सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- महाधिवक्ता कार्यालयों में OBC, SC-ST और महिलाओं को क्यों नहीं मिल रहा प्रतिनिधित्व?
Neel Tiwari | Nov 04, 2025, 15:46 IST
Photograph: (THESOOTR)
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से महाधिवक्ता कार्यालयों में आरक्षण को लेकर सवाल किया है। SC ने पूछा कि ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा है। जबकि आरक्षण अधिनियम 1994 का पालन होना चाहिए था।
JABALPUR. सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार से सवाल किया है। उन्होंने पूछा कि आखिर राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) कार्यालयों में आरक्षण अधिनियम 1994 का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
जस्टिस एम. सुंद्रेश और जस्टिस सतीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए निर्देश दिया है कि वह OBC, SC-ST और महिलाओं को दी गई नियुक्तियों का पूरा डाटा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
यह मामला ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP (C) No. 16518/2022) से संबंधित है। जिसकी सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई।
एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की जनसंख्या लगभग 88 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की आबादी 49.8 प्रतिशत है। इसके बावजूद, राज्य के महाधिवक्ता कार्यालयों में इन वर्गों के अधिवक्ताओं को नियुक्ति में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 2(b), 2(f), 3 और 4(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि महाधिवक्ता कार्यालय, जिला न्यायालयों, निगमों और मंडलों में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में आरक्षण लागू होगा, क्योंकि उन्हें राज्य की निधि (Public Fund) से वेतन दिया जाता है।
इसके बावजूद महाधिवक्ता कार्यालयों में आरक्षण लागू नहीं किया गया है, जिससे ओबीसी, एससी, एसटी और महिला अधिवक्ताओं को समान अवसरों से वंचित किया जा रहा है।
ये खबर भी पढ़ें...
एमपी हाईकोर्ट को मिले एक और नए जज, जस्टिस संदीप भट्ट ने ली शपथ
एसोसिएशन द्वारा अदालत को बताया गया कि मध्य प्रदेश के जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर स्थित महाधिवक्ता कार्यालयों के अलावा सुप्रीम कोर्ट में भी एडिशनल एडवोकेट जनरल, डिप्टी एडवोकेट जनरल, गवर्नमेंट एडवोकेट और डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट के लगभग 150 से अधिक स्वीकृत पद हैं।
इसके अलावा 500 से अधिक पैनल अधिवक्ताओं के पद हैं, जबकि जिला न्यायालयों में एक हजार से अधिक और निगमों और बैंकों में मिलाकर करीब 1800 पद हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इनमें से अधिकांश पदों पर सामान्य वर्ग के अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई है, जिससे आरक्षित वर्गों का न्यायिक तंत्र में प्रतिनिधित्व नगण्य रह गया है।
ये खबरें भी पढ़ें...
मुझे हाई कोर्ट का जज बनाओ : याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, बताया न्याय प्रणाली का मजाक
तत्काल छोड़ दो दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने किसके लिए दे दी सीधी चेतावनी
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार दोनों जस्टिसों की खंडपीठ ने इस विषय को ‘बेहद गंभीर और संवेदनशील’ मानते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि यदि आरक्षण अधिनियम का दायरा महाधिवक्ता कार्यालयों तक भी है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि उसका पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रस्तुत आंकड़े महत्वपूर्ण सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं से जुड़े हैं, इसलिए राज्य सरकार को सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व का विस्तृत डाटा प्रस्तुत करना आवश्यक है।
ये खबर भी पढ़ें...
सरकारी नौकरी: RSSB ने राजस्थान कंडक्टर भर्ती 2025 का एडमिट कार्ड किया जारी, 6 नवंबर से परीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए यह निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पूर्व ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं की नियुक्तियों से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जाए।
यह मामला न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश में सरकारी विधिक संस्थानों में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश आरक्षण कानूनों के वास्तविक क्रियान्वयन और कानूनी संस्थाओं में विविधता बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है।
जस्टिस एम. सुंद्रेश और जस्टिस सतीष शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह की मोहलत देते हुए निर्देश दिया है कि वह OBC, SC-ST और महिलाओं को दी गई नियुक्तियों का पूरा डाटा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे।
ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका
एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की जनसंख्या लगभग 88 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की आबादी 49.8 प्रतिशत है। इसके बावजूद, राज्य के महाधिवक्ता कार्यालयों में इन वर्गों के अधिवक्ताओं को नियुक्ति में उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है।
सरकारी वकीलों को सार्वजनिक निधि से मिलता है वेतन
इसके बावजूद महाधिवक्ता कार्यालयों में आरक्षण लागू नहीं किया गया है, जिससे ओबीसी, एससी, एसटी और महिला अधिवक्ताओं को समान अवसरों से वंचित किया जा रहा है।
ये खबर भी पढ़ें...
एमपी हाईकोर्ट को मिले एक और नए जज, जस्टिस संदीप भट्ट ने ली शपथ
500 से अधिक पैनल अधिवक्ताओं के पद
इसके अलावा 500 से अधिक पैनल अधिवक्ताओं के पद हैं, जबकि जिला न्यायालयों में एक हजार से अधिक और निगमों और बैंकों में मिलाकर करीब 1800 पद हैं। एसोसिएशन का कहना है कि इनमें से अधिकांश पदों पर सामान्य वर्ग के अधिवक्ताओं की नियुक्ति की गई है, जिससे आरक्षित वर्गों का न्यायिक तंत्र में प्रतिनिधित्व नगण्य रह गया है।
ये खबरें भी पढ़ें...
मुझे हाई कोर्ट का जज बनाओ : याचिका पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, बताया न्याय प्रणाली का मजाक
तत्काल छोड़ दो दिल्ली - सुप्रीम कोर्ट ने किसके लिए दे दी सीधी चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने माना मामला गंभीर
साथ ही, अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में प्रस्तुत आंकड़े महत्वपूर्ण सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं से जुड़े हैं, इसलिए राज्य सरकार को सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व का विस्तृत डाटा प्रस्तुत करना आवश्यक है।
ये खबर भी पढ़ें...
सरकारी नौकरी: RSSB ने राजस्थान कंडक्टर भर्ती 2025 का एडमिट कार्ड किया जारी, 6 नवंबर से परीक्षा
दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
यह मामला न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि पूरे देश में सरकारी विधिक संस्थानों में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की स्थिति पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्देश आरक्षण कानूनों के वास्तविक क्रियान्वयन और कानूनी संस्थाओं में विविधता बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित हो सकता है।
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari