टोल टैक्स पर बड़ा फैसला, नए हाईवे पर 60 km से पहले नहीं लगेगा टोल
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार ने 24 जून को नई एसओपी जारी की है।
- नए हाईवे पर 60 किलोमीटर से पहले टोल बूथ नहीं बनेगा।
- अभी देश में 130 जगह 60 km के भीतर दोहरा टोल वसूला जाता है।
- नियम तोड़ने के लिए पहले टोल कमेटी से अनुमति लेनी होगी।
- एनएचएआई की अध्यक्षता में हाई लेवल कमेटी निगरानी करेगी।
60 km से पहले नहीं लगेगा टोल
देश में हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब नए बनने वाले हाईवे पर 60 किलोमीटर से पहले कोई टोल बूथ नहीं बनाया जाएगा। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने 24 जून को इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (Standard Operating Procedure) यानी एसओपी जारी कर दी है।
अभी क्या है हालत?
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (नेशनल हाइवे पर टोल टैक्स) पर गाजियाबाद के छिजारसी टोल प्लाजा और एक्सप्रेसवे के एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स के बीच की दूरी बेहद कम है। स्थानीय लोग इस पर लंबे समय से विरोध जताते आए हैं। इसी तरह अंबाला-चंडीगढ़ रूट (NH-152 और NH-44) पर भी कम दूरी में कई टोल मौजूद हैं।
क्या कहती है नई SOP?
नई एसओपी के मुताबिक अगर कोई निर्माण कंपनी या ठेकेदार 60 किलोमीटर से कम दूरी पर Toll plaza बनाना चाहता है, तो उसे पहले टोल कमेटी से विशेष अनुमति लेनी होगी। यह अनुमति सड़क निर्माण शुरू (Highway toll) होने से पहले ही लेनी होगी। इसके अलावा अगर टोल प्लाजा किसी शहर की सीमा से 10 किलोमीटर के भीतर बनाना हो, तब भी यही नियम लागू होगा।
नई एसओपी यह भी कहती है कि हाईवे का निर्माण 95 फीसद पूरा होने से पहले टोल टैक्स की अधिसूचना हर हाल में जारी हो जानी चाहिए। नियमों में कोई भी छूट देने से पहले कंपनियों को एडवांस्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म (Advanced Digital Platform) और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना जरूरी होगा।
कौन करेगा निगरानी?
इस एसओपी को लागू करवाने के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। इसकी अध्यक्षता नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAIके सदस्य (कमर्शियल ऑपरेशन) करेंगे। कमेटी में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालयके अपर सचिव, संयुक्त सचिव (टोल) और एनएचआईडीसीएल (National Highways and Infrastructure Development Corporation Limited) के एमडी (MD) समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यानी अब टोल बूथ की जगह तय करने का फैसला सिर्फ कंपनी नहीं, एक पूरी कमेटी करेगी।
दिल्ली में भी टोल पर सख्ती
इस बीच राजधानी दिल्ली में भी टोल नाकों पर अलग तरह की सख्ती आने वाली है। दिल्ली नगर निगम यानी एमसीडी ने टोल नाकों के नए उपनियम तैयार किए हैं। इस प्रस्ताव को गुरुवार को सदन से मंजूरी मिल गई। अब इसे दिल्ली सरकार के पास भेजा जाएगा। मंजूरी के बाद नियम तोड़ने वालों को ई-नोटिस जारी किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि राज्य सरकार जल्द इस पर अधिसूचना जारी कर देगी।
पारदर्शिता की राह पर कदम
नई एसओपी से हाईवे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। अब तक ठेकेदार अपनी सुविधा के हिसाब से टोल प्लाजा की जगह तय कर लेते थे। इससे यात्रियों पर अनावश्यक बोझ पड़ता था। नई व्यवस्था में हर फैसले पर कमेटी की नजर रहेगी। यह बदलाव छोटा दिखता है लेकिन रोजाना लाखों वाहन चालकों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
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