पहली बार कर रहे हैं कैलाश मानसरोवर यात्रा, तो जाने से पहले नोट करें ये जरूरी गाइडलाइंस
Kailash Mansarovar Yatra: कैलाश मानसरोवर की यात्रा सिर्फ एक धार्मिक सफर नहीं है। यह आपकी शारीरिक और मानसिक ताकत की असली परीक्षा भी है। हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म में इसे बेहद पवित्र माना गया है।
तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत तक पहुंचना हर भक्त का एक बड़ा सपना होता है। लेकिन यहां का अनिश्चित मौसम और कठिन रास्ते इस सपने को चुनौतीपूर्ण बना देते हैं। इसलिए बिना तैयारी के यहां जाना बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।
इस बर्फीले इलाके में अचानक तापमान गिरना एक बहुत ही सामान्य बात है। कई बार तेज हवाएं और अचानक बर्फबारी यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ा देती हैं। ऐसे में आपको पहले से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा
कैलाश मानसरोवर(Kailash Yatra) हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के लोगों के लिए दुनिया का सबसे पवित्र और दिव्य स्थान है। यह तिब्बत के ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, कैलाश पर्वत भगवान शिव और माता पार्वती का पावन निवास स्थान है।
जबकि इसके पास स्थित मानसरोवर झील को साक्षात ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न माना गया है। धार्मिक रूप से ऐसा माना जाता है कि मानसरोवर झील के पवित्र पानी में केवल एक बार डुबकी लगाने से इंसान के कई जन्मों के पाप पूरी तरह धुल जाते हैं।
इसके साथ ही कैलाश पर्वत की पूरी परिक्रमा करने से मोक्ष यानी जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। अपनी कठिन चढ़ाई और कम ऑक्सीजन के बावजूद, यह यात्रा भक्तों को असीम मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति देती है। यही वजह है कि हर साल हजारों श्रद्धालु इस बेहद कठिन यात्रा पर भोलेनाथ (कैलाश पर्वत के दर्शन)के दर्शन करने जाते हैं।
कम ऑक्सीजन वाले रास्तों पर सेहत का रखें ख्याल
इस यात्रा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती कम ऑक्सीजन के स्तर से निपटना है। जब आप 5000 मीटर से ऊपर जाते हैं, तो हवा बहुत पतली हो जाती है। इससे एल्टीट्यूड सिकनेस यानी ऊंचाई की बीमारी होने का खतरा रहता है।
इससे बचने के लिए अपने शरीर को वहां के माहौल में ढलने का पूरा समय दें। अचानक बहुत तेजी से ऊंचाई पर चढ़ने की गलती भूलकर भी न करें। हर दिन कम से कम तीन से चार लीटर साफ पानी जरूर पीते रहें।
सफर के दौरान शराब, धूम्रपान और कैफीन वाली चीजों से पूरी तरह दूर रहें। अपने साथ डॉक्टर की सलाह पर जरूरी दवाइयां और पोर्टेबल ऑक्सीजन कैन हमेशा रखें। कोई भी दिक्कत महसूस होने पर तुरंत अपने गाइड को इसके बारे में बताएं।
इन सबके बिना नहीं मिलेगी एंट्री
कैलाश मानसरोवर का पूरा क्षेत्र तिब्बत यानी चीन की सीमा के अंतर्गत आता है। इसलिए इस यात्रा के लिए आपके पास एक वैध पासपोर्ट होना अनिवार्य है। इसके बिना आप यात्रा के लिए आगे आवेदन नहीं कर सकते हैं।
यात्रियों को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के ऑफिशियल पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके साथ ही आपको चीन का ग्रुप वीजा और तिब्बत ट्रैवल परमिट भी चाहिए होगा। इन सरकारी कागजातों को मिलने में काफी समय लग जाता है।
सभी जरूरी पेपर्स की कई सारी फोटोकॉपी हमेशा अपने बैग में अलग से रखें। हमेशा सरकार द्वारा ऑफिसियल एजेंसियों के माध्यम से ही अपनी यात्रा की बुकिंग करवाएं। किसी भी अनजान या फर्जी एजेंट के झांसे में आने से बचें।
