रास चुनाव को लेकर भड़के अभिषेक मनु सिंघवी बोले-ECI ने फैसला न लेकर किया पक्षपात

Sandeep Kumar | Jun 14, 2026, 23:24 IST
भड़के अभिषेक मनु सिंघवी
एमपी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने पर सिंघवी ने चुनाव आयोग पर जानबूझकर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। SC सुनवाई से पहले ही निर्विरोध नतीजा घोषित हुआ।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन विवाद सामने आया।
  • मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया गया।
  • कांग्रेस ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
  • मामला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तक पहुंचा।
  • सिंघवी ने आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर टिप्पणी की।

जानबूझकर चुप्पी साधी

अभिषेक मनु सिंघवी ने नटराजन चुनाव रद्द करने के मामले में सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार चुनाव आयोग ने जानबूझकर फैसला न लेने की रणनीति अपनाई। इससे एकतरफा चुनावी नतीजा घोषित हो सका। उन्होंने संविधान निर्माताओं को याद करते हुए कहा कि बाबासाहेब आंबेडकर और संविधान के निर्माता केवल नियमों का मसौदा तैयार कर सकते थे। वे संवैधानिक संस्थाओं के भीतर वस्तुनिष्ठता और स्वतंत्रता की भावना नहीं भर सकते थे।



क्या हुआ था 8 से 11 जून के बीच

सिंघवी ने सोशल मीडिया पर तारीखों का पूरा हिसाब पेश किया। 8 जून कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की आखिरी तारीख थी। अगले ही दिन 9 जून को रिटर्निंग ऑफिसर (RO – Returning Officer) ने उनका नामांकन रद्द कर दिया। 10 जून को कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखी। आयोग ने सुना, लेकिन कोई टिप्पणी या आदेश नहीं दिया। 11 जून नाम वापसी की आखिरी तारीख थी।



आयोग ने SC का इंतजार नहीं किया

यह मामला 12 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। लेकिन उससे एक दिन पहले ही 11 जून की शाम चुनाव आयोग ने इस सीट पर निर्विरोध चुनाव का परिणाम घोषित कर दिया। सिंघवी का आरोप है कि आयोग ने न कोई अंतिम फैसला दिया, न RO के आदेश को पलटा और न ही सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का इंतजार किया। बिना किसी लिखित आदेश के नतीजा घोषित हो गया।



राजनीतिक गलियारों में गर्माई बहस

सिंघवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाता रहा है। इस ट्वीट के बाद MP राज्यसभा चुनाव विवाद एक बड़ी राजनीतिक बहस बन गया है। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



क्या है पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत बीजेपी के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी नटराजन हैदराबाद की अदालत में लंबित निजी मामले में आरोपी नंबर चार हैं। आरोप के अनुसार उन्होंने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म 26 हलफनामे में यह जानकारी छिपाई। इसके बाद विधानसभा के प्रमुख सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने नामांकन खारिज कर दिया। नामांकन खारिज होने के बाद बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। इनमें तरुण चुघ रजनीश अग्रवाल और महेश केवट शामिल हैं।



कांग्रेस ने अगला कदम तय किया

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने अगला कदम तय किया है। पार्टी अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इलेक्शन पिटीशन दायर करने की तैयारी में है। आरपी एक्ट की धारा 80 के तहत चुनाव परिणाम को चुनौती दी जा सकती है। यह चुनाव को चुनौती देने का वैधानिक रास्ता है। यदि हाई कोर्ट में यह साबित होता है कि नामांकन गलत तरीके से खारिज हुआ था। तब धारा 100(1)(c) के तहत निर्वाचन शून्य घोषित हो सकता है। इधर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है।



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