सेशेल्स में प्रधानमंत्री मोदी को मिला गार्डियन ऑफ ब्लू होराइजन सम्मान
समझें क्या है पूरा मामला
- PM मोदी तीन दिन के सेशेल्स दौरे पर गए थे।
- उन्होंने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित किया।
- यह उनका 20वां विदेशी संसद भाषण है।
- उन्हें गार्डियन ऑफ ब्लू होराइजन सम्मान मिला है।
- भारत ने सेशेल्स को पेट्रोल वेसल और एंबुलेंस भी दी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बड़ा इतिहास रच दिया। वह सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। यह उनका विदेश में 20वां संसद भाषण था। मोदी तीन दिन के दौरे पर 27 से 29 जून तक सेशेल्स में हैं। यह दौरा सेशेल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने के मौके पर हो रहा है।
संसद में क्या बोले मोदी
मोदी ने अपने भाषण में हिंद महासागर की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री पड़ोसी होने के कारण दोनों देशों की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी है। उनका कहना था कि एक देश की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा बढ़ाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंद महासागर अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है। मोदी ने बताया कि उनकी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा सेशेल्स की ही थी। यह यात्रा 2015 में हुई थी। उन्होंने कहा कि एक दशक बाद लौटना उनके लिए खास पल है।
मोदी ने सेशेल्स के लोगों की तारीफ भी की। उनका कहना था कि दुनिया भर से आए लोगों ने मिलकर एक साझा पहचान बनाई है। उन्होंने भारतीय समुदाय के योगदान का भी जिक्र किया। समोसा, दिवाली और गरबा जैसी चीजों का उदाहरण दिया गया। मोदी ने दोनों देशों के 250 साल पुराने रिश्तों की कहानी भी सुनाई। उन्होंने 1770 में आए जहाज थेलेमाक का जिक्र किया। उस जहाज पर पांच भारतीय सवार थे।
मिला सर्वोच्च सम्मान
इस दौरे के दौरान मोदी को सेशेल्स का सबसे बड़ा सम्मान मिला। उन्हें गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण में नेतृत्व के लिए दिया जाता है। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने यह सम्मान दिया। मोदी ने इस सम्मान को विनम्रता से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान 1.4 अरब भारतीयों के लिए गर्व की बात है। मोदी ने इस सम्मान को उन सभी देशों को समर्पित किया जो जलवायु परिवर्तन से लड़ रहे हैं।
राष्ट्रपति हर्मिनी ने कहा कि यह सम्मान मोदी के नेतृत्व का प्रतीक है। उनके अनुसार यह सम्मान ब्लू इकोनॉमी और समुद्री संसाधनों के संरक्षण के लिए दिया गया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस सम्मान पर बयान दिया। मंत्रालय ने कहा कि यह सम्मान सोलर अलायंस और मिशन लाइफ जैसी पहलों को मान्यता देता है। एक पेड़ माँ के नाम और बिग कैट अलायंस का भी जिक्र हुआ।
इससे पहले भी मोदी को कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। मई 2026 में उन्हें फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन यानी FAO (Food and Agriculture Organization) का एग्रीकोला मेडल मिला था। 2018 में उन्हें सियोल पीस प्राइज और यूएन का चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड भी मिल चुका है।
मासागर विजन पर भी हुई बात
राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ साझा बयान में मोदी ने मासागर यानी MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) पहल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र को अवसरों का सागर बनाना चाहता है। हर्मिनी ने भी इस विजन में सेशेल्स की खास जगह की बात की। दोनों नेताओं ने समुद्री लूट, ड्रग तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसी चुनौतियों से मिलकर लड़ने की बात कही।
बातचीत में भारत की 175 मिलियन डॉलर की विशेष आर्थिक सहायता पैकेज की भी चर्चा हुई। इसमें 125 मिलियन डॉलर का रुपए आधारित कर्ज और 50 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता शामिल है। यह राशि सामाजिक आवास, ई-मोबिलिटी और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम आएगी। दोनों देशों ने एक प्रोफेशनल और टेक्निकल एजुकेशन सेंटर का भी उद्घाटन किया।
रक्षा सहयोग भी बढ़ा
मोदी ने सेशेल्स को कई तरह की मदद भी दी। उन्होंने भारत में बनी एक फास्ट पेट्रोल वेसल पीएस लेस्पवार सेशेल्स को सौंपी। इसके साथ छह एंबुलेंस, दस यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल बोट भी दी गईं। यह मदद सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए दी गई है। दोनों देशों ने मिलकर एक खास पौधा भी लगाया। यह कोको डि मेर नाम का दुर्लभ पौधा था।
मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत भी हुई। इस बातचीत में विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे। दोनों पक्षों ने रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर बात की।
20वां विदेशी संसद भाषण
मोदी का यह भाषण उनके कार्यकाल का 20वां विदेशी संसद भाषण है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फिजी की संसद को संबोधित किया था। बाद के सालों में मॉरीशस, श्रीलंका, मंगोलिया, ब्रिटेन और अमेरिका की संसद में भी भाषण दिया। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को दो बार संबोधित किया है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
2025 में मोदी ने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो और नामीबिया की संसद में भाषण दिया था। इसके बाद दिसंबर में इथियोपिया की संसद को भी संबोधित किया। इस साल फरवरी में उन्होंने इजरायल की संसद नेसेट को भी संबोधित किया था। यह भी एक ऐतिहासिक पल था।
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