एक चेसिस नंबर पर 16 हजार वाहन रजिस्टर्ड, CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
Anjali Dwivedi | Feb 21, 2026, 12:54 IST
cag report
CAG रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पूर्वोत्तर भारत में 16 हजार वाहन एक ही चेसिस नंबर पर चल रहे हैं। असम में बिना NOC हजारों रजिस्ट्रेशन हुए और करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है।
पूर्वोत्तर भारत (North East India) के परिवहन विभाग में एक बड़ा खेल चल रहा है। इस धांधली ने सरकारी तंत्र की सुरक्षा और ईमानदारी पर गहरे सवाल उठाए हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG report) ने एक बड़ा पर्दाफाश किया है। उनकी ताजा रिपोर्ट में असम सहित सात राज्यों की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है।
हजारों वाहन एक ही चेसिस और इंजन नंबर पर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह गंभीर मामला विभाग की कार्यप्रणाली में भारी खामियों को उजागर करता है।
कैग की रिपोर्ट में VAHAN डेटाबेस की बारीकी से जांच की गई। इसमें सामने आया कि कुल 15 हजार 849 वाहन ऐसे हैं, जिनका चेसिस और इंजन नंबर बिल्कुल एक जैसा है, लेकिन वे अलग-अलग राज्यों में रजिस्टर्ड हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 12 हजार 112 वाहनों को बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC के असम में दोबारा रजिस्टर कर लिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2019 से 2024 के बीच असम में तो वाहनों का रजिस्ट्रेशन खूब हुआ, लेकिन परमिट देने में भारी सुस्ती रही। इस दौरान करीब 1.19 लाख वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, लेकिन परिवहन विभाग ने केवल 26 हजार 105 वाहनों को ही परमिट दिया।
इसका मतलब ये कि सिर्फ 21.87% वाहनों के पास ही सड़क पर चलने का कानूनी अधिकार था। परमिट देने में इस ढिलाई के चलते न सिर्फ राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि अवैध कमर्शियल गाड़ियों की तादाद भी बढ़ गई।
सरकारी खजाने को केवल परमिट से ही नहीं, बल्कि टैक्स चोरी से भी तगड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट बताती है कि 1.29 लाख कमर्शियल वाहनों में से 29 हजार 560 वाहनों ने Motor Vehicle (MV) Tax का भुगतान ही नहीं किया।
मार्च 2024 तक की स्थिति के अनुसार, इससे सरकार को 61.28 करोड़ रुपए के टैक्स और 24.53 करोड़ रुपए के जुर्माने का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, आठ चुनिंदा जिलों में टैक्स देरी पर जुर्माना न वसूलने से 3.79 करोड़ रुपए की अतिरिक्त चपत लगी।
कैग ने स्कूल बसों के मामले में भी गंभीर लापरवाही पकड़ी है। 2019-24 के दौरान कई स्कूलों की बसों को Educational Institution Bus (EIB) परमिट के बजाय Contract Carriage परमिट दे दिए गए। ऐसा करने से ये बसें जरूरी फिटनेस जांच से बच गईं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी इस प्रक्रिया को दरकिनार करना विभाग की बड़ी विफलता माना जा रहा है।
लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता की कमी पाई गई। जारी किए गए लर्निंग और ड्राइविंग लाइसेंस में से 7.85% मामलों में तो ड्राइविंग टेस्ट की तारीख ही दर्ज नहीं थी। यही नहीं, 40 में से 24 मामलों में एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में टेस्ट स्लॉट बुक दिखाए गए, जो प्रैक्टिकली मुमकिन नहीं लगते। यह सीधे तौर पर मूल्यांकन की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है।
अप्रैल 2019 से जून 2023 के बीच डीलर स्तर पर रजिस्ट्रेशन में भारी देरी पाई गई। कुछ मामलों में यह देरी 1 दिन से लेकर 1,417 दिनों तक की थी। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लगभग 35% वाहनों के पते उनके दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। साथ ही, वन-टाइम टैक्स (OTT) के रूप में 23.80 करोड़ रुपये का बकाया अब भी वसूल नहीं किया जा सका है।
असम में गाड़ियों की संख्या तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन उन्हें नियंत्रित करने वाला अमला कम होता जा रहा है। परिवहन विभाग में 30 से 57 प्रतिशत तक पद खाली पड़े हैं। स्टाफ की कमी का असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है; पुराने वाहनों को हटाने और प्रदूषण मानकों को लागू करने के निर्देश धरे के धरे रह गए हैं।
CAG रिपोर्ट भारत के महालेखा परीक्षक की एक आधिकारिक रिपोर्ट है। यह सरकार के खर्चों और कमाई का पूरा ऑडिट करती है। यह रिपोर्ट सरकारी योजनाओं और राजस्व का लेखा-जोखा रखती है।
इस रिपोर्ट से कामकाज में पारदर्शिता और सच्चाई बनी रहती है। यह वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करती है। सरकार की फिजूलखर्ची और कमियों को भी उजागर किया जाता है।
इस रिपोर्ट को संसद या विधानसभा के सामने रखा जाता है। यह जनता के पैसे के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करती है।
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हजारों वाहन एक ही चेसिस और इंजन नंबर पर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। यह गंभीर मामला विभाग की कार्यप्रणाली में भारी खामियों को उजागर करता है।
एक ही नंबर पर हजारों वाहन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 12 हजार 112 वाहनों को बिना किसी अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC के असम में दोबारा रजिस्टर कर लिया गया। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा है।
रजिस्ट्रेशन ज्यादा, परमिट सिर्फ मुट्ठी भर
इसका मतलब ये कि सिर्फ 21.87% वाहनों के पास ही सड़क पर चलने का कानूनी अधिकार था। परमिट देने में इस ढिलाई के चलते न सिर्फ राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि अवैध कमर्शियल गाड़ियों की तादाद भी बढ़ गई।
टैक्स चोरी और जुर्माने की भारी चपत
मार्च 2024 तक की स्थिति के अनुसार, इससे सरकार को 61.28 करोड़ रुपए के टैक्स और 24.53 करोड़ रुपए के जुर्माने का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, आठ चुनिंदा जिलों में टैक्स देरी पर जुर्माना न वसूलने से 3.79 करोड़ रुपए की अतिरिक्त चपत लगी।
स्कूल बसों की सुरक्षा से समझौता
ड्राइविंग लाइसेंस और टेस्ट का खेल
अप्रैल 2019 से जून 2023 के बीच डीलर स्तर पर रजिस्ट्रेशन में भारी देरी पाई गई। कुछ मामलों में यह देरी 1 दिन से लेकर 1,417 दिनों तक की थी। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि लगभग 35% वाहनों के पते उनके दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। साथ ही, वन-टाइम टैक्स (OTT) के रूप में 23.80 करोड़ रुपये का बकाया अब भी वसूल नहीं किया जा सका है।
स्टाफ की कमी और बढ़ता प्रदूषण
CAG रिपोर्ट क्या है?
इस रिपोर्ट से कामकाज में पारदर्शिता और सच्चाई बनी रहती है। यह वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करती है। सरकार की फिजूलखर्ची और कमियों को भी उजागर किया जाता है।
इस रिपोर्ट को संसद या विधानसभा के सामने रखा जाता है। यह जनता के पैसे के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करती है।
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