क्या है सरकार का नया फैसला, जिसने उड़ा दी एआई से फेक वीडियो बनाने वालों की नींद?

Kaushiki | Aug 07, 2026, 13:10 IST
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सरकार ने एआई से बने फर्जी फोटो-वीडियो को रोकने के लिए नए आईटी नियम 2026 लागू कर दिए हैं। अब टेक कंपनियों को आदेश मिलने के 3 घंटे में गैर-कानूनी डीपफेक कंटेंट हटाना होगा। नियम न मानने पर कंपनियों पर सीधा केस दर्ज हो सकता है।

AI Deepfake Action: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लोग एआई की मदद से किसी की भी फर्जी फोटो बना लेते हैं। फर्जी वीडियो और आवाज तैयार करना भी अब बहुत आसान हो गया है। इस फर्जी कंटेंट यानी Deepfake से लोग धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं।



सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर मासूम लोगों को बदनाम किया जा रहा है। इसी बड़े खतरे को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) ने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं।



यह नए IT रूल्स 10 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो गए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दी गई है। फर्जी कंटेंट फैलाने वालों पर अब सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



New IT Rules 2026


AI कंटेंट पर लेबल लगाना हुआ जरूरी

नए नियमों के मुताबिक, अब AI से बने कंटेंट को छिपाना मुमकिन नहीं होगा। अगर कोई यूजर एआई से फोटो, वीडियो या ऑडियो तैयार करता है, तो प्लेटफॉर्म को उस पर साफ लेबल लगाना जरूरी होगा। इससे आम यूजर्स को तुरंत पता चल जाएगा कि कंटेंट फर्जी है या असली।



इसके साथ ही डिजिटल डेटा यानी मेटा डाटा भी संभाल कर रखना पड़ेगा। इस मेटाडेटा की मदद से कंटेंट बनाने वाले की तुरंत पहचान हो सकेगी। इस कदम का मुख्य मकसद आम लोगों को ऑनलाइन धोखे से बचाना है। अब कोई भी एआई का गलत इस्तेमाल करके दूसरों को बेवकूफ नहीं बना पाएगा।



36 घंटे नहीं, 3 घंटे में होगी कार्रवाई

सरकार ने सबसे बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव कंटेंट हटाने की समय-सीमा में किया है। पहले किसी सरकारी आदेश के बाद कंटेंट हटाने के लिए 36 घंटे मिलते थे। अब कंपनियों को केवल तीन घंटे के भीतर फर्जी कंटेंट हटाना ही पड़ेगा।



शिकायतों के निपटारे की समय-सीमा को भी काफी हद तक घटा दिया गया है। ऑब्सेनिटी (Obscenity) और निजी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल पर तुरंत ऐक्शन लिया जाएगा। किसी का भेष बदलकर धोखा देने वाले मामलों में सिर्फ दो घंटे में कार्रवाई होगी। इस तेज प्रक्रिया से पीड़ितों को बहुत जल्द राहत मिल सकेगी।



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किन AI कंटेंट पर रहेगी सरकार की नजर

सरकार ने साफ कर दिया है कि गलत इरादे से बना एआई कंटेंट बर्दाश्त नहीं होगा। किसी व्यक्ति की फर्जी पहचान बनाने पर तुरंत बैन लगा दिया जाएगा। बिना इजाजत किसी की प्राइवेट फोटो या वीडियो पोस्ट करना बड़ा अपराध है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।



मिसलीडिंग न्यूज और देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाले वीडियो पर तुरंत ऐक्शन होगा। सोशल मीडिया कंपनियों को ऑटोमैटेड टूल्स का यूज करने के निर्देश दिए गए हैं। ये टूल्स फर्जी कंटेंट को अपलोड होने से पहले ही सिस्टम में रोक देंगे।



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नियम न मानने पर टेक कंपनियों का क्या होगा

