पेट्रोल-डीजल की अघोषित राशनिंग पर हाई कोर्ट ने केंद्र और तेल कंपनियों से मांगा जवाब

Jageshwar prasad | May 21, 2026, 11:42 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-21T114113.674
Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने बिना आदेश के पेट्रोल-डीजल आपूर्ति लिमिट तय करने पर तेल कंपनियों से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया कि कंपनियां व्हाट्सएप संदेशों से पंप संचालकों को निर्देश दे रही हैं। अगली सुनवाई 25 मई को होगी।

News In Short

  • व्हाट्सएप संदेशों से पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय करने पर कोर्ट सख्त।
  • हाई कोर्ट ने तेल कंपनियों के अघोषित राशनिंग पर मांगा जवाब।
  • पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने उठाई है अनियमितताओं की आवाज।
  • दलील, बिक्री या वितरण पर रोक लगाने का अधिकार केवल सरकार के पास।
  • 25 मई को होगी मामले में अगली सुनवाई, केंद्र सरकार को भी बुलाया।

News In Detail

राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर पिछले कुछ दिनों से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन लगातार दावा कर रहे हैं कि बाजार में ईंधन की कोई कमी नहीं है, वहीं दूसरी तरफ हर शाम पेट्रोल पंप ड्राई (खाली) हो रहे हैं। इस संकट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के कथित अघोषित नियमों से परेशान होकर व्यापारियों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

कोर्ट ने क्या कहा?

राजस्थान हाई कोर्ट की मुख्य पीठ (जोधपुर) ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की एकलपीठ ने पेट्रोलियम डीलर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संबंधित तेल कंपनियों से जवाब तलब किया है।

कोर्ट ने याचिका की प्रतियां भारत संघ, राज्य सरकार और संबंधित ऑयल कंपनियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। चूंकि भारत संघ की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था, इसलिए कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास को केंद्र सरकार की ओर से पेश होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 मई की तारीख तय की गई है।

याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पेट्रोलियम उत्पाद आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आवश्यक वस्तु की श्रेणी में आते हैं। इनके उत्पादन, वितरण और बिक्री को नियंत्रित करने का अधिकार केवल केंद्र या राज्य सरकार को आदेश या अधिसूचना से ही दिया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के अधिकारी पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक निर्देशों और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए आदेश दे रहे हैं। यानी बिना किसी लिखित आदेश के ही पंपों पर पेट्रोल-डीजल की लिमिट और आपूर्ति तय कर दी जा रही है, जो कानूनन गलत है।

पैनिक परचेज ने बढ़ाई समस्या

राजस्थान में कुछ जिलों में बुधवार को भी लोगों की भीड़ पेट्रोल पंपों पर उमड़ी। प्रशासन की ओर से बार-बार यह कहा गया कि पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, लेकिन अफवाहों और पैनिक परचेज के चलते लोग नहीं माने। इसका नतीजा यह हुआ कि स्टॉक तेजी से खत्म हो हो रहा है।

क्या होगा आगे?

अब 25 मई को हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सरकार और तेल कंपनियों को स्पष्ट करना होगा कि आखिर वे किस अधिकार से बिना आदेश के पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय कर रही हैं। इस फैसले का असर पूरे राज्य में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर पड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

पेट्रोल-डीजल की लिमिट तय करने के मामले में किस हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है?

इस मामले को लेकर पेट्रोलियम डीलर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्य पीठ (जोधपुर) में याचिका दायर की गई है।

अदालत में याचिकाकर्ताओं ने तेल कंपनियों के किस कदम को अवैध बताया है?

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तेल कंपनियां आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के नियमों के विपरीत जाकर, बिना किसी सरकारी अधिसूचना के, महज मौखिक और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए पेट्रोल-डीजल की सप्लाई सीमित कर रही हैं।

हाईकोर्ट की इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी और केंद्र की तरफ से कौन पेश होगा?

जस्टिस मुकेश राजपुरोहित की कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई 25 मई 2026 को करेगी, जिसमें केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भरत व्यास को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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