महिलाओं के लिए बैन है महाकाल की भस्म आरती! धर्म संसद में क्या बोले जगद्गुरु
Sanjay Dhiman | Aug 07, 2026, 20:41 IST
bhasma-aarti-women-ban-ujjain-sant
महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को धर्म संसद का आयोजन किया गया। एक मीडिया हाउस ने इसका आयोजन किया। यहां महांकाल की भस्म आरती को लेकर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज महिलाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
उज्जैन में एक मीडिया हाउस ने धर्म संसद का आयोजन किया। इसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी सतीशाचार्य महाराज शामिल हुए। साथ में रिटायर्ड IAS अधिकारी मनोज श्रीवास्तव और कथावाचक पंडित श्यान मानावत भी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान भस्म आरती और महिलाओं के देखने को लेकर सवाल उठा। स्वामी सतीशाचार्य महाराज ने साफ कहा कि इसे देखने की किसी को मनाही नहीं है।
महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को यह खास आयोजन हुआ। कार्यक्रम का नाम था 'The Immortal of Ujjain'। इसमें तीन बड़े विद्वानों ने सनातन धर्म पर अपनी बात रखी। तीनों वक्ताओं ने संस्कृति को समझने की अपील की। उन्होंने युवाओं से परंपराओं को जानने के लिए कहा।
स्वामी सतीशाचार्य महाराज ने सनातन धर्म पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि सनातन सिर्फ पूजा-पद्धति नहीं है। यह जीवन जीने की दिशा देने वाली व्यवस्था है। उन्होंने युवाओं से शास्त्रों को समझने की अपील की।
उन्होंने उज्जैन की पहचान पर भी बात की। उनके अनुसार उज्जैन केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तक सीमित नहीं है। यह ज्ञान, साधना और तप की भूमि भी है। सदियों से यहां संतों और विद्वानों ने साधना की है।
महाराज ने कहा कि नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने के लिए सिर्फ कर्मकांड बताना काफी नहीं है। इसके पीछे का भाव और उद्देश्य भी समझाना होगा। उन्होंने कहा कि शास्त्रों का अध्ययन जीवन में सही फैसले लेने की क्षमता भी देता है।
महाकाल की नगरी मनुष्य को समय और जीवन का सत्य समझाती है। यह संदेश उन्होंने चर्चा के दौरान कई बार दोहराया। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, बांटना नहीं, यह उनका मुख्य संदेश रहा।
चर्चा के दौरान भस्म आरती को लेकर सीधा सवाल पूछा गया। पूछा गया कि इसे देखने की स्त्री-पुरुष को लेकर क्या मान्यता है। इसके जवाब में महाराज ने भस्म आरती के महत्व पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का संदेश है कि जहां अंत है, वहीं अनंत की शुरुआत होती है। वेदों ने भस्म को परम तत्व बताया है। यही कारण है कि शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है।
सबसे अहम सवाल था कि क्या भस्म आरती देखना महिलाओं के लिए बैन है। इस पर महाराज का जवाब स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि भस्म आरती देखने में किसी को कोई मनाही नहीं है।
उन्होंने कहा कि स्त्री और पुरुष केवल वस्त्रों के नाम हैं। अंदर सबके भीतर आत्मा एक समान है। शास्त्रों में इस आधार पर कोई भेद नहीं बताया गया है।
महाराज के अनुसार समय के साथ व्यवस्थाओं के आधार पर अंतर बनाए गए। लेकिन व्यवस्थाएं भी लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि शिव स्वयं परिवर्तनशील हैं, और भस्म भी इसी परिवर्तन का प्रतीक है।
चर्चा में धार्मिक शिक्षा और संतों की भूमिका पर भी बात हुई। महाराज ने कहा कि धार्मिक आचरण तभी सार्थक है जब उसमें करुणा और सेवा शामिल हो। दूसरों के प्रति सम्मान भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आज युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने की बड़ी जरूरत है। इसमें परिवार और शिक्षण संस्थानों, दोनों की भूमिका अहम है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है, यह उनका मानना है।
यह खबरें भी पढ़ें...
उज्जैन के महाकाल का आदेश, क्यों 51 शक्तिपीठों के रक्षक बने भगवान काल भैरव?
उज्जैन में बाबा महाकाल का दिव्य रूप: चांदी की पालकी में निकली पहली सवारी
महाकाल भक्तों के लिए खुशखबरी, भोपाल से उज्जैन के लिए तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें शुरू
उज्जैन में जिंदा बेटी का किया अंतिम संस्कार, दूसरी जाति में शादी करने पर नाराज था परिवार
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन
महाकाल की नगरी उज्जैन में शुक्रवार को यह खास आयोजन हुआ। कार्यक्रम का नाम था 'The Immortal of Ujjain'। इसमें तीन बड़े विद्वानों ने सनातन धर्म पर अपनी बात रखी। तीनों वक्ताओं ने संस्कृति को समझने की अपील की। उन्होंने युवाओं से परंपराओं को जानने के लिए कहा।
युवाओं का शास्त्र ज्ञान जरूरी
उन्होंने उज्जैन की पहचान पर भी बात की। उनके अनुसार उज्जैन केवल महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग तक सीमित नहीं है। यह ज्ञान, साधना और तप की भूमि भी है। सदियों से यहां संतों और विद्वानों ने साधना की है।
कर्मकांड से आगे दर्शन जरूरी
महाकाल की नगरी मनुष्य को समय और जीवन का सत्य समझाती है। यह संदेश उन्होंने चर्चा के दौरान कई बार दोहराया। धर्म का उद्देश्य समाज को जोड़ना है, बांटना नहीं, यह उनका मुख्य संदेश रहा।
भस्म आरती पर क्या बोले संत
उन्होंने कहा कि भगवान शिव का संदेश है कि जहां अंत है, वहीं अनंत की शुरुआत होती है। वेदों ने भस्म को परम तत्व बताया है। यही कारण है कि शिवलिंग पर भस्म चढ़ाई जाती है।
महिलाओं के लिए बैन नहीं भस्म आरती
उन्होंने कहा कि स्त्री और पुरुष केवल वस्त्रों के नाम हैं। अंदर सबके भीतर आत्मा एक समान है। शास्त्रों में इस आधार पर कोई भेद नहीं बताया गया है।
महाराज के अनुसार समय के साथ व्यवस्थाओं के आधार पर अंतर बनाए गए। लेकिन व्यवस्थाएं भी लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने कहा कि शिव स्वयं परिवर्तनशील हैं, और भस्म भी इसी परिवर्तन का प्रतीक है।
समाज को जोड़ने का संदेश
उन्होंने कहा कि आज युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने की बड़ी जरूरत है। इसमें परिवार और शिक्षण संस्थानों, दोनों की भूमिका अहम है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है, यह उनका मानना है।
यह खबरें भी पढ़ें...
उज्जैन के महाकाल का आदेश, क्यों 51 शक्तिपीठों के रक्षक बने भगवान काल भैरव?
उज्जैन में बाबा महाकाल का दिव्य रूप: चांदी की पालकी में निकली पहली सवारी
महाकाल भक्तों के लिए खुशखबरी, भोपाल से उज्जैन के लिए तीन जोड़ी स्पेशल ट्रेनें शुरू
उज्जैन में जिंदा बेटी का किया अंतिम संस्कार, दूसरी जाति में शादी करने पर नाराज था परिवार
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA