दस दिन में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, आने वाले समय में और बढ़ेगी महंगाई!
5 प्वाइंट में समझें पूरा मामला...
- शनिवार, 23 मई को पेट्रोल और डीजल महंगे हो गए हैं।
- पिछले 10 दिनों के भीतर तेल कंपनियों ने तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से यह फैसला लिया गया है।
- पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है।
- आने वाले दिनों में माल ढुलाई, सब्जियों और रोजमर्रा के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं।
देश में महंगाई की मार झेल रही आम जनता को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। शनिवार, 23 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी कर दी गई है।
इस नए बदलाव के बाद पेट्रोल के दाम 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम 91 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं।
आम लोगों की चिंता इसलिए ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि पिछले 10 दिनों के अंदर यह तीसरी बार है जब ईंधन महंगा हुआ है।
एमपी में भी बढ़ते दाम का असर...
भोाल में पेट्रोल अब 111.71 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इंदौर में इसकी कीमत 111.85 रुपए, जबलपुर में 112.18 रुपए, ग्वालियर में 111.63 रुपए और उज्जैन में 112.10 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई है।
वहीं डीजल की बात करें तो भोपाल में नया रेट 96.85 रुपए प्रति लीटर है। इंदौर में 96.92 रुपए, जबलपुर में 97.32 रुपए, ग्वालियर में 96.80 रुपए और उज्जैन में 97.21 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
इस महीने लगातार तीसरी बार बढ़े दाम
- 15 मई को पहली बार करीब 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।
- इसके बाद 19 मई को दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़े।
- अब 23 मई को तीसरी बार फिर 87 से 91 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ोतरी कर दी गई है।
यानि मई महीने में अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 5 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
क्यों बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?
तेल कंपनियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। इस समय पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है।
इस तनाव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर एक डर और चिंता का माहौल है।
चूंकि भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली इस हलचल का सीधा असर हमारे देश पर पड़ रहा है।
कच्चे तेल के दाम लगातार ऊंचे बने रहने के कारण ही घरेलू बाजार में तेल कंपनियों को खुदरा कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
जेब और बजट पर क्या होगा असर?
जब भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो उसका सीधा असर आम इंसान के घर के बजट पर पड़ता है। इस बार भी इसके कई गंभीर असर देखने को मिल सकते हैं:ल।
निजी वाहन चलाना होगा महंगा: जो लोग अपनी कार या बाइक से दफ्तर या काम पर जाते हैं, उनका पेट्रोल का मासिक खर्च अब सीधे तौर पर बढ़ जाएगा।
महंगी होगी माल ढुलाई: डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रकों, बसों और सामान ढोने वाले भारी वाहनों का किराया बढ़ जाएगा।
सब्जियां और राशन होंगे महंगे: जब माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, तो मंडियों तक आने वाली सब्जियों, फलों, दूध और रोजमर्रा के जरूरी सामानों की कीमतें भी अपने आप बढ़ जाएंगी।
मध्यम वर्ग और व्यापारियों की चिंताएं अब काफी बढ़ गई हैं। जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में महंगाई और भी ज्यादा पैर पसार सकती है।
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