सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की प्राइवेट, डीम्ड यूनिवर्सिटी के ऑडिट का दिया आदेश, 8 जनवरी 2026 को अगली सुनवाई
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यूनिवर्सिटी ने क्या किया?
यूनिवर्सिटी ने रिकॉर्ड्स में नाम बदलने से साफ मना कर दिया। आयशा ने एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम नाम रखने के कारण उनके साथ बदसलूकी हुई।
इन वजहों से वह क्लास में कम हाजिर हो पाईं। वह मिनिमम अटेंडेस का क्राइटेरिया पूरा नहीं कर पाईं। वह एग्जाम नहीं दे सकीं। उनका पूरा साल बर्बाद हो गया। छात्रा ने शिक्षा मंत्रालय और UGC (university grants commission) से शिकायत की। यूनिवर्सिटी ने मेल्स पर ध्यान नहीं दिया।
कोर्ट ने दिया मुआवजा
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने Amity Universityके वाइस चांसलर डॉ. अतुल चौहान को बुलाया। कोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट का पूरा साल खराब हुआ है। वाइस चांसलर को इसका समाधान निकालना चाहिए।
इस बीच आयशा ने दूसरी जगह एडमिशन ले लिया था। एमिटी यूनिवर्सिटी ने उनकी फीस वापस कर दी थी। कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को मुआवजा देने का आदेश दिया। छात्रा को 1 लाख रुपए का कंपनसेशन मिला।
केस PIL में बदला
20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया। कोर्ट ने इस केस को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानी PIL में बदल दिया। जस्टिस अमानुल्लाह और जस्टिस एन वी अंजरिया की बेंच थी।
बेंच ने कहा कि सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (Private University) की जांच की जाए। उनके बनने, स्थापित होने और चलने के सभी पहलुओं की जांच हो। कोर्ट ने इसे छात्रों के अधिकारों से जोड़ा है। उन्होंने Higher education में ट्रांसपेरेंसी को जरूरी बताया।
शीर्ष अधिकारी होंगे जिम्मेदार
कोर्ट ने साफ किया है कि यह काम किसी जूनियर अधिकारी को नहीं दिया जा सकता। इसके लिए शीर्ष अधिकारियों को ही जिम्मेदारी उठानी होगी।
गलत या अधूरी जानकारी देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2026 को होगी। सभी एफिडेविट इससे पहले जमा करने होंगे।
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