संसद के मॉनसून सत्र में 12 बिल पास, सिर्फ एक पर चर्चा, किरेन रिजिजू ने खोली हंगामे की पोल
समझें क्या है पूरा मामला...
- संसद का मॉनसून सत्र हंगामे के बीच खत्म हो गया है।
- इस सत्र में कुल 12 बिल पास किए गए हैं।
- इनमें से सिर्फ एक बिल पर ही असली चर्चा हो सकी।
- संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
- लोकसभा में तय समय का सिर्फ 19 फीसदी काम हो पाया।
संसद का मॉनसून सत्र इस बार भी पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार बार स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष और सत्ता पक्ष के हंगामे के बीच सदन ठीक से चल ही नहीं पाया। गुरुवार, 13 अगस्त को भी सदन में यही नजारा देखने को मिला। आखिरकार दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। सत्र खत्म होने के बाद सरकार ने पूरे कामकाज का ब्योरा जनता के सामने रखा।
रिजिजू ने बताया पूरा हिसाब
मॉनसून सत्र खत्म होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि इस सत्र में कुल 12 बिल पास हुए हैं। वहीं, इनमें से सिर्फ एक बिल पर ही ठीक से चर्चा हो सकी। उनके मुताबिक बाकी 11 बिल बिना बहस के ही पास कर दिए गए। इन्हें हंगामे के बीच पेश किया गया और ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। रिजिजू ने इसे संसदीय लोकतंत्र के लिए सही नहीं बताया।
लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी काम
किरेन रिजिजू ने आंकड़ों के जरिए स्थिति साफ की। उनके मुताबिक लोकसभा में तय समय के मुकाबले सिर्फ 19 फीसदी काम हो सका। वहीं राज्यसभा में यह आंकड़ा 39 फीसदी रहा। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में विपक्षी पार्टियों ने हंगामा किया और वॉकआउट भी किया।
हालांकि उनके मुताबिक ज्यादातर एनडीए (National Democratic Alliance) सांसदों और कुछ विपक्षी सांसदों ने चर्चा में हिस्सा लिया। रिजिजू ने कहा कि कामकाज के लिहाज से यह सत्र सफल रहा, लेकिन चर्चा के मामले में उतना बेहतर नहीं रहा।
सिर्फ एक बिल पर हुई पूरी बहस
मंत्री के मुताबिक इस सत्र में सिर्फ एक विधेयक पर पूरी चर्चा हो पाई। यह बिल परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी रोकने से जुड़ा था। इस एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विस्तार से बहस हुई। यही एकमात्र बिल था जिस पर सांसदों ने खुलकर अपनी राय रखी। बाकी सभी बिल बिना चर्चा के ही पारित हो गए। इससे साफ है कि ज्यादातर कानून बिना बहस के ही बन गए।
विपक्ष पर लगाया चर्चा से भागने का आरोप
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सीधा निशाना साधा। उनका आरोप था कि विपक्ष ने सदन में चर्चा नहीं होने दी। उनके मुताबिक विपक्षी सांसदों ने चर्चा से बचने के लिए तरह तरह के बहाने बनाए। रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सांसद सिर्फ नारेबाजी के लिए संसद पहुंचे। उनका कहना था कि यह रवैया संसदीय लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नए सांसदों को अच्छी चर्चा का मौका ही नहीं मिल पाया।
सिर्फ 19 घंटे हुआ काम
सत्र से जुड़े आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। मॉनसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ था। इसके बाद से अब तक सिर्फ 19 घंटे ही कामकाज हो सका। लोकसभा में कम से कम 108 घंटे काम होना चाहिए था। इसके बावजूद सिर्फ 19 घंटे ही काम हुआ। यदि औसत निकाला जाए तो लोकसभा रोजाना सिर्फ 60 मिनट ही चल पाई। इतने कम समय में भी 12 बिल पास कर दिए गए।
हंगामे के बीच पास हुए ज्यादातर बिल
आंकड़ों से साफ है कि ज्यादातर बिल बिना चर्चा के ही पास हुए। कुल 12 बिल में से सिर्फ एक बिल पर ठीक से बहस हुई। बाकी 11 बिल पर न तो चर्चा हुई और न ही कोई बहस हुई। इन्हें सीधे हंगामे के बीच पेश किया गया। फिर ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। इस तरह की प्रक्रिया पर विपक्ष और विशेषज्ञ दोनों सवाल उठाते रहे हैं।
क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम
यह पूरा घटनाक्रम संसद की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। संसद में कानून बनाने से पहले चर्चा और बहस की परंपरा रही है। वहीं, इस सत्र में ज्यादातर बिल बिना बहस के ही पास हो गए। इससे संसदीय प्रक्रिया की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि सदन ठीक से चले।
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