मोहन भागवत का बड़ा बयान, बोले-ईरान-इजराइल संघर्ष खत्म करने के लिए भारत पर दुनिया का विश्वास
News in Short
- मोहन भागवत ने संघर्षों की वजह स्वार्थ और वर्चस्व को बताया।
- शांति के लिए एकता, अनुशासन और धर्म जरूरी है।
- भारत का सद्भाव विश्वास दुनिया को शांति की दिशा दे सकता है।
- धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं होना चाहिए, यह व्यवहार में होना चाहिए।
- दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल और मेलजोल की ओर बढ़ना चाहिए।
News in Detail
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघर्षों की असली वजह स्वार्थ और वर्चस्व की चाहत है। स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म से संभव है। भागवत नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रख रहे थे। उन्होंने कहा, “पिछले 2,000 साल से संघर्षों को सुलझाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन सफलता कम मिली है।”
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत का स्वभाव सद्भाव में विश्वास रखता है। यही कारण है कि दुनिया से आवाज उठ रही है कि भारत ईरान-इजरायल युद्ध को खत्म कर सकता है। भागवत ने कहा, भारत के लोग मानवता के नियम पर चलते हैं, जबकि बाकी दुनिया जंगल के कानून को मानती है। उन्होंने कहा, लड़खड़ाती हुई दुनिया को धर्म की नींव से संतुलित करना हमारा काम है।
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धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं
संघ प्रमुख ने कहा कि शांति केवल बातों से नहीं आएगी। इसके लिए एकता, अनुशासन और धर्म के रास्ते पर चलना होगा। उन्होंने कहा, धर्म केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे लोगों के व्यवहार में दिखना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों का पालन करने के लिए मेहनत और त्याग जरूरी है। उन्होंने कहा, “जब तक समाज में अनुशासन नहीं होगा, तब तक हम बेहतर दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते।
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दुनिया को अब टकराव छोड़ना चाहिए
भागवत ने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि हम सब एक हैं। दुनिया को अब टकराव छोड़कर तालमेल की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा, आधुनिक विज्ञान भी इसी बात को मान रहा है। भारत मानवता के नियम का पालन करता है। बाकी दुनिया सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट में विश्वास करती है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्से ताकतवर के जीवित रहने की बात करते हैं। दुनिया को संघर्ष की नहीं, आपसी मेलजोल की जरूरत है।