बंगाल से केरल तक कैसे बदल रही है देश की राजनीति
The Sootr | May 05, 2026, 13:59 IST
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पश्चिम बंगाल, असम और दक्षिण भारत के चुनावी नतीजों ने देश की राजनीति का चेहरा बदल दिया है। जानिए कैसे भाजपा का बढ़ता प्रभाव और क्षेत्रीय दलों की चुनौतियां भारत के भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।
भारत के भविष्य में सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर के विकास पर खास ध्यान देना जरूरी है। भाजपा की आज की जीत, खासकर पश्चिम बंगाल में, राजनीति और सत्ता के खेल को पूरी तरह बदलने वाली है।
अभी की स्थिति ये है कि भाजपा और एनडीए भारत के 72% इलाके और लगभग 78% लोगों पर शासन कर रहे हैं। ये साफ दिख रहा है कि कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटका जैसी जगहें एनडीए को गंवा रही है।
एनडीए को पंजाब में अभी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सभी क्षेत्रीय दलों द्वारा अनदेखा किया जा रहा सबसे महत्वपूर्ण कारक यह है कि गांधी परिवार और कांग्रेस राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दो-दलीय प्रणाली चाहते हैं।
इसलिए वे क्षेत्रीय दलों को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रहे हैं। साथ ही राज्य चुनावों में अपने इंडी गठबंधन के सहयोगियों पर हमला कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस हर राज्य में कमजोर हो रही है, लेकिन उनकी आशावादी सोच का सभी क्षेत्रीय दलों को मूल्यांकन करना चाहिए।
क्षेत्रीय दलों को इस मुद्दे की जांच करनी चाहिए और कांग्रेस के बिना एक नया गठबंधन बनाना चाहिए। कांग्रेस का क्षेत्रीय दलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
भारत में कम्युनिस्ट सरकार के पतन से सभी क्षेत्रों में हमारे विकास पर चीनी प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी। आइए आज चार राज्यों के परिणामों का विश्लेषण करें।
हिंदू मातृशक्ति ने यह साबित कर दिया कि उनके वोट को पैसों के लेन-देन से प्रभावित नहीं किया जा सकता है। महिलाओं ने राष्ट्र की सुरक्षा, राष्ट्र निर्माण और मातृशक्ति की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
बंगाल की भयावह स्थिति के बावजूद मतदान के प्रति उनकी दृढ़ता और प्रतिबद्धता संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। आज के परिणाम से यह सिद्ध होता है कि यदि मातृशक्ति कोई निर्णय ले ले, तो वह राज्य और राष्ट्र के हित में परिणाम की दिशा बदल सकती है।
भारत निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार ने राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाईं।
राज्य में सीआरपीएफ की तैनाती हिंसा और जबरदस्ती, हिंसक तरीकों और धमकियों के प्रयोग को कम करने में महत्वपूर्ण है। बंगाल के परिणाम भाजपा और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल करने का पूरा भरोसा दिलाएंगे।
2029 के आम चुनाव में एनडीए को दो-तिहाई सीटें जीतने का लाभ मिलेगा। बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित किया जाएगा। साथ ही घुसपैठियों को निर्वासित किया जाएगा। इससे ममता सरकार द्वारा किए गए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को उलट कर राज्य और राष्ट्र की रक्षा की जा सकेगी।
बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और रक्षा तंत्रों को तेजी से अपनाकर नाजुक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों का आपसी जुड़ाव और अधिक विकसित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार के उपायों के अनुरूप कानून व्यवस्था में सुधार होगा।
राज्य सभी मोर्चों पर प्रगति करेगा। टीएमसी प्रशासन के पक्षपातपूर्ण शासन के कारण हिंदुओं को भारी पीड़ा झेलनी पड़ी है। भाजपा सरकार अब संविधान के अनुसार हिंदुओं की रक्षा करेगी।
एम.के. स्टालिन की पार्टी डीएमके बुरी तरह हार गई है। इसका कारण यह है कि हिंदू भले ही मुखर न हों, लेकिन मतदान के समय वे अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हैं। उदयनिधि के सनातन धर्म के बारे में कहे गए घृणित शब्द सनातन धर्म को खत्म करने के उद्देश्य से हैं।
सनातन धर्म को बीमारी बताना एक बड़ी हार का कारण बना है। यह सभी पार्टियों के लिए एक चेतावनी है कि वे हिंदुओं को हल्के में नहीं ले सकते हैं। लाथ ही धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के बारे में अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। हिंदू धर्म पर हमले से अगला शिकार अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी है।
