सीजेआई सूर्यकांत का CJP मामले में सुनवाई से इनकार, बोले- हमारा समय खराब न करें

Kaushiki | Jul 22, 2026, 14:17 IST
cjp protest police action
सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई से मना कर दिया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमारा समय खराब न करें। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में तुरंत दखल देने से साफ इनकार किया था।

CJP Protest Case: दिल्ली की सड़कों पर हुआ हंगामा अब अदालतों तक पहुंच चुका है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट से याचिकाकर्ताओं को झटका लगा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले में तुरंत सुनवाई से मना कर दिया है। उन्होंने याचिकाकर्ता के वकील को सख्त शब्दों में जवाब दिया है।



कोर्ट ने कहा कि समय बर्बाद करने की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल CJP के मार्च के दौरान पुलिस ने कार्रवाई की थी। वकील का दावा था कि पुलिस ने काफी बर्बरता दिखाई है।



उन्होंने कोर्ट से वीडियो देखने का अनुरोध भी किया था। लेकिन सीजेआई ने वीडियो देखने से साफ मना कर दिया। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट भी अर्जी ठुकरा चुका है। दोनों अदालतों के इस रुख से याचिकाकर्ताओं को निराशा हुई है। आइए जानते हैं कि अदालत में क्या बातें हुईं।



20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद मार्च निकाला था। इस दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के


CJI सूर्यकांत ने वकील से क्या कहा

अदालत में याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी बात रखनी चाही। CJI सूर्यकांत ने कहा कि यह छात्रों के भविष्य से जुड़ा मामला है। छात्र NEET परीक्षा में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं। साथ ही टेस्टिंग एजेंसी की कमियों को दूर करना चाहते हैं।



इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने उन्हें बीच में रोक दिया। उन्होंने कहा कि हमारा और अपना समय खराब न करें। वकील ने दलील दी कि पुलिस की बर्बरता के वीडियो हैं। सीजेआई ने कहा कि हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे पास यह सब देखने का वक्त नहीं है।



क्या था CJP का पूरा प्रदर्शन

यह मामला 20 जुलाई को हुए एक प्रदर्शन से जुड़ा है, जो संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हुआ था। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हजारों छात्र और युवा प्रोटेस्टर्स जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करते हुए दिल्ली के केंद्र तक पहुंच गए थे।



प्रोटेस्टर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रोटेस्टर्स की मांग थी कि परीक्षा पेपर लीक के आरोपों को लेकर शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए में सुधार और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की भी मांग उठाई।





रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रोटेस्टर्स ने संसद परिसर के पास लगाए गए पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।



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दिल्ली हाई कोर्ट का भी सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट से पहले यह मामला हाई कोर्ट गया था। मंगलवार (21 जुलाई) को दिल्ली हाई कोर्ट में भी याचिका दायर हुई थी। हाई कोर्ट ने भी तुरंत सुनवाई करने से सीधे मना कर दिया।



अदालत ने कहा कि कोर्ट को इन मामलों में न घसीटें। दोनों प्रमुख अदालतों के बयानों से स्थिति स्पष्ट हो गई। न्यायालय ऐसे राजनीतिक बवालों में तुरंत दखल नहीं देना चाहता। कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालना पुलिस का काम है।



कोर्ट ने क्यों किया इनकार

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने इस मामले की तुरंत सुनवाई की मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला इस स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग नहीं करता। जब वकील ने पुलिस ज्यादती से जुड़े कथित वीडियो का हवाला दिया, तो सीजेआई ने साफ कहा कि कोर्ट मेंशनिंग स्टेज पर वीडियो नहीं देखेगी।



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दिल्ली पुलिस ने अफवाहों को नकारा

इस बीच दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को खारिज कर दिया है। इनमें प्रदर्शन के दौरान किसी की मौत होने का दावा किया जा रहा था।



पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी की जान नहीं गई। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि की जानकारी पर भरोसा न करें। सिर्फ आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही यकीन करें।



दिल्ली पुलिस ने एक अन्य दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा जा रहा था कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस दावे को भी बेबुनियाद बताया।



जंतर मंतर पर कैसे भड़की थी हिंसा

ऑनलाइन बनी पार्टी ने सोमवार को संसद मार्च बुलाया था। कार्यकर्ता अभिजीत दीपके के साथशिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन जंतर मंतर से संसद की तरफ बढ़ रहा था।



अचानक कुछ प्रदर्शनकारी काफी उग्र और हिंसक हो गए। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस झड़प में भारी संख्या में लोग घायल हुए।



करीब 118 पुलिसकर्मी इस हिंसा में चोटिल हुए हैं। वहीं 60 प्रदर्शनकारियों (cjp protest) को भी चोटें आई हैं। यह देखना बाकी है कि यह मामला आगे किस तरह आगे बढ़ता है।



FAQ

  1. CJP प्रदर्शन मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
    सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि हमारा समय बर्बाद न करें और अपना समय बर्बाद न करें। कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने से मना कर दिया और तुरंत सुनवाई से सीधे इनकार कर दिया।
  2. दिल्ली के जंतर मंतर पर CJP मार्च के दौरान क्या हुआ था?
    CJP के संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी उग्र हो गए थे। उन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने कार्रवाई की, जिसमें 118 पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। यह प्रदर्शन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर था।
  3. क्या दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई की?
    नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मंगलवार को इस तरह की याचिका पर तुरंत सुनवाई से साफ मना कर दिया था। हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस तरह के मामलों में कोर्ट को न घसीटें।

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