/sootr/media/media_files/2026/02/23/cm-mohan-yadav-google-ai-cricket-summit-2026-2026-02-23-13-44-01.jpg)
News in Short
- एआई स्वास्थ्य, खेती, रोजगार और आपदाओं में खतरों का पहले ही पता लगाएगा।
- पॉलिसी में डेटा गोपनीयता और पारदर्शिता के लिए सख्त ऑडिट नियम होंगे।
- छात्रों और अधिकारियों को एआई में दक्ष बनाया जाएगा और नए स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा।
- अधिकारी अब एआई टूल्स का उपयोग ड्राफ्टिंग और डेटा एनालिसिस के लिए कर सकेंगे।
- इम्पैक्ट समिट 2026 के समझौतों को लागू करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स और वर्किंग ग्रुप तैयार हैं।
News In Detail
मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही प्रेडिक्टिव गवर्नेंस की शुरुआत करने जा रही है। इसका मतलब है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भविष्य में होने वाले खतरों को पहले ही भांप लेगा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित Impact Summit 2026 के दौरान राज्य में एक व्यापक एआई इकोसिस्टम बनाने का ऐलान किया है। यह तकनीक स्वास्थ्य, कृषि, पोषण, रोजगार और आपदा प्रबंधन में आने वाले खतरों का पहले से अनुमान लगाएगी।
तकनीक भांपेगी आने वाले खतरे को
राज्य की आगामी एआई नीति का मुख्य आधार जोखिमों का पूर्वानुमान लगाना है। एआई की मदद से स्वास्थ्य सेवाओं में आने वाली चुनौतियों और कृषि क्षेत्र की समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकेगा।
इसके अलावा, पोषण और रोजगार के मोर्चे पर भी यह तकनीक डेटा का विश्लेषण कर सरकार को सचेत करेगी। आपदाओं के मामले में एआई के जरिए होने वाला अर्ली वार्निंग सिस्टम जान-माल के नुकसान को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।
एआई से निखरेगी खिलाड़ियों की तकनीक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान गूगल पवेलियन में क्रिकेट खेला। उन्होंने वहां एआई-संचालित क्रिकेट तकनीक का अनुभव लिया। इस खास सेटअप ने तकनीक, टाइमिंग और प्रदर्शन पर तुरंत फीडबैक दिया। सीएम ने कहा कि ऐसी तकनीक ट्रेनिंग के तरीकों को बदल सकती है।
गूगल टीम के साथ बातचीत में उन्होंने प्रदेश के डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने पर चर्चा की। इसमें गेमिंग स्टार्टअप, एआई स्किलिंग प्रोग्राम और मेंटरशिप जैसे विषय शामिल रहे। साथ ही सिंहस्थ 2028 (Simhastha 2028) के लिए तकनीकी साझेदारी पर भी बात हुई। सरकार का लक्ष्य इस बड़े आयोजन में डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई का बेहतर उपयोग करना है।
सुरक्षा और प्राइवेसी का खास ध्यान
अधिकारियों के मुताबिक, नई एआई पॉलिसी में नैतिकता और सुरक्षा को अनिवार्य बनाया गया है। इसमें पारदर्शिता और गोपनीयता के सख्त मानकों को लागू किया जाएगा।
सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि एआई का उपयोग पूरी तरह से सुरक्षित हो और डेटा का ऑडिट भी किया जा सके। मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश को एक एआई-रेडी राज्य के रूप में स्थापित करने का संकल्प लिया है।
निवेश और स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
सरकार केवल नीति नहीं बना रही, बल्कि इसे धरातल पर उतारने के लिए जॉइंट वर्किंग ग्रुप भी बना चुकी है। इस मिशन के तहत ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटर और जेनरेटिव एआई पर फोकस किया जाएगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एमओयू और लेटर ऑफ इंटेंट को हकीकत में बदलने के लिए एक समयबद्ध रोडमैप तैयार किया है। इससे प्रदेश में स्टार्टअप और डीप-टेक स्किलिंग को नई ऊंचाई मिलेगी।
अफसरों को मिलेगा एआई का साथ
इस नीति के तहत प्रशासन को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। अधिकारियों को 'एआई-ऑगमेंटेड एडमिनिस्ट्रेशन' के टूल्स दिए जाएंगे। ये टूल्स सरकारी दस्तावेज ड्राफ्ट करने, समरी बनाने और एनालिसिस करने में मदद करेंगे।
शुरुआती चरण में इसे 2-3 विभागों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, एआई सैंडबॉक्स और डिजिटल ट्विन जैसे परीक्षण भी सरकार की प्राथमिकता में शामिल हैं।
ये खबरें भी पढ़ें....
भागीरथपुरा कांड में क्या जाति देखकर IAS पर तय हुई कार्रवाई, उमंग सिंघार के गंभीर आरोप
MPPSC का परीक्षा सिस्टम फेल, विभागों में तालमेल की भारी कमी से हजारों युवाओं का भविष्य अंधेरे में!
भोपाल के स्नूकर क्लब में फिल्मी स्टाइल में छात्र पर चाकू से हमला, 30 सेकंड में 27 बार मारे
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us