भयंकर कर्ज के जाल में फंस रहे मिडिल क्लास, आरबीआई की रिपोर्ट में खुलासा

Kaushiki | Jul 29, 2026, 16:45 IST
Middle Class Loan
देश का मिडिल क्लास कम कमाई और भारी EMI के बोझ तले दब रहा है। एक सर्वे के मुताबिक 60% कर्जदारों की EMI उनकी कुल सैलरी के बराबर है। 40% लोग पुराना लोन चुकाने के लिए नया लोन ले रहे हैं। जानिए इस स्थिति की मुख्य वजहें।

समझें क्या है पूरा मामला

  • देश का मिडिल क्लास तेजी से क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन पर निर्भर हो रहा है।
  • एक्सपर्ट पैनल के सर्वे में 60 फीसदी लोगों की EMI उनकी आय के बराबर पाई गई।
  • करीब 40 फीसदी लोग पुरानी किस्त भरने के लिए नया लोन लेने को मजबूर हैं।
  • मेडिकल इमरजेंसी और बच्चों की पढ़ाई कर्ज बढ़ने के सबसे बड़े कारण बने हैं।
  • आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार घरेलू बचत घटी है और देनदारियां काफी बढ़ी हैं।

कम कमाई और भारी EMI

Middle Class Debt Trap: आज के समय में अपना घर बनाना और बच्चों को पढ़ाना हर इंसान का सपना होता है। लेकिन महंगाई के इस दौर में ये सपने बहुत महंगे साबित हो रहे हैं। आजकल मिडिल क्लास परिवार की कमाई कम है और मासिक किस्तों का खर्च बहुत ज्यादा है।



पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और ईजी फाइनेंस ने शुरुआत में बहुत राहत दी थी। लेकिन अब यही आसान लोन कई परिवारों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुके हैं। लोग हर महीने अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा किस्तों में दे रहे हैं। फिर भी उनका पूरा कर्ज खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है।



हाल ही में हुए एक सर्वे ने देश के वित्तीय हालात पर चिंता बढ़ा दी है। इस सर्वे से पता चलता है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कर्ज ले रहे हैं। जब सैलरी कम पड़ जाती है, तो लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने लगते हैं।



फिर उस कार्ड का बिल भरने के लिए एक नया लोन ले लेते हैं। इस तरह आम इंसान धीरे-धीरे एक ऐसे जाल में फंस जाता है जहां से निकलना मुश्किल होता है। इसे फाइनेंसियल एक्सपर्ट डेट ट्रैप या कर्ज का विशियस साइकिल कहते हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।



सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Debt Resolution प्लेटफॉर्म के सर्वे ने हर किसी को हैरान कर दिया है। सर्वे के मुताबिक, 60 फीसदी लोगों की EMI उनकी आय के बराबर है। कई मामलों में मासिक किस्त उनकी कुल कमाई से भी ज्यादा हो चुकी है। इससे पता चलता है कि घर का बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। कमाई का सारा पैसा बैंक की किस्त में ही चला जाता है।



पुराना लोन चुकाने के लिए नया लोन

सर्वे में शामिल 40 फीसदी लोग बहुत गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। ये लोग पुरानी किस्तों को चुकाने के लिए नया क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं। क्रेडिट कार्ड का बकाया भरने के लिए वे फिर से नया लोन ले लेते हैं। यह स्थिति किसी भी परिवार के लिए बहुत खतरनाक फाइनेंसियल रिस्क बनाती है। इस आदत से इंसान हमेशा के लिए भारी कर्ज में फंस जाता है।



आखिर किन वजहों से बढ़ रहा है कर्ज

लोग केवल अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए ही कर्ज नहीं ले रहे। बल्कि कई आर्थिक मजबूरियां उन्हें लोन लेने पर मजबूर कर रही हैं। सर्वे के मुताबिक 26 फीसदी लोगों ने मेडिकल इमरजेंसी के कारण लोन लिया।



