OMG! पिता से था इतना प्यार, बेटी ने चार साल फ्रीजर में रखा पिता का शव; फिर ऐसे खुला राज, जानें मामला
समझें क्या है पूरा मामला
- मलाड की एक बिल्डिंग के बंद क्लिनिक से रोज बदबू बढ़ रही थी।
- पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया और गेट खुलते ही शव दिखा।
- शव 80 साल के बुजुर्ग का था और फ्रीजर में रखा था।
- जांच में पता चला कि उनकी मौत जून 2022 में हुई थी।
- परिवार शव को अमेरिका के क्रायोनिक्स सेंटर ले जाना चाहता था।
बंद गेट के पीछे क्या मिला?
बिल्डिंग के बाहर 'Daycare centre. Opening shortly' लिखा साइनबोर्ड लगा था। उसके नीचे मेटल का गेट बंद था। किसी का अंदर आना-जाना मुमकिन नहीं था।
लेकिन अंदर से आती बदबू हर दिन बढ़ती जा रही थी। साइनबोर्ड कह रहा था कि डे-केयर सेंटर जल्द खुलेगा। अंदर की हकीकत बिल्कुल अलग थी।
पड़ोसियों में उत्सुकता बढ़ी। बदबू असहनीय हुई, तो उन्होंने पुलिस को बुलाया। गेट खुलते ही अंदर एक लाश मिली। यही बात इसे मुंबई क्राइम न्यूज का चौंकाने वाला मामला बनाती है।
सोमवार की रात कुरार पुलिस पॉलीक्लिनिक पहुंची। वहां एक फ्रीजर में बुजुर्ग का शव रखा मिला। क्लिनिक पिछले एक महीने से मरम्मत के काम की वजह से बंद पड़ा था। चार साल तक स्थानीय पुलिस को कोई खबर नहीं थी।
मौत कब हुई, परिवार ने क्या किया?
जांच में पता चला कि बुजुर्ग की मौत हार्ट अटैक (दिल का दौरा) से हुई। यह जून 2022 की बात है। तब से चार साल बीत चुके हैं। मृतक की बेटी अपने पिता को अपने करीब रखना चाहती थी। उसने अंतिम संस्कार करने के बजाय शव को सुरक्षित रखने का फैसला किया।
महिला ने इसके लिए विदेश की एक कंपनी की मदद ली। इस तरह फ्रीजर में पिता का शव पूरे चार साल रखा रहा। परिवार ने यह बात स्थानीय पुलिस को नहीं बताई।
क्रायोनिक्स सेंटर क्या होता है?
रिपोर्ट के मुताबिक परिवार ने पुलिस को अपनी योजना बताई। वे शव को अमेरिका के एक क्रायोनिक्स सेंटर ले जाना चाहते थे। ऐसे सेंटर में शव को बहुत कम तापमान पर रखा जाता है। मकसद था कि शव ज्यादा से ज्यादा वक्त तक सुरक्षित रहे।
परिवार ने ऐसी ही एक संस्था से बातचीत शुरू की थी। उन्होंने जानना चाहा कि शव अमेरिका ले जाया जा सकता है या नहीं। भारत में वकीलों से भी सलाह ली गई। सवाल था कि भारत में शव को इस तरह रखना कानूनी है या नहीं।
पुलिस को कैसे पता चला?
पुलिस को इस घटना की जानकारी सोमवार रात स्थानीय लोगों से ही मिली। यानी पुलिस तक खबर परिवार या क्लिनिक से नहीं पहुंची। न क्लिनिक मैनेजमेंट ने और न परिवार ने स्थानीय पुलिस को बताया था। इस बीच शव क्लिनिक में ही रखा रहा।
सूचना मिलते ही कुरार पुलिस ने बुजुर्ग के परिवार से संपर्क किया। परिवार में उनकी बुजुर्ग पत्नी और बालिग बच्चे शामिल हैं। पुलिस अब मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
मंगलवार को किसके बयान दर्ज हुए?
पुलिस ने मंगलवार को परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए। क्लिनिक मैनेजमेंट और प्रॉपर्टी के मालिक के बयान भी लिए गए। इन बयानों से पुलिस पूरी कड़ी समझना चाहती है।
क्या शव को ऐसे रखना कानूनी है?
पुलिस इस सवाल पर विशेषज्ञों से सलाह ले रही है। पुलिस खुद इस मामले से हैरान है। पुलिस देख रही है कि शव को ऐसे रखना कानूनी रूप से सही है या नहीं। इस पर अभी कोई अंतिम राय सामने नहीं आई है।
Mumbai police ने अभी कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया है। शव के अंतिम संस्कार पर भी कोई फैसला नहीं हुआ है। क्लिनिक पर पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
आगे क्या होगा इस मामले में?
इस Mumbai news का अगला मोड़ विशेषज्ञों की सलाह पर टिका है। पुलिस को तय करना है कि कानून के हिसाब से अगला कदम क्या हो। फिलहाल वह विशेषज्ञों की राय का इंतजार कर रही है। परिवार ने भी इसी सवाल पर भारत में वकीलों से सलाह ली थी।
FAQ
- मुंबई मलाड मामले में शव कितने साल फ्रीजर में रखा रहा?
शव करीब चार साल फ्रीजर में रखा रहा। 80 साल के बुजुर्ग की मौत जून 2022 में हुई थी। पुलिस को सोमवार रात इसका पता चला। - परिवार शव को क्यों रखना चाहता था?
परिवार ने पुलिस को बताया कि वे शव को अमेरिका के क्रायोनिक्स सेंटर ले जाना चाहते थे। मकसद शव को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक सुरक्षित रखना था। यह बात TOI की रिपोर्ट में कही गई है। - क्या पुलिस ने केस दर्ज किया है?
अभी नहीं। पुलिस ने कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया है। वह शव को इस तरह रखने की वैधता पर विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।