राहुल गांधी माफी मांगो: 204 पूर्व अधिकारियों की खुली चिट्ठी
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- 12 मार्च को राहुल गांधी संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर सांसदों के साथ बैठकर चाय और बिस्किट खाते नजर आए।
- स्पीकर ने संसद परिसर में धरना-प्रदर्शन पर पहले ही रोक लगा रखी थी, लेकिन विपक्ष ने इसे नजरअंदाज किया।
- 204 पूर्व अधिकारियों ने एक खुली चिट्ठी जारी कर राहुल गांधी के इस व्यवहार की कड़ी आलोचना की।
- इस पत्र पर 116 पूर्व सैन्य अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह, चार राजदूत और चार वकील के दस्तखत हैं।
- सभी हस्ताक्षरकर्ताओं ने राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की है।
204 अफसरों का राहुल को पत्र
17 मार्च 2026। देश के 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) राहुल गांधी को खुली चिट्ठी लिखी है। इस पत्र में राहुल गांधी के संसद परिसर में हुए व्यवहार पर गंभीर चिंता जताई गई है। पत्र मंगलवार को सार्वजनिक किया गया।
यह पत्र पूर्व जम्मू-कश्मीर डीजीपी एसपी वेद ने जारी किया। उन्होंने इसे देशवासियों को संबोधित करते हुए जारी किया। पत्र पर 116 पूर्व सैन्य अधिकारी, 84 पूर्व नौकरशाह, चार राजदूत और चार वकील के दस्तखत हैं।
12 मार्च की घटना क्या थी?
12 मार्च को राहुल गांधी संसद के मकर द्वार पर विपक्षी सांसदों के साथ एक धरने में शामिल हुए। इस दौरान वे सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्किट खाते दिखे। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं। यह धरना एलपीजी की कमी के मुद्दे पर आयोजित किया गया था।
लोकसभा स्पीकर ने पहले ही संसद परिसर में धरना-प्रदर्शन पर स्पष्ट रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने यह निर्देश नजरअंदाज किया। पत्र लिखने वाले पूर्व अधिकारियों ने इसे स्पीकर की कुर्सी की खुली अवज्ञा बताया।
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सीढ़ियों पर चाय पर क्यों हुआ हंगामा?
पत्र में कहा गया कि राहुल गांधी देश के सर्वोच्च विधायी निकाय के सदस्यों के लिए अपेक्षित आचरण के बिल्कुल विपरीत तरीके से सीढ़ियों पर बैठकर चाय-बिस्किट खाते नजर आए।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि संसद की सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी भी उसी मर्यादा के हकदार हैं जो सदन के भीतर होती है। यह महज औपचारिकता नहीं, बल्कि संविधान की भावना से जुड़ा मामला है।
एसपी वेद ने ANI से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी का यह व्यवहार नेता प्रतिपक्ष जैसे जिम्मेदार पद के लिए बिल्कुल उचित नहीं है। वे ड्रामेबाजी में लगे रहते हैं और संसद की सीढ़ियों पर नारेबाजी के बीच चाय पीते हैं।
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पत्र में क्या-क्या लिखा गया?
पत्र में कहा गया है कि राहुल गांधी के कार्य देश और लोकतंत्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह तथ्य और भी चिंताजनक है कि यह व्यवहार उस व्यक्ति का है जो नेता प्रतिपक्ष जैसे अहम पद पर बैठा है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि संसद भारत के संवैधानिक ढांचे में एक अनूठी और उच्च स्थिति रखती है। इसकी मर्यादा बनाए रखना लोकतांत्रिक कामकाज के लिए जरूरी है। पत्र में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी बार-बार संसद के अंदर और बाहर नाटकबाजी के जरिए सार्वजनिक विमर्श के स्तर को नीचे गिराते रहे हैं।
पत्र में आगे लिखा गया कि इन हरकतों से सार्वजनिक समय और संसाधन बर्बाद होते हैं। यह सब इस बात का संकेत है कि राहुल गांधी संसद को लोकतांत्रिक बहस की जगह नहीं, बल्कि उकसावे का मंच मानते हैं।
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माफी की मांग क्यों?
पत्र में साफ लिखा गया कि राहुल गांधी को इस व्यवहार के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए और आत्मचिंतन करना चाहिए, ताकि संसद की पवित्रता और गरिमा बनी रहे।
एसपी वेद ने कहा कि स्पीकर ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद राहुल गांधी सदन की मर्यादा को नहीं समझ रहे। उन्हें एक जिम्मेदार नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए। घमंड और अधिकार-बोध की नहीं, बल्कि विनम्रता की जरूरत है।
वेद ने कहा कि जब राहुल गांधी बोलते हैं तो लोग सुनते हैं। देश की आकांक्षाएं संसद में होने वाली बहस और उससे निकलने वाले कानूनों पर टिकी हैं। इसीलिए नेता प्रतिपक्ष का आचरण सबसे ज्यादा जिम्मेदार होना चाहिए।
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BJP ने भी साधा निशाना
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुवाहाटी की एक रैली में राहुल गांधी के इस व्यवहार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वे देश और उसकी संस्थाओं को बदनाम कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने इस घटना से जुड़ी सामग्री के साथ एक पेन ड्राइव लोकसभा स्पीकर को सौंपा और कहा कि इन हरकतों से संसद की गरिमा कम हुई है।
पूर्व अफसरों की पीड़ा
हस्ताक्षरकर्ताओं ने लिखा कि जिन नागरिकों ने दशकों तक देश की सेवा की, वे राहुल गांधी और उनके साथियों के इस रवैये को देखकर गहरी पीड़ा महसूस करते हैं। ये प्रयास लोकतंत्र के इस मंदिर को कमजोर करने का जोखिम उठाते हैं।
पत्र की भाषा संयमित लेकिन कड़ी है। यह महज एक औपचारिक शिकायत नहीं है। यह उन लोगों की आवाज है जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्थाओं को मजबूत बनाने में लगाया।
FAQ
- 204 पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी को पत्र क्यों लिखा?
204 पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी को खुली चिट्ठी इसलिए लिखी क्योंकि 12 मार्च 2026 को राहुल गांधी संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर सांसदों के साथ बैठकर चाय और बिस्किट खाते नजर आए। यह धरना एलपीजी की कमी के विरोध में था। लोकसभा स्पीकर पहले ही संसद परिसर में प्रदर्शन पर रोक लगा चुके थे। पत्र में इसे संसद की मर्यादा का उल्लंघन बताया गया और राहुल गांधी से देश से माफी मांगने की मांग की गई। - संसद परिसर में आचरण के नियम क्या कहते हैं?
संसदीय परंपरा और लंबे समय से चली आ रही परिपाटी के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों से जुड़ी पवित्रता संसद परिसर के सभी हिस्सों पर लागू होती है। इसमें सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी सभी शामिल हैं। ये इमारत के मामूली हिस्से नहीं, बल्कि संसद के अभिन्न अंग हैं। इसीलिए यहां भी वही मर्यादा अपेक्षित है जो सदन के भीतर होती है। इसके अतिरिक्त, स्पीकर ने परिसर में धरना-प्रदर्शन पर भी स्पष्ट रोक लगा रखी थी।
parliamentary decorum | Lok Sabha Speaker। आदर्श आचार संहिता