फिल्म अभिनेता जोसेफ विजय चंद्रशेखर (थलपति विजय) के नेतृत्व वाली टीवीके ने महत्वपूर्ण पैठ बनाई। साथ ही 100 से अधिक सीटें जीती हैं। यह दर्शाता है कि तमिल लोगों के लिए सिनेमा अभिनेता भगवान के समान हैं।
भले ही अभिनेता या अभिनेत्री राजनीतिक रूप से गलत हों। मुझे उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ स्टालिन पिता और पुत्र की तरह हिंदू विरोधी भावनाएं नहीं पालेंगे। स्टालिन शासन द्वारा हिंदुओं की संस्कृति पर लगातार हमले किए गए हैं।
मुझे उम्मीद है कि जोसेफ हिंदुओं के खिलाफ ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देंगे। साथ ही संविधान का उल्लंघन करने वाले धर्मांतरण को रोकेंगे। बुद्धिजीवियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को उन लोगों की भावनाओं का आकलन करना चाहिए, जो किसी फिल्म हस्ती को बिना उसकी खूबियों पर विचार किए वोट देते हैं।
रेलकर्मी श्रीधरन और प्रतिभाशाली वकील उज्ज्वल निकम जैसे लोगों के लिए चुनाव जीतना मुश्किल होता है, जबकि फिल्म या खेल जगत की हस्तियों के लिए यह आसान होता है। आने वाले वर्षों में भाजपा निस्संदेह तमिलनाडु में अपनी मजबूत उपस्थिति स्थापित करेगी।
हिमंता बिस्व सरमा उन मुख्यमंत्रियों में से एक है, जिनके शासन मॉडल को अन्य राज्य मंत्रियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपनाना चाहिए। वे शासन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय है और राज्य को प्रभावी और कुशल तरीके से चलाने के लिए कदम उठाते हैं।
सत्ता-विरोधी अभियान उनके अथक परिश्रम और समाज के सभी वर्गों से जुड़ाव के कारण सत्ता-समर्थक अभियान में बदल गया है। लगातार दो कार्यकाल तक सत्ता में रहने के बाद 126 में से 102 सीटें जीतना वास्तव में राज्य की जनता के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
घुसपैठियों को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उनके द्वारा बनाए गए सशक्त कानून और जमीनी स्तर पर किए गए उनके प्रयास राज्य और राष्ट्र को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाने में सहायक होंगे। उन्हें उचित कार्रवाई करने का अधिक अधिकार प्राप्त होगा।
कम्युनिस्टों का आखिरी गढ़ भी ढह गया है। चीन को बढ़ावा देने वाली मानसिकता ने लगभग 35 वर्षों तक पश्चिम बंगाल और कई वर्षों तक केरल को नुकसान पहुंचाया है। उनके हिंदू-विरोधी अभियान और धर्मांतरण के समर्थन ने जनसांख्यिकी को बदल दिया है।
जिसके परिणाम स्वरूप मुस्लिम और ईसाई आबादी में तेजी से वृद्धि हुई। जिन लोगों का ब्रेनवॉश किया गया है, उनमें कम्युनिज्म के प्रति प्रबल झुकाव है। इस तथ्य के बावजूद कि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ है।
भाजपा के लिए विधानसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल करना बेहद मुश्किल है। हालांकि तीन सीटें जीतने से विधानसभा को अगले दस वर्षों में परिस्थितियों को बदलने का रास्ता मिल गया है। अगर बंगाल दस वर्षों में तीन से 200 सीटों तक पहुंच सकता है तो केरल और तमिलनाडु क्यों नहीं?
सभी राज्यों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि लोकतंत्र, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और प्रशासन में मतदाताओं के विश्वास को दर्शाती है। यह लोकतंत्र और संविधान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अधिक मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि कुछ दलों की वोट बैंक की राजनीति कमजोर पड़ेगी। दलों को वोट बैंक की राजनीति को दरकिनार करते हुए हर मतदाता को महत्वपूर्ण मानना होगा। सभी विजेताओं को बधाई।
लेखक: पंकज जगन्नाथ जयस्वाल का यह लेख पांचजन्य पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है
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अभी की स्थिति ये है कि भाजपा और एनडीए भारत के 72% इलाके और लगभग 78% लोगों पर शासन कर रहे हैं। ये साफ दिख रहा है कि कांग्रेस हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटका जैसी जगहें एनडीए को गंवा रही है।
एनडीए को पंजाब में अभी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सभी क्षेत्रीय दलों द्वारा अनदेखा किया जा रहा सबसे महत्वपूर्ण कारक यह है कि गांधी परिवार और कांग्रेस राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दो-दलीय प्रणाली चाहते हैं।
इसलिए वे क्षेत्रीय दलों को व्यवस्थित रूप से कमजोर कर रहे हैं। साथ ही राज्य चुनावों में अपने इंडी गठबंधन के सहयोगियों पर हमला कर रहे हैं। हालांकि कांग्रेस हर राज्य में कमजोर हो रही है, लेकिन उनकी आशावादी सोच का सभी क्षेत्रीय दलों को मूल्यांकन करना चाहिए।
