सबरीमाला मंदिर का वो सच जो महिलाओं पर पड़ गया फीका, जानें इस मंदिर का इतिहास

Kaushiki | Apr 08, 2026, 15:54 IST
सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है। यहां 10-50 वर्ष की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है। जानें मंदिर का इतिहास और कठिन पूजा नियम।
1 7 भगवान अयप्पा का मंदिर
Sabarimala Temple

सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है, जो ब्रह्मचर्य के पालन के लिए जाने जाते हैं। इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं और महिलाओं के प्रवेश को लेकर एक बार फिर बड़ी कानूनी बहस छिड़ी हुई है। कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या धार्मिक आस्थाएं संवैधानिक समानता के अधिकार से ऊपर हो सकती हैं। इस बहस ने पूरे देश के आस्था और कानून के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। तो ऐसे में आइए इसके इतिहास के बारे में समझते हैं।

2 7 सबरीमाला मंदिर का इतिहास
Sabarimala Temple

सबरीमाला मंदिर केरलम (केरल) के पतनमथिट्टा जिले की पहाड़ियों पर स्थित प्राचीन और पवित्र स्थान है। ये मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव और मोहिनी (विष्णु जी का रूप) का पुत्र माना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान अयप्पा स्वामी ने इसी स्थान पर महिषी राक्षसी का वध करने के बाद घोर तपस्या की थी। इनके अलावा भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है।

3 7 कैसे हुआ सबरीमाला मंदिर का निर्माण
Sabarimala Temple

मंदिर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, राजा राजसेखरा को अयप्पा स्वामी पंपा नदी के किनारे बाल रूप में मिले थे। राजा ने उन्हें अपने पुत्र की तरह महल में पाला और बड़ा किया। रानी ने अपना बेटा होने पर अयप्पा को जंगल भेजने की चाल चली। उन्होंने बीमारी का बहाना बनाकर शेरनी का दूध लाने की शर्त रखी। अयप्पा जी जंगल गए और वहां उन्होंने एक भयंकर राक्षसी का वध किया। उनकी शक्ति देखकर इंद्र देव ने स्वयं शेरनी को महल तक भेजा। इसके बाद अयप्पा जी ने राजपाट त्याग कर तपस्या का रास्ता चुना। उन्होंने पिता को दर्शन देकर इसी पवित्र स्थान पर मंदिर बनवाया।

4 7 महिलाओं के प्रवेश पर रोक की वजह
Sabarimala Temple

जानकारी के मुताबिक, इस मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। क्योंकि भगवान अयप्पा नैष्ठिक ब्रह्मचारी हैं। मान्यता है कि भगवान ने खुद को पूरी तरह से तपस्या और ब्रह्मचर्य के लिए समर्पित कर दिया था। इसलिए 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाएं नहीं जातीं। अयप्पा स्वामी को ब्रह्मचारी माना गया है, इसी वजह से मंदिर में उन महिलाओं का प्रवेश वर्जित माना जाता है जो रजस्वला हो सकती थीं।

5 7 सबरीमाला मंदिर में पूजा का कठिन विधान
Sabarimala Temple

मान्यता के मुताबिक, सबरीमाला जाने के लिए भक्तों को 41 दिनों का कठिन मंडलम व्रत रखना पड़ता है। इसमें सात्विक जीवन और ब्रह्मचर्य अनिवार्य है। इसमें नीले या काले कपड़े पहने जाते हैं। मुख्य पूजा साल में दो बार होती है। नवंबर-दिसंबर (मंडलम)। जनवरी में मकर संक्रांति के दौरान, जिसे मकरविलक्कू कहा जाता है। इस दौरान भक्त अपने सिर पर इरुमुडी (प्रसाद की पोटली) रखकर 18 सीढ़ियां चढ़कर भगवान के दर्शन करते हैं।

6 7 सबरीमाला मंदिर का प्रसाद
Sabarimala Temple

सबरीमाला मंदिर का सबसे खास प्रसाद अरावणा पायसम है। इसे चावल, गुड़ और घी से तैयार किया जाता है। इसके अलावा भक्तों को अप्पम भी प्रसाद के रूप में दिया जाता है। श्रद्धालु भगवान अयप्पा को चढ़ाने के लिए अपने साथ इरुमुडी में घी से भरा नारियल भी लेकर आते हैं।

7 7 सबरीमाला मंदिर पहुंचने का रास्ता
Sabarimala Temple

तिरुवनंतपुरम सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है और चेंगन्नूर सबसे पास का रेलवे स्टेशन है। कोच्चि और कोट्टायम जैसे बड़े शहरों से भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। ठहरने के लिए पंपा और सन्निधानम में मंदिर बोर्ड के कमरे उपलब्ध हैं। लाखों श्रद्धालु हर साल भारी सुरक्षा और कड़े नियमों के बीच अयप्पा स्वामी के दर्शन कर रहे हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पहाड़ियों पर शांति बनाए रखने के लिए कमांडो बल और सीसीटीवी कैमरों की तैनाती की है। मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए भक्तों से अपील की गई है कि वे सभी पारंपरिक नियमों का पालन करें।