विदेश से हो रही कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग- अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन का बड़ा दावा, दिपके ने किया पलटवार

Manya Jain | Sootr Creatives | Oct 15, 2026, 09:37 IST
अमेरिकी सिंगर सीजेपी पर विदेश से फंडिंग मिलने का किया दावा
अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने दावा किया कि कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से फंड मिल रहा है। एक्स पर सीजेपी फंडिंग विवाद में उन्होंने अभिजीत दिपके को पीएम के साथ बैठने की सलाह दी। दिपके ने पूछा कि पीएम मोदी अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। पार्टी विदेशी फंडिंग का आरोप पहले ही खारिज कर चुकी है, जबकि उसके दो नेता न्यायिक हिरासत में हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मैरी मिलबेन ने दावा किया कि सीजेपी को अमेरिका से फंड मिल रहा है।
  • उन्होंने अभिजीत दिपके को पीएम के साथ बैठकर काम करने की सलाह दी।
  • दिपके ने पूछा कि पीएम मोदी अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं।
  • कॉकरोच जनता पार्टी पहले ही विदेशी पैसे के आरोप से इनकार कर चुकी है।
  • दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के दो नेताओं को तिहाड़ जेल भेजा।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विपक्ष 15 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मांग एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण) की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठ रही है। एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शन के माहौल में यह बहस सामने आई।



मिलबेन ने क्या दावा किया?

मिलबेन ने ट्विटर पर लिखा कि-




दिपके का जवाब: बाहरी दखल क्यों?

दिपके ने पूछा था, पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं?



सीजेपी नेता तिहाड़ क्यों भेजे गए?

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजा है। उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत (कोर्ट के आदेश पर जेल) मिली। रिपोर्ट के मुताबिक आरोप है कि दोनों ने शांति बनाए रखने का उल्लंघन किया। उन पर जंतर मंतर में अनधिकृत प्रवेश का भी आरोप है। इसी बीच दिपके ने सेंट्रल पार्क में देशभक्तों को तिरंगे के साथ बुलाया है।



SIR पर ओवैसी की भी याचिका

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर के तरीके को चुनौती दी। राहुल गांधी भी याचिका दाखिल कर चुके हैं। दोनों पर गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।



कौन हैं मैरी मिलबेन और भारत से क्या नाता

मैरी मिलबेन (Mary Millben) एक जानी-मानी अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री हैं। वे विशेष रूप से अपनी सुरीली आवाज और हॉलीवुड में अफ्रीकी-अमेरिकी कलाकार के रूप में पहचानी जाती हैं। वैश्विक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों के अलावा, वे भारत, भारतीय संस्कृति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपने गहरे लगाव के लिए काफी मशहूर हैं।



मैरी मिलबेन ने 2005 में व्हाइट हाउस में इंटर्न के तौर पर काम करना शुरू किया था। उन्होंने बुश, ओबामा, ट्रंप और बाइडेन के लिए गाना गाया। अगस्त 2020 में उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया था।



इसके बाद जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भी उन्होंने प्रस्तुति दी थी। सितंबर 2023 में दिल्ली में हुए जी-20 सम्मेलन में भी उन्होंने गाना गाया था।



मोदी सरकार के समर्थन क्या बोला

फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मिलबेन ने कृषि कानूनों का समर्थन किया था। अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मामले में मोदी सरकार का पक्ष भी लिया था। फिर उन्होंने 2023 में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री को लेकर सरकार के रुख का समर्थन किया था। वहीं, मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) की तारीफ की थी।



विदेशी फंडिंग का आरोप, दिपके की सफाई

यह पहला मौका नहीं है, जब सीजेपीफंडिंग विवाद उठा है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे जॉर्ज सोरोस से संबंधित फाउंडेशन का नाम ले चुके हैं। उन्होंने पूछा, क्या दिपके की अमेरिका में शिक्षा का खर्च उसी फाउंडेशन ने उठाया? भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी विदेशी फंडिंग से अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। अगस्त 2026 में आरटीआई (सूचना का अधिकार) कार्यकर्ता अमित तिवारी ने जांच की मांग की थी।



दिपके इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुके हैं। उनके मुताबिक वे और उनके दोस्त मिलकर खर्च उठाते हैं। पार्टी को किसी बाहरी दानदाता या उद्योगपति से मदद नहीं मिली। उन्होंने क्राउडफंडिंग (आम लोगों से चंदा जुटाना) की योजना भी बताई। गृह मंत्री अमित शाह से भी उन्होंने सवाल किया है। उनके मुताबिक विदेशी पैसा आया, तो जांच गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है।



सोचिए एक बार। आरोप लगाने वालों से सबूत की उम्मीद क्यों न की जाए? और आरोप झेल रहे पक्ष से पारदर्शिता की उम्मीद कितनी जायज है?



यह खबर क्यों जरूरी है

विदेशी फंडिंग का आरोप गंभीर है। लोकतंत्र में आरोप के साथ सबूत और जवाब, दोनों का सार्वजनिक होना जरूरी है। संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है। आंदोलनों के पैसे में पारदर्शिता का सवाल भी इसी बहस से जुड़ा है। इसमें एक विदेशी कलाकार की टिप्पणी और भारत के घरेलू मामलों में बाहरी दखल का मुद्दा भी शामिल है। पाठक के लिए जरूरी है कि दावे और सबूत का फर्क समझे।

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