अगर कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन सख्त नियमों का पालन नहीं करता है। तो उसे IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर (Safe Harbour) हट जाएगा। सेफ हार्बर हटने का मतलब है कि कंपनी अपनी कानूनी सुरक्षा पूरी तरह खो देगी।



इसके बाद किसी भी फर्जी पोस्ट के लिए कंपनी को जिम्मेदार माना जाएगा। विक्टिम या सरकार सीधे उस सोशल मीडिया कंपनी पर केस दर्ज करा सकती है।



कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ सीधे आपराधिक मामले दर्ज किए जा सकते हैं। इस नियम से सभी टेक कंपनियों पर नियमों को मानने का बड़ा दबाव रहेगा। क्या है डीपफेक टेक्नॉलोजी



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अगर आप Deepfake का शिकार हों तो क्या करें

अगर किसी ने आपकी फर्जी फोटो या डीपफेक वीडियो (Deepfake Content) सोशल मीडिया पर डाल दी है। तो सबसे पहले उस सोशल मीडिया ऐप पर तुरंत शिकायत रिपोर्ट दर्ज करें। अगर प्लेटफॉर्म आपकी बात नहीं सुनता है तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।



आप सीधे Grievance Appellate Committee (GAC) के पोर्टल पर ऑनलाइन अपील कर सकते हैं। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।



आप नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके मदद मांग सकते हैं। गंभीर मामलों में आप नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर भी दर्ज करा सकते हैं।



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रिसर्च और इंडिया AI मिशन का रोल

सरकार का मेन मकसद एआई की तकनीक को रोकना बिल्कुल भी नहीं है। सरकार चाहती है कि लोग इस नई तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित तरीके से करें। इसी सोच के साथ सरकार IndiaAI Mission पर बहुत तेजी से काम कर रही है।



IIT जोधपुर, IIT मद्रास और IIT खड़गपुर जैसे बड़े संस्थानों को जिम्मेदारी दी गई है। ये संस्थान डीपफेक और फर्जी वीडियो को तुरंत पकड़ने वाले टूल्स बना रहे हैं। भविष्य में ऐसी तकनीक आएगी जो फर्जी एआई कंटेंट को सेकंडों में पहचान लेगी। इससे इंटरनेट की दुनिया आम लोगों के लिए बहुत सुरक्षित बन जाएगी।



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आम लोगों के लिए इस नए फैसले का क्या मतलब

अब जब भी आप इंस्टाग्राम, यूट्यूब या फेसबुक पर कोई वीडियो देखें। तो किसी भी सनसनीखेज फोटो या ऑडियो पर तुरंत आंख बंद करके भरोसा न करें। आने वाले दिनों में हर एआई वीडियो पर आपको साफ लेबल दिखाई देगा। अगर कोई फर्जी वीडियो (IT Rules) फैलेगा तो सरकार उसे तीन घंटे में हटवा देगी।



इससे ऑनलाइन फ्रॉड, ब्लैकमेलिंग और झूठी अफवाहों पर तुरंत लगाम लग सकेगी। आम नागरिक अब बिना किसी डर के इंटरनेट का सुरक्षित इस्तेमाल कर पाएंगे। यह नया आईटी नियम भारतीय डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।



FAQ

  1. नए आईटी नियम 2026 के अनुसार डीपफेक कंटेंट कितनी देर में हटाना होगा?
    नए आईटी नियम 2026 के मुताबिक, कोर्ट या सरकार का आदेश मिलने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को केवल 3 घंटे के भीतर गैर-कानूनी एआई डीपफेक कंटेंट हटाना अनिवार्य है।
  2. यदि सोशल मीडिया कंपनियां नए आईटी नियमों का पालन नहीं करती हैं तो क्या होगा?
    नियम न मानने पर कंपनियों को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली 'सेफ हार्बर' सुरक्षा समाप्त हो जाएगी और उनके खिलाफ सीधे आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा।
  3. डीपफेक या साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर कहां शिकायत दर्ज कराएं?
    पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत कर सकता है या तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके सहायता ले सकता है।

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