बार-बार चुनाव से मिलेगा छुटकारा! सरकार एक देश-एक चुनाव रणनीति पर कर रही विचार
Aman Vaishnav | May 31, 2026, 13:37 IST
one nation one election two phase transition model
एक देश-एक चुनाव को लेकर एक बड़ी खबर आई है। सरकार 2029 और 2034 के टू-फेज मॉडल पर विचार कर रही है। इससे राज्यों में बार-बार चुनाव का झंझट खत्म हो जाएगा।
समझें क्या है पूरा मामला...
- केंद्र सरकार एक देश एक चुनावलागू करने के लिए आसान और सुरक्षित कानूनी रास्ता खोज रही है।
- 39 सदस्यों की संयुक्त संसदीय समिति टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल पर विचार कर रही है।
- इस नए मॉडल के आने से राज्यों में बार-बार चुनाव कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- एक साथ चुनाव कराने के लिए दो चरणों में काम करने के विकल्प को अच्छा माना जा रहा है।
- पहले चरण के तहत साल लोकसभा चुनाव के साथ ही 20 राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
दो चरणों में चुनाव कराने की तैयारी
बाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति से जुड़े सूत्रों ने एक जानकारी दी है। समिति अभी टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल पर विचार कर रही है।
इससे राज्यों में बार-बार चुनाव कराने की नौबत नहीं आएगी। इसके साथ ही किसी भी राज्य की विधानसभा के कार्यकाल को बहुत ज्यादा छोटा भी न करना पड़े।
जानकारी के अनुसार पूरे देश को एक ही चुनावी चक्र में लाने के लिए दो चरणों में आगे बढ़ना सबसे आसान रास्ता लग रहा है। जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी) का समय साल 2026 के मानसून सत्र तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
अभी यह समिति अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रही है। साथ ही वहां के जनप्रतिनिधियों, एक्सपर्ट्स और बाकी लोगों से बातचीत करके उनकी राय ले रही है।
माना जा रहा है कि साल 2029 से चुनावी चक्र को एक करने का काम शुरू हो सकता है। साल 2034 तक पूरे देश को एक ही चुनावी कैलेंडर में ले आया जाएगा।
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पहले चरण (2029) में क्या होगा?
आपके राज्य पर क्या असर पड़ेगा?
- 2028 के चुनाव चक्र वाले राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, त्रिपुरा, तेलंगाना, मेघालय, नगालैंड और मिजोरम। साल 2029 में एक साथ चुनाव कराने के लिए इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 महीने से लेकर एक साल तक बढ़ाना पड़ सकता है।
- 2029 के चुनाव चक्र वाले राज्य: आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम, हरियाणा, महाराष्ट्र और झारखंड। इन राज्यों में कोई बदलाव नहीं होगा। इनका चुनाव चक्र पहले से ही 2029 के लोकसभा चुनाव के बहुत करीब है।
- 2030-2031 के चुनाव चक्र वाले राज्य: बिहार, दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी। साल 2029 में चुनाव कराने के लिए इनके कार्यकाल में 1 से 2 साल की कटौती करनी पड़ेगी। इसीलिए जनता की सुविधा को देखते हुए इन राज्यों में साल 2034 में चुनाव कराने का विचार है।
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संविधान क्या कहता है ?
यदि किसी विधानसभा का कार्यकाल पूरा नहीं भी हुआ है, तो उसे मंत्रिमंडल की सिफारिश पर समय से पहले भंग किया जा सकता है । साथ ही वहां दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं।
इसके अलावा खास हालातों में चुनाव के समय को बदलने के लिए भी संवैधानिक विकल्प उपलब्ध हैं। हमारे देश में पहले भी विधानसभाओं के कार्यकाल में बदलाव करने के उदाहरण देखने को मिले हैं।
आनंद पालीवाल के अनुसार सरकार चाहेगी कि इस बदलाव को लागू करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच एक आपसी सहमति बनाई जाए। राज्यों के अधिकारों और जनता के जनादेश का सम्मान करके ही कोई भी मॉडल लंबे समय तक टिक सकता है।
FAQ
- एक देश एक चुनाव क्या है?
एक देश, एक चुनाव का अर्थ पूरे भारत में लोकसभा (केंद्र सरकार) और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ एक ही समय सीमा या एक ही दिन कराना है। इसके लागू होने पर मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र में सांसद (MP) और विधायक (MLA) दोनों को चुनने के लिए एक ही समय पर वोट डाल सकेंगे।
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