3 महीने पहले ही बदल लें अपनी लाइफस्टाइल
कैलाश की कठिन ट्रैकिंग करने के लिए आपका शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यात्रा शुरू होने से कम से कम 12 हफ्ते पहले तैयारी करें। रोज सुबह वॉक, हल्की दौड़ और प्राणायाम करना शुरू कर दें।
कार्डियो एक्सरसाइज करने से आपके फेफड़ों की काम करने की क्षमता काफी बेहतर होती है। इससे आपको कम ऑक्सीजन वाली जगहों पर सांस लेने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। मानसिक रूप से मजबूत रहने के लिए ध्यान का सहारा लें।
रवानगी से पहले अपना एक पूरा मेडिकल चेकअप जरूर करवा लें। खासतौर पर दिल, ब्लड प्रेशर, शुगर और अस्थमा के मरीजों को खास ध्यान देना चाहिए। अगर डॉक्टर इस यात्रा के लिए मना करें, तो रिस्क बिल्कुल न लें।
बदलते मौसम से बचने के टिप्स
पहाड़ों का मौसम पल भर में बदल जाता है, इसलिए पैकिंग बहुत सोच-समझकर करें। अपने साथ लेयरिंग वाले यानी एक के ऊपर एक पहने जाने वाले गर्म कपड़े रखें। थर्मल इनर, वॉटरप्रूफ जैकेट और ट्रैक पैंट साथ ले जाना न भूलें।
पैरों की सुरक्षा के लिए मजबूत और अच्छी ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज ही पहनें। ऊंचाई पर तेज धूप से बचने के लिए हाई-SPF सनस्क्रीन और सनग्लासेस बहुत काम आते हैं। ठंडी हवाओं से होंठों को बचाने के लिए लिप बाम का इस्तेमाल करें।
ट्रैकिंग के समय तुरंत एनर्जी पाने के लिए अपने पास कुछ खाने का सामान रखें। ड्राई फ्रूट्स, एनर्जी बार और चॉकलेट को हमेशा अपने छोटे बैग में संभाल कर रखें। रास्ते में पानी को साफ करने वाली क्लोरीन टैबलेट्स भी बहुत काम आती हैं।
किस महीने में यात्रा करना होता है सबसे सुरक्षित
कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए मई से जून का महीना सबसे बेस्ट माना जाता है। इस समय के दौरान तिब्बत के इलाके में मौसम आमतौर पर काफी साफ रहता है। तापमान भी सामान्य रहता है जिससे ट्रैकिंग करने में आसानी होती है।
जुलाई से सितंबर के बीच मानसून के कारण रास्तों पर लैंडस्लाइड का खतरा बढ़ता है। बारिश की वजह से कई बार उत्तराखंड और नेपाल के रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इसलिए इस मौसम में यात्रा करने से बचना चाहिए।
नवंबर से अप्रैल के महीनों में यहाँ का तापमान शून्य से बहुत नीचे चला जाता है। भारी बर्फबारी के कारण चारों तरफ के रास्ते पूरी तरह से ब्लॉक हो जाते हैं। इस दौरान आम लोगों के लिए यात्रा करना पूरी तरह असंभव होता है।
इमरजेंसी के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस
इस दुर्गम यात्रा पर निकलने से पहले एक अच्छी ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी जरूर लें। यह पॉलिसी ऐसी होनी चाहिए जो मेडिकल इमरजेंसी और रेस्क्यू के खर्चों को कवर करे। पहाड़ों में किसी भी वक्त आपातकालीन स्थिति बन सकती है।
सफर के दौरान हमेशा आईटीबीपी (ITBP) के जवानों और लोकल गाइड के निर्देशों का पालन करें। वे इन रास्तों को बहुत अच्छी तरह जानते हैं, इसलिए उनकी बात मानना जरूरी है। कभी भी ग्रुप से अलग होकर अकेले आगे बढ़ने की कोशिश न करें।
यह स्थान कई धर्मों के लोगों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। इसलिए वहां की स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं का पूरा सम्मान करें। मानसरोवर झील के आसपास गंदगी बिल्कुल न फैलाएं और प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें।
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