बीजेपी की बंगाल जीत पर क्या बोला मीडिया? किसी ने झालमुड़ी पर फोकस किया तो कोई बोला अबकी बार गंगा पार...
जैसे ही बंगाल के नतीजे आने शुरू हुए, पूरा नेशनल और इंटरनेशनल मीडिया एक साथ हिल गया। किसी ने इसे ऐतिहासिक कहा, किसी ने अभूतपूर्व। कुछ ने इसे बीजेपी की मजबूत जमीन तैयार करने और आक्रामक राजनीति का नतीजा माना, तो कुछ ने इसे सत्ता परिवर्तन की बड़ी पटकथा बताया।
कहीं बीजेपी की सुनामी आई, कहीं वापसी की आवाजें सुनाई दीं। पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने धमाकेदार जीत हासिल कर टीएमसी को करारी शिकस्त दी।
तमिलनाडु में थलपति विजय की टीवीके ने जादुई जीत के साथ धमाकेदार एंट्री की। असम में हिमंत बिस्वा सरमा ने हैट्रिक लगाई, जबकि केरल में कांग्रेस ने वापसी की। पुडुचेरी में एनडीए ने सत्ता बरकरार रखी।
बंगाल की बात
अब बात बंगाल (पश्चिम बंगाल चुनाव 2026) की करें तो बीजेपी ने यहां ऐसा प्रदर्शन किया कि ममता बनर्जी की टीएमसी पूरी तरह हार गई।
बीजेपी की इस जीत को सिर्फ सीटों के आंकड़ों से नहीं, बल्कि सत्ता के बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। बी
जेपी ने जमीनी रणनीति, संगठन और आक्रामक प्रचार के बल पर बंगाल की राजनीति का रुख बदल दिया।
बीजेपी ने 148 सीटों का बहुमत पार कर 206 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सिर्फ 81 सीटों तक सिमट गई।
नेशनल-इंटरनेशनल मीडिया की आंखों से बीजेपी की जीत
दैनिक भास्कर ने लिखा- छा गए बाबूमोशाय!
आजतक ने लिखा- अबकी बार, गंगा पार
पत्रिका ने बीजेपी की जीत को जीतमुड़ी का नाम दिया है।
प्रजातंत्र ने इसे SIR भाजपा का नाम दिया....
indian Express ने अपने स्पेशल पेज पर लिखा- नया सवेरा: प्रधानमंत्री ने 'बदला' नहीं, 'बदलाव' का आह्वान किया
The Telegraph ने लिखा- BJP's Bengal यानी बीजेपी का बंगाल
The Indian Express ने लिखा-
भाजपा की लहर ने ममता बनर्जी को डुबाया
विजय ने तमिल लहर का फायदा उठाया
Hindustan Times ने लिखा- ताकतवर क्षेत्रीय नेताओं का दौर खत्म होना
THE TIMES of india ने लिखा- BJP का मतलब बंगाल जनता पार्टी है
डिजिटल मीडिया के भी अलग-अलग रंग
रिपब्लिक वर्ल्ड ने इसे Bengal Turns Saffron यानी बंगाल भगवा हुआ, इस तरह की हेडलाइन से कवर किया। DD News ने सीधे कहा कि BJP ने TMC का गढ़ तोड़ा, निर्णायक जीत की ओर।
इंटरनेशनल मीडिया ने क्या कहा, सवाल भी उठे
Reuters ने लिखा कि बीजेपी की इस जीत से UCC (समान नागरिक संहिता) और बुनियादी ढांचे जैसी नीतियों को और गति मिल सकती है। 2029 के आम चुनाव के लिहाज से भी यह बड़ी खबर है।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर BBC ने अपनी खबर का शीर्षक दिया है - मोदी की बीजेपी ने भारत के सबसे मुश्किल राजनीतिक गढ़ों में से एक, बंगाल पर जीत हासिल की।"
NPR (अमेरिका) ने कहा है कि इस नतीजे से मोदी की स्थिति और मजबूत होगी, खासकर उनके तीसरे कार्यकाल के बीच। 2024 के आम चुनाव में उन्हें गठबंधन पर निर्भर रहना पड़ा था, लेकिन अब चीजें बदल रही हैं।
Al Jazeera ने इस जीत को 'वर्चस्व की राजनीति' यानी Hegemonic Power बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी ने धार्मिक ध्रुवीकरण और सत्ता विरोधी लहर का सही इस्तेमाल करके यह जीत हासिल की।
Al Jazeera ने ये भी बताया कि मतदाता सूची में संशोधन (SIR) के चलते करीब 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। विपक्ष का कहना है कि इनमें ज्यादातर उनके समर्थकों के नाम थे, लेकिन चुनाव आयोग का कहना है कि ये सब नियमों के हिसाब से किया गया था।
पड़ोसी बांग्लादेश में हलचल मच गई!
बांग्लादेश के अखबार 'प्रथम आलो' ने लिखा कि यह चुनाव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं, बल्कि भारतीय गणतंत्र के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। वहां का मीडिया बीजेपी के चुनाव प्रचार में मुस्लिम मुद्दे के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाता रहा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में यह नतीजा (vidhansabha election 2026) आने वाले वर्षों में देश की राजनीति का रुख तय कर सकता है। बीजेपी के लिए (बंगाल चुनाव परिणाम) यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक संदेश है।
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