राज्यसभा में बीजेपी को बहुमत: जानिए कैसे जीतीं अतिरिक्त सीटें और क्या होगा असर?
Aman Vaishnav | Mar 17, 2026, 15:05 IST
bjp rajya sabha election victory analysis
राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने रणनीति से बहुमत हासिल कर लिया है। बिहार, ओडिशा और हरियाणा के नतीजों ने विपक्ष को चौंका दिया है। जानिए कैसे क्रॉस वोटिंग और विधायकों की अनुपस्थिति ने बदली संसद की तस्वीर और मोदी सरकार अब कितनी ताकतवर है।
News In Short
- बीजेपी ने राज्यसभा में अब पूर्ण बहुमत पा लिया है।
- एनडीए के पास अब कुल 140 सांसद हो गए हैं।
- ओडिशा और बिहार में बीजेपी ने अतिरिक्त सीटें जीतीं है।
- विपक्ष के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।
- अब सरकार को छोटे दलों पर निर्भर नहीं रहना होगा।
News In Detail
राज्यसभा का नया समीकरण
अब राज्यसभा में एनडीए के कुल 140 सांसद हैं। यह संख्या बहुमत के आंकड़े से 17 अधिक है। अब सरकार को बीजेडी या वाईएसआरसीपी की जरूरत नहीं होगी। वह अपने दम पर कोई भी बिल पास करा सकेगी। यह जीत केवल भाग्य नहीं बल्कि, चुनावी रणनीति है।
बिहार में कैसे हुआ बड़ा खेल
कांग्रेस के मनोहर प्रसाद और मनोज विश्वास भी नहीं आए थे। तीसरे विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी मतदान नहीं किया था। इन चारों विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्ष को कमजोर किया है। इससे एनडीए के उम्मीदवारों की राह बहुत आसान हो गई है।
नितिन नबीन और नीतीश कुमार को 44-44 वोट मिले हैं। शिवेश राम की जीत में दूसरी वरीयता के वोट काम आए हैं। उन्होंने आरजेडी के एडी सिंह को अंत में हरा दिया है। बिहार जैसी ही रणनीतिक जीत ओडिशा में भी दिखी है।
ओडिशा में रणनीति की जीत
इनमें कांग्रेस के रमेश जेना और सोफिया फिरदौस शामिल थे। बीजेडी के देवी रंजन और सौविक ने भी क्रॉस वोटिंग की थी। इनके साथ चक्रमणि कहार और सुभाषिनी जेना ने भी साथ दिया। बीजेडी के 8 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया।
हरियाणा में आधी रात का फैसला
मल्लिकार्जुन खरगे ने आयोग को एक कड़ी चिट्ठी लिखी है। जांच के बाद परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया है। हालांकि अनिल विज का वोट बिल्कुल सही पाया गया है। वहीं इनेलो के विधायक वोटिंग की प्रक्रिया से दूर रहे।
इसका असर जीत के लिए जरूरी वोटों पर पड़ा है। अंत में संजय भाटिया और कर्मवीर सिंह बौध जीत गए। सतीश नांदल को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। अब राज्यसभा वोटिंग के नियमों को समझना भी जरूरी है।
कैसे चुना जाता है सांसद?
फार्मूला है: कुल विधायक / (खाली सीटें + 1) + 1
विधायकों को अपना वोट पार्टी एजेंट को दिखाना पड़ता है। वोट न दिखाने पर उसे रद्द कर दिया जाता है। इस चुनाव में पार्टियों का व्हिप लागू नहीं होता। यही कारण है कि विधायक खुलकर क्रॉस वोटिंग करते हैं।
अब और मजबूत होगी मोदी सरकार
अब विवादास्पद बिल भी बिना किसी रुकावट के पास होंगे। हालांकि विपक्ष की भूमिका अब बहुत कम रह जाएगी। आम सहमति बनाने की परंपरा अब कमजोर हो सकती है। सरकार अब सीधे अपने एजेंडे पर काम कर सकेगी।
बहुमत के मुख्य फायदे:
- महत्वपूर्ण बिल अब आसानी से पास हो सकेंगे।
- सहयोगी दलों के दबाव से पूरी मुक्ति मिलेगी।
- सरकार विधायी कार्यों में अधिक स्वतंत्र होगी।
लोकतांत्रिक चुनौतियां:
- विपक्ष के साथ चर्चा की गुंजाइश कम होगी।
- छोटे दलों की आवाज दबाई जा सकती है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र का नया अध्याय
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FAQ
- 1. राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
पार्टी अपने विधायक को दल से निकाल सकती है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष को अर्जी देनी होती है। फिर विधायक की सदन की सदस्यता खत्म हो सकती है। हालांकि राजनीतिक दल अक्सर ऐसी कड़ी कार्रवाई नहीं करते। - 2. राज्यसभा में बहुमत मिलने से कामकाज में क्या बदलाव आएगा?
अब सरकार को बाहरी दलों का समर्थन नहीं चाहिए। बड़े और कड़े बिल अब बिना रुके पास होंगे। विपक्ष के विरोध का सरकार पर असर नहीं पड़ेगा। सरकार अब अपने फैसले अधिक मजबूती से ले सकेगी। - 3. राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग की व्यवस्था क्यों शुरू की गई?
यह व्यवस्था साल 2003 में अटल सरकार ने बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार और नोट का खेल रोकना था। इससे विधायक दूसरे दलों से पैसा लेकर वोट नहीं पाएंगे। पारदर्शिता के लिए एजेंट को वोट दिखाना जरूरी है।
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