फसल बीमा योजना में 423 करोड़ के फर्जी क्लेम, जानिए एआई की मदद से कैसे पकड़ा पूरा मामला

राजस्थान में फसल बीमा योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो रहा है। इस फर्जीवाड़े को एआई और सैटेलाइट इमेज की मदद से खोला गया है। राजस्थान के तीन जिलों में 423 करोड़ रुपए के फर्जी फसल बीमा क्लेम का मामला सामने आया है।

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Ashish Bhardwaj
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Fasal bima

Photograph: (the sootr)

News In Short 

  • राजस्थान में एआई और सैटेलाइट इमेज की मदद से फर्जी फसल बीमा दावों का खुलासा हुआ है।
  • श्रीगंगानगर, अलवर और बूंदी में 423 करोड़ रुपए के फर्जी दावे पकड़े गए।
  • फर्जी दावों में खेतों में बोई गई फसल की जगह खाली या दूसरी फसलें पाई गईं।
  • बीमा कंपनी ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर 221,661 फर्जी आवेदन नामंजूर किए। 
  • स्मार्ट सैंपलिंग तकनीक से बीमा दावों की जांच में सुधार किया गया है।

News In Detail

राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। राजस्थान के तीन जिलों श्रीगंगानगर, अलवर और बूंदी जिले में 423 करोड़ रुपए के फर्जी फसल बीमा क्लेम का पता चला है। इस फर्जीवाड़े को खोलने के लिए एआई और सेटेलाइट इमेज की मदद ली गई्र। इसके जरिए इन तीन जिलों में करीब सवा दो लाख फर्जी बीमा क्लेम पकड़े गए हैं।

फर्जी बीमा क्लेम का पता कैसे चला

इन फर्जी बीमा दावों में खेतों में बताई गई फसल की जगह खाली पाई गई या दूसरी फसलें उगी थीं। क्षेमा बीमा कंपनी को श्रीगंगानगर, अलवर और बूंदी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से 423 करोड़ रुपए के क्लेम मिले। जांच में पाया गया कि 2025 के खरीफ सीजन के 221,661 आवेदन फर्जी थे। इन सभी आवेदनों को अस्वीकृत कर दिया गया। कंपनी ने इन पर खर्च होने वाली 30.17 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी बचाई।

एआई और सैटेलाइट इमेज का योगदान

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विश्लेषण से यह पता चलता है कि जहां खेतों में कोई फसल बोई ही नहीं गई, वहां भी फसल बीमा के लिए आवेदन किए गए थे। एआई द्वारा स्कैन की गई सैटेलाइट इमेजेज में फसल का रंग, आकार, बनावट और पैटर्न के आधार पर असल स्थिति का आकलन किया जाता है। यदि खेत में बोई गई फसल और आवेदन में दर्ज फसल में अंतर पाया जाता है, तो ऐसे दावे अस्वीकार कर दिए जाते हैं।

बीमा दावों में सुधार के लिए स्मार्ट सैंपलिंग तकनीक 

बीमा कंपनी ने स्मार्ट सैंपलिंग तकनीक का इस्तेमाल कर क्रॉप कटिंग प्रयोग को चुनौती दी है। इस तकनीक का उद्देश्य केवल वास्तविक किसानों को लाभ पहुंचाना है। चीफ रिस्क ऑफिसर कुमार सौरभ ने कहा कि उन्होंने श्रीगंगानगर जिले की करणपुर तहसील में 79 करोड़ रुपये के बीमा दावों की जांच की। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद इन दावों को स्वीकार नहीं किया गया। 

एआई और सैटेलाइट इमेज से गड़बड़ियों पर नियंत्रण

सैटेलाइट इमेज और एआई इनपुट्स की मदद से फर्जी बीमा दावों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि जहां फसल बोई ही नहीं गई, वहां भी बीमा आवेदन किए गए थे। एआई इन इमेजेस को स्कैन कर रंग, आकार और अन्य पहलुओं के आधार पर फसल की सही स्थिति को पहचानता है।

जांच प्रक्रिया और समीक्षा

सैटेलाइट इमेज और एआई तकनीक से मैपिंग की जाती है, जिसमें खेती की जमीन, पानी, पेड़, सड़क और निर्माण की पहचान की जाती है। फिर इसे कृषि विशेषज्ञों और सैटेलाइट इमेज विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है। यह जांच पूरी तरह से पारदर्शी और प्रभावी है, जो किसानों को धोखाधड़ी से बचाती है।

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