जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026: अनुराग वर्मा का बड़ा दावा, राजस्थान का युवा गहलोत के लिए बेताब
Purshottam Kumar Joshi | Jan 19, 2026, 17:21 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2026 में आखिरी दिन 'मिलेनियल्स और मम्मीजी' सेशन में जेन जेड की 'क्रांति' पर चर्चा हुई। इसमें पॉडकास्टर अनुराग माइनस वर्मा, लेखक संतोष देसाई और लेखिका रिया चोपड़ा की चिराग ठक्कर से संवाद हुआ ।
News In Short
- जेएलएफ 2026 के “जेन-Z, मिलेनियल्स और मम्मीजी” सत्र में युवाओं की सोच और उनकी ‘क्रांति’ पर चर्चा हुई।
- वक्ताओं ने कहा कि भारतीय समाज बदलाव चाहता है, लेकिन मूलभूत परिवर्तन से अक्सर कतराता है।
- जेन-Z राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान नहीं, बल्कि राज्यवार अलग-अलग आकांक्षाएं रखता है।
- राजस्थान और बिहार में पेपर लीक के खिलाफ जेन-Z के नेतृत्व में आंदोलन हुए।
- डिजिटल संस्कृति ने युवाओं के विरोध को व्यक्तिगत और तेज बनाया है।
News In Detail
अनुराग माइनस वर्मा ने बातचीत करते हुए कहा कि दिल्ली की जेड जनरेशन टेलर स्विफ्ट कॉन्सर्ट के लिए उतावला हो सकता है। हरियाणा में सपना चौधरी के लिए तो मुंबई मे जोहरान ममदानी के लिए क्रेजी हो सकती है। राजस्थान में भी जेड जनरेशन अशोक गहलोत के लिए बेताब हो सकता है। हर राज्य की अपनी वर्ग-जातिगत दुनिया है, इसलिए समान आकांक्षाओं को एकजुट करना मुश्किल है।
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय समाज प्रगति की बातें करता है, लेकिन वास्तविक बदलाव से हिचकता है। जेन-Z को राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान क्रांतिकारी मानना गलत होगा, हालांकि राज्य स्तर पर वह प्रभावी है। राजस्थान और बिहार में पेपर लीक के विरोध में जेन-Z के नेतृत्व वाले आंदोलनों का उदाहरण दिया गया। डिजिटल संस्कृति ने युवाओं को मुद्दों पर संगठित होकर आवाज उठाने की ताकत दी है।
जेन-Z पर बड़ा विमर्श
परिवर्तन चाहता है समाज, लेकिन बदलाव से डरता है
हालांकि छोटे-मोटे आंदोलन होते रहते हैं, लेकिन व्यापक बदलाव अब भी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले राजनीति का मकसद समाज बदलना था, लेकिन अब समाज ने राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। आज न्यायपालिका और सामाजिक संस्थाएं भी राजनीतिक प्रभाव से अछूती नहीं रहीं।
सत्र में शामिल प्रमुख वक्ता
- संतोष देसाई-प्रमुख सामाजिक टिप्पणीकार (Social Commentator), विज्ञापन विशेषज्ञ, लेखक और स्तंभकार
- अनुराग माइनस वर्मा-फिल्म निर्माता, लेखक और पॉडकास्टर
- रिया चोपड़ा-लेखिका, स्वतंत्र पत्रकार और सांस्कृतिक टिप्पणीकार
- संचालन: चिराग ठक्कर- संपादक और लेखक
हर राज्य का जेन-Z अलग सोच रखता है
राष्ट्रीय स्तर पर सीमित, राज्य स्तर पर प्रभावी
जेन-Z आंदोलन की खास बातें
- मुद्दा आधारित विरोध
- सोशल मीडिया से संगठित
- व्यवस्था के खिलाफ सीधा सवाल
- राज्य स्तर पर ज्यादा प्रभाव
“जेन-Z की क्रांति मुझे पसंद है”
रिश्तों और प्यार की नई भाषा
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