...तो ऐसे इलाज कर रहीं थीं डॉक्टर, जिलाधिकारी ने किया फर्जी इलाज का भंडाफोड़

Sandeep Kumar | Feb 21, 2025, 17:05 IST
kanpur doctor treating
निरीक्षण के दौरान डॉक्टर दीप्ति गुप्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि उन्होंने 25 मरीजों का इलाज किया है। मगर जब IAS अफसर ने मौके पर ही मरीजों से फोन पर बात करनी शुरू की तो चौंकाने वाला सच सामने आया।

स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सरकारी अस्पतालों में चल रहे फर्जीवाड़े का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मरीजों के इलाज के नाम पर सरकारी रजिस्टर भर दिए जाते हैं, दवाएं दिखावटी रूप से बाँटी जाती हैं, लेकिन असल में कोई इलाज होता ही नहीं। ऐसे ही एक मामले में कानपुर के अर्बन PHC सेंटर में 25 मरीजों का इलाज सिर्फ कागजों में ही पूरा कर दिया गया।



ये खबर भी पढ़िए...MLA देवेंद्र यादव बलौदा बाजार हिंसा केस में आज शाम जेल से होंगे रिहा



जिलाधिकारी ने किया पर्दाफाश

IAS अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, जो वर्तमान में कानपुर के जिलाधिकारी (DM) हैं, ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली से प्रशासनिक ईमानदारी की मिसाल पेश की। रविवार को अचानक बिरहाना रोड स्थित अर्बन PHC सेंटर पर निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी को वहां सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुलती दिखी।



ये खबर भी पढ़िए...यशवंत क्लब में अतुल सेठ के बेटे का हंगामा, सस्पेंड, सचिव को कलेक्टर की फटकार



मरीजों को किया फोन तो खुल गई पोल

निरीक्षण के दौरान डॉक्टर दीप्ति गुप्ता ने जिलाधिकारी को बताया कि उन्होंने 25 मरीजों का इलाज किया है। मगर जब IAS अफसर ने मौके पर ही मरीजों से फोन पर बात करनी शुरू की तो चौंकाने वाला सच सामने आया।



पहला फोन: मरीज से पूछा गया, इलाज कैसा चल रहा है?


मरीज का जवाब: साहब, हम तो बीमार ही नहीं हैं, अस्पताल क्यों जाएंगे?


दूसरा, तीसरा, चौथा फोन: सबका जवाब यही, "हम अस्पताल गए ही नहीं।



ये खबर भी पढ़िए...सिंगरौली में आर्केस्ट्रा डांसर के साथ गैंगरेप, 6 आरोपी गिरफ्तार



फर्जीवाड़े का पर्दाफाश

ये खबर भी पढ़िए...फ्रांसीसी नागरिक का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार, नर्मदा में विसर्जित होंगी अस्थियां



डीएम ने भेजी कड़ी कार्रवाई की रिपोर्ट

सच्चाई सामने आते ही DM जितेंद्र प्रताप सिंह ने मौके से ही स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी और दोषी डॉक्टर व मेडिकल अफसर पर सख्त कार्रवाई की सिफारिश की।



उजागर हुई स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में बढ़ते भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर किया है। यह मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि यदि अफसर जिम्मेदारी से काम करें, तो ऐसी धांधलियों पर तुरंत लगाम लगाई जा सकती है। अब देखना यह है कि दोषी डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।



Tags:
  • यूपी न्यूज
  • स्वास्थ्य विभाग
  • कानपुर न्यूज
  • हिंदी न्यूज
  • नेशनल हिंदी न्यूज