22 फीसदी लोगों ने बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए उधार लिया। वहीं 18 फीसदी लोगों ने नौकरी जाने या व्यापार में मंदी के कारण लोन लिया। वहीं 15 फीसदी लोगों को रोजमर्रा के राशन और खर्चों के लिए कर्ज लेना पड़ा।



इंस्टॉलमेंट्स का पेमेंट करना क्यों हुआ मुश्किल

सर्वे में शामिल लोगों ने अपनी असली परेशानियों को खुलकर सामने रखा है। 33 फीसदी लोगों ने नौकरी छूटने या आय कम होने को मेन कारण बताया।



28 फीसदी लोगों ने कहा कि EMI का बोझ कमाई से बहुत ज्यादा है। वहीं 19 फीसदी लोग एक से ज्यादा लोन होने के कारण भारी दबाव में हैं। फिर 12 फीसदी मामलों में घर की गंभीर मेडिकल इमरजेंसी मुख्य वजह बनी।



डिफॉल्ट और कानूनी नोटिस का बढ़ता खतरा

स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि 60 फीसदी लोग सिर्फ मिनिमम पेमेंट कर पा रहे हैं। कई लोग समय पर अपनी मासिक किस्तें भी नहीं दे पा रहे हैं।



लगभग 20 फीसदी कर्जदारों को बैंकों से कानूनी नोटिस भी मिल चुके हैं। यह स्थिति उनके क्रेडिट स्कोर को पूरी तरह से खराब कर रही है। इससे भविष्य में नया लोन मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।



आरबीआई के आंकड़ों ने भी बढ़ाई चिंता

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े भी इसी ओर साफ इशारा कर रहे हैं। हाल के वर्षों में आम भारतीय परिवारों (financial planning)की देनदारियां बहुत तेजी से बढ़ी हैं। दूसरी तरफ लोगों की कुल घरेलू बचत दर में भारी गिरावट आई है।



इसी वजह से वित्तीय सलाहकार हमेशा सोच-समझकर उधारी लेने की सलाह देते हैं। बिना वित्तीय अनुशासन के लाइफस्टाइल चलाना भारी पड़ सकता है।



फाइनेंसियल डिसिप्लिन अपनाना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत के समय कर्ज (Financial Discipline) लेना कभी गलत नहीं होता। घर, शिक्षा या बिजनेस के लिए लिया गया लोन प्रगति का जरिया बनता है। लेकिन जब लोन की किस्त कमाई पर पूरी तरह हावी होने लगे, तब सावधान रहें। लोन लेने से पहले अपनी आय और भविष्य की जरूरतों का सही हिसाब लगाएं। अपनी क्षमता से ज्यादा लिया गया कर्ज आपकी आर्थिक आजादी छीन सकता है।



FAQ

  1. वित्तीय भाषा में 'डेट ट्रैप' या कर्ज का दुष्चक्र क्या होता है?
    जब कोई व्यक्ति अपने पुराने लोन की EMI या क्रेडिट कार्ड का बिल चुकाने के लिए नया लोन लेता है, तो वह कर्ज के दुष्चक्र यानी 'डेट ट्रैप' में फंस जाता है। इसमें कमाई का ज्यादातर हिस्सा सिर्फ ब्याज भरने में चला जाता है।
  2. सर्वे के अनुसार भारत में लोग सबसे ज्यादा कर्ज किस वजह से ले रहे हैं?
    सर्वे के अनुसार लोग केवल लाइफस्टाइल के लिए नहीं, बल्कि 26% मेडिकल इमरजेंसी, 22% बच्चों की पढ़ाई व शादी, 18% नौकरी जाने या मंदी और 15% रोजमर्रा के घरेलू खर्च चलाने के लिए कर्ज ले रहे हैं।
  3. कर्ज के भारी बोझ और EMI के संकट से कैसे बचा जा सकता है?
    अपनी मासिक आय का 30-40% से ज्यादा हिस्सा EMI में न जाने दें। इमरजेंसी फंड बनाएं, गैर-जरूरी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बंद करें और नया लोन लेने से पहले अपनी बजट क्षमता का सही आकलन जरूर करें।

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