारा भी लिया जा सकता है। खासतौर से कंबोडिया, लाओस, वियतनाम, म्यांमार सहित अन्य देशों में जाने वाले युवक विशेष सावधानी बरतें।

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