सदियों पुरानी परंपरा पर उठे सवाल, बांके बिहारी मंदिर में दो गुटों में बहस, जानें जगमोहन विवाद?
Aman Vaishnav | Feb 20, 2026, 13:15 IST
banke bihari temple darshan jagmohan vivad
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में ठाकुर जी को गर्भगृह से बाहर निकालकर चबूतरे पर विराजमान किया गया है। इस बात को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। हाई पावर्ड कमेटी के इस फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एक बार फिर परंपरा और व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हाई पावर्ड कमेटी नेठाकुर जी को दर्शन के दौरान गर्भगृह से निकालकर जगमोहन चबूतरे पर बैठाने का फैसले लिया गया है। इस फैसले के बाद मंदिर परिसर में हलचल मच गई है। कुछ लोगों का कहना था कि इस फैसले से सदियों पुरानी पूजा परंपरा को तोड़ा गया है।
यहां तक कि कुछ समय के लिए ठाकुर जी को गर्भगृह में जंजीर से बांधने की बात भी उठी है। हालांकि इस पर मंदिर समिति ने सफाई दी है। कहा कि यह फैसला सिर्फ श्रद्धालुओं की सुविधा और बेहतर दर्शन के लिए लिया गया है।
हाई पावर्ड कमेटी ने फैसला किया है कि ठाकुर जी की मूर्ति को गर्भगृह से बाहर निकालकर जगमोहन में रखा जाए। इससे दर्शन करने में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और लोगों को बेहतर तरीके से दर्शन मिल सकेंगे। साथ ही दर्शन के लिए लाइन से व्यवस्था लागू करने का भी निर्णय लिया गया है।
गोस्वामी के एक पक्ष का कहना है कि ये कदम परंपरा को बिगाड़ने जैसा है। कमेटी इसे श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए जरूरी कदम मान रही है।
वृंदावन के कई स्थानीय श्रद्धालुओं ने इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि सदियों पुरानी परंपरा के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि गर्भगृह में ठाकुर जी को चांदी के आसन पर विराजित किया जाता था। अब जो आसन उन्हें जगमोहन में दिया गया है वह लकड़ी का और काफी पुराना है।
विरोध करने वाले लोगों का एक और आरोप है। दर्शन में सुधार की सच्ची चिंता होती तो सबसे पहले वीआईपी दर्शन को बंद किया जाता। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी समाधान निकाला जाता।
कुछ स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि परंपराएं समय के साथ बदलती रहती हैं। इसलिए नई व्यवस्था को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता है। उनका कहना है कि हमें विवादों से हटकर श्रद्धालुओं की सुविधा पर ध्यान देना चाहिए।
देशभर से आए श्रद्धालुओं का भी इस विषय में कुछ कहना है। उन्हें परंपरा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन इस बार उन्हें दर्शन करना ज्यादा आसान और स्पष्ट लगा है। मंदिर से बाहर आते वक्त कई श्रद्धालुओं ने इस नई व्यवस्था की तारीफ भी की है।
मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने मीडिया से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने कहा कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनमें से कुछ गोस्वामी खुद अतीत में कोर्ट के आदेश से कई परंपराओं को बदल चुके हैं। वर्तमान विवाद को अनावश्यक रूप से हवा दी जा रही है। उन्होंने लकड़ी के पुराने आसन पर भगवान को बैठाने को जल्दबाजी में हुई गलती मानी है।
दिनेश गोस्वामी ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। साथ ही गर्भगृह के दरवाजे पर जंजीर लगाए जाने के आरोप पर भी उन्होंने सफाई दी है। कहा है कि यह जंजीर कटहरे को पीछे खिसकने से रोकने के लिए लगाई गई थी। ठाकुर जी को जंजीर से बंद करने के लिए नहीं थी।
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एक परंपरा रही है। रंगभरी एकादशी से लेकर होली, अक्षय तृतीया, जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा जैसे कई खास अवसरों ठाकुर जी को गर्भगृह से बाहर जगमोहन में विराजित किया जाता था। इस बार रंगभरी एकादशी से पहले ही यह व्यवस्था लागू कर दी गई है।
इसका एक कारण बताया जा रहा है कि मंदिर में रेलिंग लगाए जाने के कारण गर्भगृह में दर्शन में परेशानी हो रही थी। अब वृंदावन में गोस्वामियों के दो गुट इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। एक गुट इसे परंपरा से छेड़छाड़ मान रहा है। वहीं दूसरा इसे व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आपसी बातचीत से सुलझता है या आगे और बढ़ता है।
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यहां तक कि कुछ समय के लिए ठाकुर जी को गर्भगृह में जंजीर से बांधने की बात भी उठी है। हालांकि इस पर मंदिर समिति ने सफाई दी है। कहा कि यह फैसला सिर्फ श्रद्धालुओं की सुविधा और बेहतर दर्शन के लिए लिया गया है।
हाई पावर्ड कमेटी का फैसला
गोस्वामी के एक पक्ष का कहना है कि ये कदम परंपरा को बिगाड़ने जैसा है। कमेटी इसे श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन के लिए जरूरी कदम मान रही है।
दर्शन व्यवस्था की चिंता नहीं
विरोध करने वाले लोगों का एक और आरोप है। दर्शन में सुधार की सच्ची चिंता होती तो सबसे पहले वीआईपी दर्शन को बंद किया जाता। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी समाधान निकाला जाता।
विवादों से हटकर श्रद्धालुओं सुविधा पर ध्यान
देशभर से आए श्रद्धालुओं का भी इस विषय में कुछ कहना है। उन्हें परंपरा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन इस बार उन्हें दर्शन करना ज्यादा आसान और स्पष्ट लगा है। मंदिर से बाहर आते वक्त कई श्रद्धालुओं ने इस नई व्यवस्था की तारीफ भी की है।
कमेटी सदस्य बोले- भविष्य में गलती नहीं होगी
दिनेश गोस्वामी ने कहा है कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं होगी। साथ ही गर्भगृह के दरवाजे पर जंजीर लगाए जाने के आरोप पर भी उन्होंने सफाई दी है। कहा है कि यह जंजीर कटहरे को पीछे खिसकने से रोकने के लिए लगाई गई थी। ठाकुर जी को जंजीर से बंद करने के लिए नहीं थी।
क्या और बढ़ेगा विवाद?
इसका एक कारण बताया जा रहा है कि मंदिर में रेलिंग लगाए जाने के कारण गर्भगृह में दर्शन में परेशानी हो रही थी। अब वृंदावन में गोस्वामियों के दो गुट इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। एक गुट इसे परंपरा से छेड़छाड़ मान रहा है। वहीं दूसरा इसे व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक कदम बता रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद आपसी बातचीत से सुलझता है या आगे और बढ़ता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
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