WhatsApp को NCLAT से राहत, अब Meta के साथ यूजर डेटा साझा करने पर नहीं रहेगा प्रतिबंध
Neel Tiwari | Nov 04, 2025, 23:47 IST
Photograph: (THESOOTR)
NCLAT ने WhatsApp को राहत देते हुए कहा कि अब वह अपना यूज़र डेटा Meta की अन्य कंपनियों के साथ साझा कर सकेगा। हालांकि, CCI द्वारा लगाया गया जुर्माना 213.14 करोड़ रुपये बरकरार रखा गया है। यह आदेश डेटा गोपनीयता और विज्ञापन मॉडल पर बड़ा असर डालेगा।
NEW DELHI. WhatsApp को NCLAT से राहत:नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने WhatsApp और Meta को गोपनीयता नीति विवाद में आंशिक राहत दी है। अब WhatsApp अपने यूजर्स का डेटा Meta की अन्य कंपनियों से साझा कर सकेगा। हालांकि, CCI द्वारा लगाया गया जुर्माना बरकरार रखा गया है।
साल 2021 में WhatsApp ने अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी जारी की थी, जिसमें उपयोगकर्ताओं से यह सहमति मांगी गई थी कि वे अपना डेटा Meta समूह की अन्य कंपनियों के साथ साझा करने की अनुमति दें। इस नीति को लेकर देशभर में विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद Competition Commission of India (CCI) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की।
CCI ने पाया कि WhatsApp अपनी बाजार-प्रभुत्व स्थिति का दुरुपयोग कर रहा है और उपयोगकर्ताओं को मजबूर किया जा रहा है कि वे बिना विकल्प दिए अपनी जानकारी साझा करें। इसके बाद आयोग ने WhatsApp और Meta पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया और पांच वर्षों तक यूज़र डेटा विज्ञापन के लिए साझा न करने का निर्देश दिया था।
ये खबरें भी पढ़ें...
मौसम पूर्वानुमान (5 नवंबर) : मध्यप्रदेश में हल्की तो उत्तर-पश्चिमी भारत में तेज बारिश की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- महाधिवक्ता कार्यालयों में OBC, SC-ST और महिलाओं को क्यों नहीं मिल रहा प्रतिनिधित्व?
मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य अरुण बारोका की दो सदस्यीय पीठ ने की। ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि-
अब WhatsApp अपने यूज़र्स का डेटा Meta की अन्य कंपनियों जैसे Facebook और Instagram- के साथ विज्ञापन उद्देश्यों के लिए साझा कर सकेगा। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजर्स को इस डेटा शेयरिंग के बारे में पूरी जानकारी और विकल्प (opt-out) का अधिकार होना चाहिए।
इस फैसले ने एक बार फिर डेटा गोपनीयता बनाम डिजिटल प्रतिस्पर्धा की बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डिजिटल प्लेटफार्मों के बढ़ते प्रभाव के बीच यह फैसला आगे चलकर डेटा सुरक्षा कानूनों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग एप्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
जीपी हिंदुजा का 85 की उम्र में निधन: 30 से ज्यादा देशों में था बिजनेस, नेटवर्थ उड़ा देंगे होश
NCLAT का यह आदेश यह संकेत देता है कि गोपनीयता (Privacy) के मुद्दे को केवल प्रतिस्पर्धा आयोग के दायरे में नहीं लाया जा सकता। अदालत ने माना कि WhatsApp का व्यापार मॉडल डिजिटल विज्ञापन पर आधारित है। जब तक यूजर को विकल्प उपलब्ध है, इसे बाजार प्रभुत्व का दुरुपयोग नहीं कहा जा सकता।
इससे पहले, WhatsApp ने अपने बचाव में कहा था कि उसकी नई नीति पारदर्शी है और उपयोगकर्ता यह तय कर सकते हैं कि वे डेटा साझा करना चाहते हैं या नहीं।
NCLAT का यह फैसला Meta और WhatsApp के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत है, वहीं दूसरी ओर यह भारत के डेटा संरक्षण ढांचे के लिए नई चुनौतियां भी लेकर आया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत ऐसे मामलों पर नियामक एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं।
प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ा मामला
CCI ने पाया कि WhatsApp अपनी बाजार-प्रभुत्व स्थिति का दुरुपयोग कर रहा है और उपयोगकर्ताओं को मजबूर किया जा रहा है कि वे बिना विकल्प दिए अपनी जानकारी साझा करें। इसके बाद आयोग ने WhatsApp और Meta पर 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया और पांच वर्षों तक यूज़र डेटा विज्ञापन के लिए साझा न करने का निर्देश दिया था।
ये खबरें भी पढ़ें...
मौसम पूर्वानुमान (5 नवंबर) : मध्यप्रदेश में हल्की तो उत्तर-पश्चिमी भारत में तेज बारिश की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- महाधिवक्ता कार्यालयों में OBC, SC-ST और महिलाओं को क्यों नहीं मिल रहा प्रतिनिधित्व?
NCLAT ने कहा जुर्माना रहेगा बरकरार
- CCI द्वारा लगाया गया 213.14 करोड़ रुपए का जुर्माना बरकरार रहेगा।
- कोर्ट का यह निष्कर्ष है कि Meta और WhatsApp ने बाजार पर प्रभुत्व का दुरुपयोग किया, रद्द किया जाता है।
- साथ ही CCI का वह निर्देश भी रद्द किया गया, जिसमें WhatsApp को पांच वर्षों तक यूज़र डेटा साझा करने से रोका गया था।
यूजर्स के लिए मायने रखता है आदेश
इस फैसले ने एक बार फिर डेटा गोपनीयता बनाम डिजिटल प्रतिस्पर्धा की बहस को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डिजिटल प्लेटफार्मों के बढ़ते प्रभाव के बीच यह फैसला आगे चलकर डेटा सुरक्षा कानूनों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
ये खबरें भी पढ़ें...
ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग एप्स पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
जीपी हिंदुजा का 85 की उम्र में निधन: 30 से ज्यादा देशों में था बिजनेस, नेटवर्थ उड़ा देंगे होश
व्यापार मॉडल को मिली सुप्रीम अनुमति
इससे पहले, WhatsApp ने अपने बचाव में कहा था कि उसकी नई नीति पारदर्शी है और उपयोगकर्ता यह तय कर सकते हैं कि वे डेटा साझा करना चाहते हैं या नहीं।
NCLAT का यह फैसला Meta और WhatsApp के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत है, वहीं दूसरी ओर यह भारत के डेटा संरक्षण ढांचे के लिए नई चुनौतियां भी लेकर आया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के तहत ऐसे मामलों पर नियामक एजेंसियां क्या रुख अपनाती हैं।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari