OpenAI और Perplexity के खिलाफ पब्लिशर्स ने क्यों छेड़ी जंग, कंटेंट चोरी के आरोप का मुकदमा दायर
News In Short
- दुनिया के बड़े पब्लिशर्स Artificial Intelligence कंपनियों पर कंटेंट की चोरी का आरोप लगा रहे हैं।
- एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका ने OpenAI पर मुकदमा दायर किया है।
- डाउ जोंस और न्यूयॉर्क टाइम्स ने AI सर्च स्टार्टअप Perplexity पर केस किया है।
- पब्लिशर्स का कहना है कि AI सीधे जवाब देता है, जिससे यूजर उनकी वेबसाइट पर नहीं आते।
- बिना इजाजत कंटेंट को AI ट्रेनिंग डेटा में इस्तेमाल करना पूरी लड़ाई की जड़ है।
News In Detail
इंटरनेट पर कंटेंट का कारोबार करने वाले पब्लिशर्स के लिए AI एक बड़ा खतरा बन गया है। अखबार हों, किताब प्रकाशक हों या ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया, सब एक ही परेशानी से जूझ रहे हैं। उनका कंटेंट AI कंपनियां इस्तेमाल कर रही हैं और बदले में न पैसा मिल रहा है, न ट्रैफिक। यही वजह है कि अब ये पब्लिशर्स कोर्ट का रास्ता अपना रहे हैं।
ब्रिटानिका ने OpenAI पर ठोका मुकदमा
सबसे ताजा और बड़ा मामला एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका का है। इस प्रतिष्ठित नॉलेज प्लेटफॉर्म ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। ब्रिटानिका का आरोप है कि उसके लेखों का इस्तेमाल बिना अनुमति AI सिस्टम को ट्रेन करने में किया गया।
साथ ही AI टूल के जवाब उसके आर्टिकल्स से इतने मिलते-जुलते होते हैं कि यूजर सीधे AI से जानकारी लेते हैं और ब्रिटानिका की वेबसाइट पर आने की जरूरत नहीं समझते। इससे उसका पेज व्यू और उससे जुड़ी कमाई दोनों घट रहे हैं।
किताब प्रकाशकों की भी यही कहानी
अकेले ब्रिटानिका नहीं है। चिकन सूप फॉर द सोल किताब सीरीज के पब्लिशर ने भी कानूनी कार्रवाई की है। उनका आरोप है कि उनकी कॉपीराइटेड किताबें पायरेटेड लाइब्रेरी से उठाकर AI ट्रेनिंग डेटासेट में डाल दी गईं। यह मामला साफ दिखाता है कि AI कंपनियां कंटेंट कहां से और कैसे उठा रही हैं, इस पर अभी कोई पक्का नियम नहीं है।
न्यूज पब्लिशर्स बनाम Perplexity
न्यूज मीडिया का मामला और भी पेचीदा है। डाउ जोंस और न्यूयॉर्क टाइम्स ने AI सर्च स्टार्टअप Perplexity पर मुकदमा किया है। आरोप है कि Perplexity AI उनकी खबरें लगभग जस की तस या थोड़े बदलाव के साथ पेश करता है। न तो सही क्रेडिट मिलता है, न रेफरल ट्रैफिक। यानी पाठक खबर तो पढ़ लेता है लेकिन असली वेबसाइट तक नहीं पहुंचता।
AI ने बदल दिया इंटरनेट का ट्रैफिक सिस्टम
पब्लिशर्स की परेशानी सिर्फ कानूनी नहीं है। असल दिक्कत यह है कि एआईने इंटरनेट पर यूजर के व्यवहार को ही बदल दिया है। पहले यूजर किसी सवाल का जवाब ढूंढने के लिए गूगल पर सर्च करता था और किसी वेबसाइट पर क्लिक करता था। अब AI सीधे जवाब दे देता है। क्लिक की जरूरत ही नहीं पड़ती।
SEO (Search Engine Optimization) की पूरी रणनीति भी चरमरा रही है। पहले पब्लिशर्स कीवर्ड, बैकलिंक और कंटेंट क्वालिटी के दम पर सर्च रैंकिंग पाते थे। AI सिस्टम इस पूरे इकोसिस्टम को बायपास कर देता है।
क्रेडिट और एट्रिब्यूशन का संकट
एट्रिब्यूशन यानी असली स्रोत को श्रेय देना, यह भी बड़ा मुद्दा बन गया है। Perplexity जैसे प्लेटफॉर्म पर आरोप है कि वे न्यूज आर्टिकल को अपने शब्दों में पेश करते हैं और क्रेडिट बेहद कम देते हैं।
इससे भी खतरनाक बात यह है कि कभी-कभी AI गलत या काल्पनिक उद्धरण दे देता है। इसमें किसी पब्लिशर का नाम आ जाए तो उसकी साख पर बट्टा लग सकता है, जबकि उसका उससे कोई लेना-देना नहीं होता।
सब्सक्रिप्शन मॉडल भी खतरे में
जो पब्लिशर्स पेड सब्सक्रिप्शन पर निर्भर हैं, उनके लिए यह और भी बड़ा झटका है। अगर AI किसी पेवॉल (Paywall) यानी सशुल्क सामग्री को भी सारांश में पेश कर दे, तो यूजर के पास सब्सक्रिप्शन लेने की कोई वजह नहीं बचती। यह चिंता न्यूज संगठनों और किताब प्रकाशकों दोनों ने उठाई है।
कंटेंट की कीमत कौन चुकाएगा?
सारे मुकदमों की जड़ में एक ही सवाल है। AI कंपनियां पब्लिशर्स के कंटेंट से अपना कारोबार खड़ा करती हैं लेकिन उन्हें न पैसा देती हैं, न इजाजत लेती हैं। ब्रिटानिका ने इसे सीधे शब्दों में कहा है कि टेक कंपनियां क्यूरेटेड कंटेंट से फायदा उठाती हैं लेकिन उस इकोसिस्टम में कोई योगदान नहीं देतीं जो इस कंटेंट को बनाता है।
यह लड़ाई अब सिर्फ कानूनी नहीं रही। यह उस सवाल की लड़ाई है कि AI के दौर में कंटेंट की असली कीमत कौन तय करेगा और उस पर हक किसका होगा।
FAQ
- AI कंपनियों के खिलाफ पब्लिशर्स कोर्ट क्यों जा रहे हैं?
पब्लिशर्स का मुख्य आरोप यह है कि AI कंपनियों ने उनका कं टेंट बिना इजाजत और बिना कोई भुगतान किए अपने सिस्टम को ट्रेन करने में इस्तेमाल किया। इससे दो नुकसान हो रहे हैं। पहला, AI सीधे जवाब देता है जिससे यूजर पब्लिशर की वेबसाइट पर नहीं आता और ट्रैफिक घटता है। दूसरा, विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई भी प्रभावित होती है। एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका, न्यूयॉर्क टाइम्स और डाउ जोंस जैसे बड़े नाम इस लड़ाई में सबसे आगे हैं।
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