पुलिस के एक नोटिस पर fb और Insta से हटेगा आपका कंटेंट, Meta ऑटोमैटिक कर रहा ब्लॉक

Sourabh Bhatnagar | Apr 25, 2026, 15:53 IST
meta content restrictions
भारत सरकार और राज्य पुलिस के टेकडाउन नोटिस पर Meta ने Facebook और Instagram पर कंटेंट ऑटोमैटिक ब्लॉक करना शुरू कर दिया है। Sahyog पोर्टल के जरिए यह प्रक्रिया चल रही है। एक्सपर्ट्स इसे स्थायी सेंसरशिप बता रहे हैं।

News In Short

  • Meta ने भारत में सरकारी टेकडाउन नोटिस पर बड़े पैमाने पर कंटेंट हटाना शुरू कर दिया है।
  • Sahyog पोर्टल के जरिए पुलिस सोशल मीडिया को नोटिस भेजती है।
  • IT (Information Technology) एक्ट के तहत यह पोर्टल काम करता है।
  • नोटिस न मानने पर प्लेटफॉर्म का *सेफ हार्बर प्रोटेक्शन खत्म हो सकता है।
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह यूजर्स पर नहीं, प्लेटफॉर्म पर दबाव की रणनीति है।

News In Detail

भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां Facebook और Instagram स्थानीय कानूनों के आधार पर कंटेंट ऑटोमैटिकली रिस्ट्रिक्ट करते हैं। यह खुलासा Meta की पैरेंट कंपनी ने किया है।



पिछले कुछ हफ्तों में Meta को राज्य पुलिस और केंद्र सरकार, दोनों की तरफ से टेकडाउन नोटिस की भरमार मिली है। इसके बाद कंपनी ने बड़े पैमाने पर सेंसरशिप ऑर्डर मानने शुरू कर दिए हैं।



Sahyog पोर्टल क्या है?

Sahyog portal एक सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए देशभर के अधिकृत पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को टेकडाउन नोटिस भेज सकते हैं। यह पोर्टल IT एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत काम करता है।



इस धारा के मुताबिक अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नोटिस का पालन नहीं करता, तो उसका सेफ हार्बर प्रोटेक्शन छिन सकता है। यानी प्लेटफॉर्म को यूजर्स के कंटेंट की जिम्मेदारी खुद लेनी पड़ सकती है और कोर्ट में भी जवाब देना पड़ सकता है।



बता दें कि IT मंत्रालय ने फरवरी में नोटिस का जवाब देने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर अधिकतम तीन घंटे कर दी है। इसके बाद से गैर-बाध्यकारी नोटिस पर भी कंटेंट हटाने की दर बढ़ गई दिखती है।



X (Twitter) का रुख अलग

X (जो पहले Twitter था) ने कर्नाटक हाईकोर्ट में Sahyog पोर्टल को चुनौती दी है। X का कहना है कि अगर उसे लगता है कि जो कंटेंट हटाने के लिए कहा जा रहा है, वह कानूनी है, तो वो पुलिस के टेकडाउन नोटिस को नहीं मानता। यह Meta के तरीके से बिल्कुल अलग है।



एक्सपर्ट ने क्या कहा?

सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी (Centre for Internet and Society) के को-फाउंडर और अब टेक लॉ व पॉलिसी कंसल्टेंट प्रणेश प्रकाश बताते हैं कि ज्यादातर नोटिस जांचने पर भारतीय कानून का कोई उल्लंघन साबित नहीं होता। उन्होंने कहा कि Sahyog के जरिए सरकारी एजेंसियां प्लेटफॉर्म पर तुरंत और स्थायी सेंसरशिप का दबाव बनाती हैं। यूजर्स कोर्ट में भी कम ही जा पाते हैं और मामला सीधे कंटेंट हटाने पर खत्म हो जाता है।



प्रणेश प्रकाश ने साफ कहा कि यूजर्स के लिए लड़ने की बजाय Meta बिना सोचे-समझे ऐसा कंटेंट हटा रहा है जिसे हटाना कानूनी तौर पर जरूरी भी नहीं है।



स्थायी सेंसरशिप का खतरा

एक्सपर्ट का मानना है कि इस पूरे सिस्टम का सबसे बड़ा खतरा यह है कि पुलिस महज एक ऑनलाइन फॉर्म भरकर किसी भी कंटेंट पर तत्काल और स्थायी रोक लगाने की ताकत पा लेती है। यूजर को न तो पहले सुना जाता है, न कोर्ट से राहत आसानी से मिलती है।



यह व्यवस्था अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है। जब प्लेटफॉर्म खुद ही बिना जांचे कंटेंट हटाने लगें, तो यूजर का डिजिटल अधिकार कमजोर होता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर भारत के डिजिटल नागरिकों के लिए बेहद अहम है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। जब सरकारी एजेंसियां बिना न्यायिक जांच के सोशल मीडिया कंटेंट हटवा सकती हैं, तो यह अधिकार कमजोर होता है। यह खबर नीति-निर्माताओं, पत्रकारों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों, सभी के लिए जरूरी है ताकि डिजिटल अधिकारों की रक्षा के लिए सही सवाल उठाए जा सकें।



FAQ

  1. Sahyog पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करता है?
    Sahyog भारत सरकार का एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल है। इसके जरिए देशभर के अधिकृत पुलिस अधिकारी Facebook, Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कंटेंट हटाने के नोटिस भेज सकते हैं। यह IT एक्ट की धारा 79(3)(b) के तहत काम करता है। अगर प्लेटफॉर्म नोटिस नहीं मानता, तो उसका "सेफ हार्बर" खत्म हो सकता है और उसे यूजर के कंटेंट की कानूनी जिम्मेदारी खुद लेनी पड़ सकती है।
  2. Meta भारत में कंटेंट ऑटोमैटिक क्यों हटा रहा है?
    Meta ने भारत को उन "सीमित देशों" में शामिल किया है जहां स्थानीय कानून के आधार पर कंटेंट ऑटोमैटिक रेस्ट्रिक्ट होता है। सरकार और राज्य पुलिस की तरफ से टेकडाउन नोटिस की बढ़ती संख्या और फरवरी 2026 में जवाब की समयसीमा घटाकर तीन घंटे करने के बाद Meta की अनुपालन दर बढ़ी है। कंपनी सेफ हार्बर बचाने के लिए नोटिस मान रही है, चाहे कंटेंट कानूनी हो या नहीं।

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