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MP News. MPPSC की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बुरी खबर आई है। CAG की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग का पूरा सिस्टम फेल हो गया है। सरकारी विभागों और आयोग के बीच बिल्कुल तालमेल नहीं है, जिससे हजारों युवाओं का भविष्य अंधेरे में है।
साल 2018 से 2023 तक जो भर्ती प्रक्रिया होनी थी, उसमें भारी गड़बड़ी मिली है। विभागों ने खाली पदों की जानकारी देने में काफी देरी की। वहींआयोग अपना परीक्षा कैलेंडर भी समय पर पूरा नहीं कर पाया।
इस दौरान आयोग ने 28 अतिरिक्त परीक्षाएं भी आयोजित कर दीं, जो पहले से तय कैलेंडर का हिस्सा नहीं थीं।
आंकड़ों में गड़बड़ी: प्रस्तावित 44 में से केवल 28 परीक्षाएं
कैग की रिपोर्ट (cag report mp) में एक और चौंकाने वाला सच सामने आया है। समीक्षा के दौरान कुल 44 परीक्षाएं कराने का लक्ष्य था। लेकिन आयोग केवल 28 परीक्षाएं ही आयोजित कर पाया। बाकी 16 परीक्षाओं का विज्ञापन तक नहीं निकाला गया। यह लापरवाही लाखों युवाओं के करियर पर भारी पड़ रही है।
विज्ञापनों में भारी देरी करीब 12 हजार 336 पदों के लिए कुल 94 विज्ञापन निकले। इनमें से 30 विज्ञापन बहुत देर से जारी हुए। औसतन 136 दिनों की देरी दर्ज की गई। इससे भर्ती प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी।
विभागों की बड़ी सुस्ती ऊर्जा, उद्योग और पीएचई जैसे पांच विभाग सुस्त रहे। इन्होंने खाली पदों की जानकारी बहुत देर से भेजी। यह देरी 31 से 68 महीनों तक की थी। विभागों की इस सुस्ती ने मामला और बिगाड़ दिया।
डेडलाइन का खुला उल्लंघन नियमों के अनुसार परीक्षा 6 से 18 माह में होनी चाहिए। लेकिन नियुक्तियों में 25 माह तक की देरी हुई। इस वजह से 3,100 पद सीधे तौर पर फंस गए। समय सीमा का पालन कहीं भी नहीं हुआ।
इंटरव्यू और चयन प्रक्रिया पर सवाल
अधूरे बोर्ड: 16 इंटरव्यू बोर्डों में से 15 का गठन अधूरा था, जहां सदस्यों की पूरी भागीदारी नहीं रही।
पुराना पैनल: पेपर सेटर (1375) और मॉडरेटर (1138) की सूचियां 2018 से अपडेट नहीं की गईं, जो ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठाती हैं।
न्याय के लिए तरसते उम्मीदवार
कैग ने आरक्षण नीति पर भी सवाल उठाए हैं। आयोग के पास वैकेंसी की जांच का सिस्टम नहीं है। इस वजह से नियुक्तियां अक्सर कानूनी पचड़ों में फंसती हैं।
वेटिंग लिस्ट के प्रबंधन में भी भारी लापरवाही दिखी है। खराब मैनेजमेंट के कारण 12 योग्य उम्मीदवार प्रभावित हुए हैं। इनमें से 5 युवाओं को नौकरी से वंचित रहना पड़ा। यह सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को साफ दिखाता है।
राजस्व विभाग पर भी कैग की नजर
कैग की समीक्षा केवल आयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि उच्च शिक्षा और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को भी परखा गया।
उच्च शिक्षा विभाग: 2016 से शुरू हुई 3 हजार से अधिक पदों की भर्ती प्रक्रिया नियमों में बार-बार बदलाव के कारण आज तक पूरी नहीं हो पाई है।
अनुशंसाएं: कैग ने स्पष्ट किया है कि जब तक विभागवार वार्षिक वैकेंसी की सूचना समयबद्ध तरीके से अनिवार्य नहीं की जाएगी, तब तक यह अव्यवस्था बनी रहेगी।
कैग ने दिए ये सुझाव
भविष्य में इन गलतियों को सुधारने के लिए कैग ने कुछ सुझाव दिए हैं।
अनिवार्य समय-सीमा: विभागों के लिए वैकेंसी की जानकारी भेजने की एक सख्त डेडलाइन तय हो।
कैलेंडर का पालन: आयोग अपने वार्षिक परीक्षा कैलेंडर का कड़ाई से पालन करे।
पारदर्शिता: पेपर सेटर पैनल और इंटरव्यू बोर्ड का गठन पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से किया जाए।
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