क्षेत्रीय दलों को इस मुद्दे की जांच करनी चाहिए और कांग्रेस के बिना एक नया गठबंधन बनाना चाहिए। कांग्रेस का क्षेत्रीय दलों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
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पश्चिम बंगाल
बंगाल की भयावह स्थिति के बावजूद मतदान के प्रति उनकी दृढ़ता और प्रतिबद्धता संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है। आज के परिणाम से यह सिद्ध होता है कि यदि मातृशक्ति कोई निर्णय ले ले, तो वह राज्य और राष्ट्र के हित में परिणाम की दिशा बदल सकती है।
भारत निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और केंद्र सरकार ने राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाईं।
राज्य में सीआरपीएफ की तैनाती हिंसा और जबरदस्ती, हिंसक तरीकों और धमकियों के प्रयोग को कम करने में महत्वपूर्ण है। बंगाल के परिणाम भाजपा और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल करने का पूरा भरोसा दिलाएंगे।
2029 के आम चुनाव में एनडीए को दो-तिहाई सीटें जीतने का लाभ मिलेगा। बांग्लादेश सीमा को सुरक्षित किया जाएगा। साथ ही घुसपैठियों को निर्वासित किया जाएगा। इससे ममता सरकार द्वारा किए गए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों को उलट कर राज्य और राष्ट्र की रक्षा की जा सकेगी।
बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और रक्षा तंत्रों को तेजी से अपनाकर नाजुक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों का आपसी जुड़ाव और अधिक विकसित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार के उपायों के अनुरूप कानून व्यवस्था में सुधार होगा।
राज्य सभी मोर्चों पर प्रगति करेगा। टीएमसी प्रशासन के पक्षपातपूर्ण शासन के कारण हिंदुओं को भारी पीड़ा झेलनी पड़ी है। भाजपा सरकार अब संविधान के अनुसार हिंदुओं की रक्षा करेगी।
तमिलनाडु
सनातन धर्म को बीमारी बताना एक बड़ी हार का कारण बना है। यह सभी पार्टियों के लिए एक चेतावनी है कि वे हिंदुओं को हल्के में नहीं ले सकते हैं। लाथ ही धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के बारे में अपमानजनक टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। हिंदू धर्म पर हमले से अगला शिकार अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी है।
फिल्म अभिनेता जोसेफ विजय चंद्रशेखर (थलपति विजय) के नेतृत्व वाली टीवीके ने महत्वपूर्ण पैठ बनाई। साथ ही 100 से अधिक सीटें जीती हैं। यह दर्शाता है कि तमिल लोगों के लिए सिनेमा अभिनेता भगवान के समान हैं।
भले ही अभिनेता या अभिनेत्री राजनीतिक रूप से गलत हों। मुझे उम्मीद है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में जोसेफ स्टालिन पिता और पुत्र की तरह हिंदू विरोधी भावनाएं नहीं पालेंगे। स्टालिन शासन द्वारा हिंदुओं की संस्कृति पर लगातार हमले किए गए हैं।
मुझे उम्मीद है कि जोसेफ हिंदुओं के खिलाफ ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं देंगे। साथ ही संविधान का उल्लंघन करने वाले धर्मांतरण को रोकेंगे। बुद्धिजीवियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों को उन लोगों की भावनाओं का आकलन करना चाहिए, जो किसी फिल्म हस्ती को बिना उसकी खूबियों पर विचार किए वोट देते हैं।
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केरल
जिसके परिणाम स्वरूप मुस्लिम और ईसाई आबादी में तेजी से वृद्धि हुई। जिन लोगों का ब्रेनवॉश किया गया है, उनमें कम्युनिज्म के प्रति प्रबल झुकाव है। इस तथ्य के बावजूद कि इससे उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ है।
भाजपा के लिए विधानसभा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व हासिल करना बेहद मुश्किल है। हालांकि तीन सीटें जीतने से विधानसभा को अगले दस वर्षों में परिस्थितियों को बदलने का रास्ता मिल गया है। अगर बंगाल दस वर्षों में तीन से 200 सीटों तक पहुंच सकता है तो केरल और तमिलनाडु क्यों नहीं?
सभी राज्यों में मतदान प्रतिशत में वृद्धि लोकतंत्र, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और प्रशासन में मतदाताओं के विश्वास को दर्शाती है। यह लोकतंत्र और संविधान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
अधिक मतदान प्रतिशत यह संकेत देता है कि कुछ दलों की वोट बैंक की राजनीति कमजोर पड़ेगी। दलों को वोट बैंक की राजनीति को दरकिनार करते हुए हर मतदाता को महत्वपूर्ण मानना होगा। सभी विजेताओं को बधाई।
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