पश्चिम एशिया में सीजफायर, भारत ने साधा ईरान से संपर्क, होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को लाने की तैयारी
News in Short
- ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर के बाद भारत ने संघर्ष विराम का स्वागत किया।
- भारत ने होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को स्वदेश लाने की योजना बनाई।
- इन जहाजों में दो लाख टन से अधिक एलपीजी है, जो भारत के लिए आवश्यक है।
- सीजफायर से वैश्विक व्यापार और नौवहन में सुधार की उम्मीद है।
- भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी को प्राथमिकता देगा।
News in Detail
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर घोषित हुआ। भारत ने ईरान से संपर्क साधा है। भारत सरकार ने संघर्ष विराम का स्वागत किया। उसने उम्मीद जताई कि यह शांति लाएगा। भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को स्वदेश लाने की तैयारी शुरू की। इन जहाजों में अधिकतर तेल और गैस हैं। इनमें दो लाख टन से ज्यादा एलपीजी है, जो भारत को जरूरी है।
16 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में
भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता कम होने की उम्मीद है। वर्तमान में भारत के 16 जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हैं। इन जहाजों में एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुएं हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85 प्रतिशत आवश्यकता आयात करता है। इसमें 60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता भारत की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है।
सीजफायर के बाद उम्मीदें
भारत सरकार का मानना है कि सीजफायर से वैश्विक वाणिज्य और नौवहन की बिना रोक-टोक स्वतंत्रता बहाल होगी। सरकार का कहना है कि संघर्ष से पहले ही व्यापार नेटवर्क बाधित हुआ था। कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था। सीजफायर के बाद व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी। ऊर्जा आयातक देशों जैसे भारत को राहत मिलेगी।
भारत बनाए रखेगा साझेदारी
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी वाशिंगटन में अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। यह बैठक पश्चिम एशिया की स्थिति पर विमर्श के लिए होगी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर इस सप्ताहांत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जाएंगे। यह यात्रा भारत की रणनीति का हिस्सा है। भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ साझेदारी बनाए रखेगा।
भारत की ऊर्जा प्राथमिकताएं
भारत ने हमेशा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति में सुधार होगा। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार सामान्य रूप से चल सकेगा।
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